अमेरिका की चेतावनियों को भारत ने टायर तले कुचला, चाबहार पोर्ट पर ही दौड़ा दी ट्रक, कई देशों में तहलका

By अभिनय आकाश | Sep 27, 2025

भारत के ट्रकों ने मक्कारी कर रहे कई देशों में हड़कंप मचा दिया है। भारत से लगातार गद्दारी कर रहे अमेरिका को जवाब देने के लिए भारत ने इन ट्रकों का इस्तेमाल जबरदस्त कूटनीतिक हमले के लिए किया है। भारत ने इन ट्रकों के जरिए अपनी इंसानियत और अमेरिका की हैसियत पूरी दुनिया के सामने दिखा दी है। दरअसल, अपनी बातें मनवाने और भारत पर दबाव डालने के लिए डोनाल्ड ट्रंप एक मैक्सिमम प्रेशर पॉलिसी पर काम कर रहे हैं। इन पॉलिसी में अलग अलग सेक्टर पर टैरिफ लगाना, एच1बी वीजा का शुल्क बढ़ाना शामिल है। पाकिस्तान से दोस्ती और रूस का नाम लेकर भारत को कोसना भी ट्रंप की मैक्सिमम प्रेशर पॉलिसी का हिस्सा है। अमेरिका ये सब इसलिए कर रहा है क्योंकि भारत उसकी बात मान जाए। 

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भारत को चोट पहुंचाने के लिए अमेरिका ने ये ऐलान किया। अब पीएम मोदी ने इसी चाबहार पोर्ट पर ट्रक दौड़ा दिए हैं। भारत ने पिछले महीने आए भीषण भूकंप से तबाह हुए अफ़ग़ानिस्तान को मानवीय सहायता की एक नई खेप भेजी है। तीन कंटेनरों में भरी यह राहत सामग्री चाबहार बंदरगाह के रास्ते काबुल पहुँची और अफ़ग़ान अधिकारियों को सौंप दी गई। इस सहायता के साथ, प्रभावित लोगों की सहायता के लिए भेजी गई सहायता की यह तीसरी खेप है। इस खेप में खाद्य आपूर्ति, वाटर प्यूरीफायर, प्रोटीन पाउडर, टिन की चादरें, स्लीपिंग बैग, स्वच्छता किट, जल भंडारण टैंक, जनरेटर सेट, पारिवारिक टेंट, कंबल, आवश्यक दवाइयाँ और अन्य चिकित्सा सामग्री जैसी आवश्यक वस्तुएँ शामिल हैं। यह प्रयास भूकंप के बाद राहत प्रदान करने के लिए भारत की निरंतर प्रतिबद्धता को दर्शाता है, जिसमें 2,200 से ज़्यादा लोगों की जान चली गई थी। ईरान स्थित चाबहार बंदरगाह के इस्तेमाल से यह राहत सामग्री पहुँचाने में आसानी हुई, जिससे क्षेत्रीय रसद चुनौतियों के बीच सहायता के लिए एक वैकल्पिक मार्ग का पता चला।

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विदेश मंत्रालय ने सहायता के आगमन की घोषणा करते हुए कहा कि यह भूकंप प्रभावित क्षेत्रों की मौजूदा ज़रूरतों को पूरा करने के लिए पहले भेजी गई खेपों पर आधारित है। चूंकि पुनर्प्राप्ति प्रयास जारी हैं, इस नवीनतम सहायता का उद्देश्य अफगानिस्तान में तत्काल राहत प्रदान करना तथा दीर्घकालिक पुनर्निर्माण प्रयासों को समर्थन प्रदान करना है। भारत की ओर से राहत सामग्री की पहली खेप 1 सितंबर को भेजी गई, जिसमें काबुल में 1,000 परिवारों के लिए टेंट शामिल थे। इसके अलावा, भारतीय मिशन द्वारा काबुल से कुनार प्रांत तक 15 टन खाद्य सामग्री भी पहुँचाई गई।

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