जितना तेल चाहिए हम देंगे...भारत तो अपना 1 नंबर दोस्त, रूस ने ऐलान कर पूरा अमेरिका-यूरोप हिलाया

By अभिनय आकाश | Sep 08, 2026

भारत और रूस की दोस्ती एक बार फिर दुनिया के केंद्र में है। एक तरफ अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से टेरिफ की धमकियां। वहीं दूसरी तरफ रूस ने दिल्ली में ऐसा बयान दिया जिसने वाशिंगटन में खलबली मचा दी। दिल्ली में रूसी राजदूत डेनिस अलीपोब ने साफ कह दिया कि भारत को जितने तेल की जरूरत है, रूस उतना तेल देने को तैयार है। उन्होंने अमेरिका के प्रेशर यानी दबाव की राजनीति पर कड़ा प्रहार किया। दरअसल, रूसी राजदूत डेनिस अलीपोब ने बहुत बड़ी बात कह दी। उन्होंने कहा कि रूस भारत की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध है। अलीपोप का कहना था कि रूस तेल की आपूर्ति बढ़ाने को भी तैयार है। चाहे परिस्थिति कैसी भी हो लेकिन यहां सबसे महत्वपूर्ण बात वो थी जो अमेरिका के बारे में कही गई। उन्होंने कहा कि जो देश भारत पर बैन और टेरिफ की बात कर रहे हैं वो असल में ईमानदार सहयोग के बजाय दबाव का रास्ता चुन रहे हैं।

अमेरिका में एक ऐसा बिल पेश किया गया जो भारत समेत रूस से तेल खरीदने वाले टॉप पांच देशों को निशाना बनाता है। सेनेटर लैंडसे ग्राहम के समर्थन वाला बिल ट्रंप प्रशासन को अधिकार देता है कि वह उन देशों पर 100% तक टेरिफ लगा सकते हैं जो रूस से तेल या गैस खरीद रहे हैं। अमेरिका का तर्क है कि भारत रूस से तेल खरीद कर पुतिन की वॉर मशीन को पैसा दे रहा है। ट्रंप पहले भी कह चुके हैं कि वह भारत जैसे देशों पर भारी शुल्क लगाएंगे जो अमेरिकी हितों के खिलाफ काम करते हैं। अब रूसी राजदूत ने सिर्फ भारत को ऑफर नहीं दिया बल्कि दुनिया को चेतावनी दे दी। उन्होंने कहा कि दुनिया का एनर्जी मार्केट रूस के बिना नहीं चल सकता। अगर रूसी तेल को बाजार से बाहर करने की कोशिश की गई तो पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था चरमरा जाएगी। भारत के लिए अच्छी बात यह है कि रूस का मानना है कि भारत अपना हित देखना जानता है।

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अलीपोब ने इसीलिए कहा कि भारत ने बार-बार दिखाया कि वो अपने नेशनल इंटरेस्ट यानी राष्ट्रीय हितों की रक्षा करने में सक्षम है और किसी के दबाव में आकर फैसला नहीं लेता है। अब भारत का रुख भी जान लीजिए। भारत को रुख है राष्ट्र हित सर्वोपरि। भारत का स्टैंड इस पूर्व विवाद में बहुत साफ रहा है। विदेश मंत्रालय यानी कि एमए ने कई बार कहा है कि भारत के लिए अपनी विशाल आबादी की ऊर्जा सुरक्षा पहली प्राथमिकता है। एस जयशंकर दुनिया के हर बड़े मंच पर कह चुके हैं कि यूरोप रूस से गैस खरीदे तो ठीक लेकिन भारत तेल खरीदे तो गलत। भारत अपनी रणनीतिक स्वायता को बनाए हुए हैं। हम रूस से सस्ता तेल खरीद कर अपने देश में महंगाई को कंट्रोल कर रहे हैं और साथ ही अमेरिका के साथ अपने रक्षा और तकनीकी रिश्तों को भी मजबूत कर रहे हैं। ये एक बहुत ही बारीकी डिप्लोमेटिक बैलेंस है। 

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 अगर रूस से तेल मिलना बंद हुआ या महंगा हुआ तो भारत में पेट्रोल डीजल के दाम आसमान छू जाएंगे। भारत और रूस अब रुपी वर्ल्ड ट्रेड को बढ़ावा दे रहे हैं जो डॉलर के प्रभुत्व के लिए सबसे बड़ी चुनौती है और ट्रंप के लिए सबसे बड़ा सिरदर्द बन जाएगा वो भी खुल्लम खुल्ला। रूस का यह बयान कि हम जितना चाहिए उतना तेल देंगे भारत को। असल में भारत को यह भरोसा दिलाना है कि उसे अमेरिका की धमकियों से डरने की जरूरत नहीं है क्योंकि उसके पास एक ऐसा विश्वसनीय बैकअप मौजूद है जो दुनिया में किसी के पास भी नहीं है। 

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