By डॉ. वेदप्रताप वैदिक | Jan 23, 2020
आज तीन-चार खबरों को एक साथ रखकर मैं सोचता रहा कि आशा की किरण भी उभर रही है और साथ ही घनेरे बादल भी छाते चले जा रहे हैं। एक तरफ डोनाल्ड ट्रंप और इमरान दावोस में मिल रहे हैं और ट्रंप कह रहे हैं कि आप चाहें तो मैं कश्मीर के मामले में मध्यस्थता करूँ ? मोदी और ट्रंप की घनिष्टता से कौन परिचित नहीं है ? उन्होंने मोदी को ‘भारत का पिताजी’ कहा था। ट्रंप ने मोदी के सामने भी कश्मीर पर मध्यस्थता का प्रस्ताव रखा था। इधर अटलजी के सलाहकार सुधींद्र कुलकर्णी अभी पाकिस्तान से लौटे हैं। उन्होंने बताया कि उनकी कई फौजियों, नेताओं, विद्वानों और सामाजिक कार्यकर्ताओं से बात हुई। उनका मूल्यांकन यह था कि पाकिस्तान खुद आतंकवाद से बहुत तंग आ चुका है। वहां की जनता, नेता और फौज भी चाहती है कि कश्मीर का मसला बातचीत से हल किया जाए।
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इस नए नागरिकता कानून से हमारे मुसलमानों को कोई नुकसान नहीं है और भारत को कोई फायदा नहीं है। यह एक फर्जी मामला है, जिसने असली मामले से ज्यादा कोहराम मचा रखा है। भाजपा के स्वयंभू नेता सोचते हैं कि इससे हिंदू वोटों का ध्रुवीकरण उनके पक्ष में हो जाएगा। वे भूलते हैं कि 2019 में उन्हें सिर्फ 37 प्रतिशत वोट मिला है। 60-65 प्रतिशत वोट क्या इसलिए उनके पक्ष में हो जाएगा कि वे पाकिस्तान और मुसलमानों के विरोध में हैं ? पाकिस्तान और मुसलमान 2024 में भाजपा को नहीं जिता सकते लेकिन तब तक के लिए उनसे भाजपा के संबंध ठीक होने की भी उम्मीद कैसे की जाए ? गृहमंत्री अमित शाह ने लखनऊ में साफ-साफ कह दिया है कि वे पीछे नहीं हटेंगे।
-डॉ. वेदप्रताप वैदिक