देश में मजबूत नेतृत्व होता, तो भारत को 1962 में चीन के खिलाफ हार का सामना नहीं करना पड़ता, राज्यपाल का बयान

By रेनू तिवारी | Nov 21, 2021

ईटानगर। चांगलांग जिले में राजपूत रेजीमेंट की 14वीं बटालियन के ऑपरेशनल बेस पर 'सैनिक सम्मेलन' को संबोधित करते हुए राज्यपाल ने कहा कि देश को कभी भी अपनी सुरक्षा कम नहीं करनी चाहिए। अरुणाचल प्रदेश के राज्यपाल ब्रिगेडियर (सेवानिवृत्त) बीडी मिश्रा ने सेना के जवानों को सीमाओं पर किसी भी घटना के लिए तैयार रहने का आह्वान करते हुए शनिवार को कहा कि भारत को 1962 में चीन के खिलाफ "हार" का सामना नहीं करना पड़ता अगर देश में एक मजबूत नेतृत्व होता, उनका यह बयान  राजभवन द्वारा जारी किया गया।

अरुणाचल प्रदेश के राज्यपाल ब्रिगेडियर (सेवानिवृत्त) बीडी मिश्रा ने सेना के जवानों से सीमा पर किसी भी स्थिति के लिये तैयार रहने का आह्वान करते हुए शनिवार को कहा कि अगर देश में एक मजबूत नेतृत्व होता, तो भारत को 1962 में चीन के खिलाफ ‘‘हार’’ का सामना नहीं करना पड़ता। राजभवन की ओर से जारी बयान में यह जानकारी दी गयी। चांगलांग जिले में राजपूत रेजीमेंट की 14वीं बटालियन के ऑपरेशनल बेस पर ‘‘सैनिक सम्मेलन’’ को संबोधित करते हुए राज्यपाल ने कहा कि देश को कभी भी अपनी सुरक्षा कम नहीं करनी चाहिए।

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 जमीनी समीकरण बदल गए भारत अब दुनिया के सबसे शक्तिशाली सशस्त्र बलों में से एक

अरुणाचल प्रदेश के राज्यपाल ब्रिगेडियर (सेवानिवृत्त) बीडी मिश्रा ने कहा, ‘‘अगर 1962 में भारत के पास एक मजबूत नेतृत्व होता, तो हमें चीन के खिलाफ हार का सामना नहीं करना पड़ता। अब, जमीनी समीकरण बदल गए हैं। भारत दुनिया के सबसे शक्तिशाली सशस्त्र बलों में से एक है। हालांकि, हमें अपनी सुरक्षा को कम नहीं करना चाहिए। प्रत्येक सैनिक को हमारी सीमाओं पर किसी भी स्थिति के लिए खुद को तैयार रखना चाहिये।’’ मिश्रा ने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार सेना के जवानों के कल्याण के लिए हमेशा चिंतित रहती है।

1965 के भारत-पाकिस्तान युद्ध में   ब्रिगेडियर (सेवानिवृत्त) बीडी मिश्रा ने लिया था भाग

उन्होंने कहा, ‘‘सुरक्षा बलों के प्रति सरकार के रवैये में काफी बदलाव आया है। अब शीर्ष राजनीतिक नेतृत्व सुरक्षाकर्मियों की भलाई को लेकर बेहद चिंतित है।’’ उन्होंने कर्मियों से अनुशासन बनाए रखने, खुद को कड़ी मेहनत से प्रशिक्षित करने और नागरिकों के साथ मधुर संबंध रखने का आह्वान किया। उन्होंने कहा, ‘‘अगर वर्दीधारी ठान लें, तो वे अपने सभी प्रयासों में सफल होंगे।’’ रेजिमेंट के कंपनी कमांडर के रूप में 1965 के भारत-पाकिस्तान युद्ध में भाग लेने वाले राज्यपाल ने बटालियन और उसके सैनिकों की दक्षता की सराहना की।

मिश्रा ने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सेना के जवानों के कल्याण के लिए हमेशा चिंतित रहता है। सुरक्षा बलों के प्रति सरकार के रवैये में एक बड़ा बदलाव आया है। अब शीर्ष राजनीतिक नेतृत्व सुरक्षा कर्मियों की भलाई के लिए अत्यधिक चिंतित है। उन्होंने कर्मियों से अनुशासन बनाए रखने, खुद को कड़ी मेहनत से प्रशिक्षित करने और नागरिकों के साथ एक मिलनसार संबंध साझा करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा, "अगर वर्दीधारी ठान लें तो वे अपने सभी प्रयासों में सफल होंगे।"

कंपनी कमांडर के रूप में रेजिमेंट के साथ 1965 के भारत-पाकिस्तान युद्ध में भाग लेने वाले गवर्नर ने बटालियन और उसके सैनिकों की दक्षता की सराहना की। बयान में कहा गया है कि प्रशंसा के प्रतीक के रूप में, मिश्रा ने इस अवसर पर रेजिमेंट के 'बड़ा खाना' के लिए भी योगदान दिया।

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