साक्षात्कारः हैलमेट मैन के नाम से मशहूर राघवेंद्र की प्रेरक गाथा

By डॉ. रमेश ठाकुर | Oct 25, 2021

मानवीय कार्यों की अलख जगाने में दौलत नहीं, जज्बे की जरूरी होती है और ये जज्बा हेलमेट मैन के नाम से देशभर में प्रसिद्ध कंप्यूटर इंजीनियर राघवेंद्र में कूट-कूट के भरा है। एक सड़क हादसे में करीबी मित्र की मौत ने उन्हें दूसरों की जान बचाने को प्रेरित किया। मित्र की मौत बिना हेलमेट के चलते हुई, तभी से राघवेंद्र ने लोगों को फ्री में हेलमेट बांटना शुरू किया। इस मुहिम के लिए उन्होंने अपना घर बेचा, जमा पूंजी खर्च की, नामी एमएनसी कंपनी की नौकरी त्यागी और पत्नी के गहने तक बेच डाले। हेलमेट बांटने की उनकी मुहिम ने कइयों की जिंदगियां सहेजी हैं। पेश हैं राघवेंद्र से डॉ. रमेश ठाकुर की हुई बातचीत के मुख्य हिस्से-

इसे भी पढ़ें: Exclusive Interview: गृहराज्य मंत्री अजय मिश्रा ने अपनी सफाई में क्या कहा

प्रश्न- हेलमेट बांटने के पीछे मकसद क्या है आपका?


उत्तर- फ्री में हेलमेट वितरण करने का मकसद लोगों को असमय मौत से बचाना मात्र है। ऐसा क्यों करता हूं, बताता हूं उसकी कहानी। नोएडा एक्सप्रेस-वे पर मेरी मित्र कृष्ण कुमार की बाइक चलाते समय दुर्घटना हुई थी उसने उस वक्त हेलमेट नहीं पहना था। घटना कार चालक की गलती से हुई थी जिसमें उनकी मृत्यु हो गई थी। अगर कार चालक ने सड़क सुरक्षा के नियमों का पालन किया होता तो मेरे मित्र की मौत शायद नहीं होती। तब डॉक्टरों ने भी बताया था कि अगर वह हेलमेट पहने होता तो जान बच भी सकती थी। इन दोनों ही पहलुओं को मैंने अपने जीवन में गंभीरता से लेकर शपथ ली और ठान लिया दूसरों की जान बचाने के लिए हेलमेट का जीवन भर वितरण करूंगा, साथ ही लोगों को सड़क सुरक्षा नियमों के प्रति जागरूक मुहिम चलाउंगा। 

 

प्रश्न- अभी तक कितने हेलमेट बांट चुके हैं आप?


उत्तर- मुहिम को लेकर देशभर से लोगों के फोन कॉल्स आते हैं, उससे हौसला बढ़ता है। बीते 7 सालों में 22 राज्यों में अपने मिशन का विस्तार कर चुका हूं जिनमें 49600 हेलमेट का वितरण हो चुका है। इसके अलावा सड़क सुरक्षा को लेकर भी लगभग 7 लाख निःशुल्क पुस्तकों का वितरण हो चुका है। इस मिशन के लिए मुझे अपनी नौकरी तक छोड़नी पड़ी है। नौकरी के दौरान जो जमा पूंजी पास थी वह भी खत्म हो चुकी है। ग्रेटर नोएडा में एक फ्लैट था उसे भी बेचना पड़ा। मुझे खुशी होती है ऐसे सैंकड़ों परिवार से जो आज मेरे बांटे हेलमेट का प्रयोग कर रहे हैं और अपनी रक्षा कर रहे हैं।

  

प्रश्न- इस मुहिम में खर्च भी बहुत आता होगा?


उत्तर- घर, जमीन, जमा पूंजी सब दांव पर लगा दी। वाइफ के गहने भी बेच दिए। ज्वैलरी बेचकर एक ट्रक हेलमेट खरीदा जिसको उन लोगों तक पहुंचाया जिनके चालान बिना हेलमेट के काटे गए। मुहिम ने तेजी पकड़ी तो पुश्तैनी जमीन भी बेचनी पड़ी। ठाना हुआ है कि कुछ भी हो जाए मरते दम तक मिशन को जिंदा रखूंगा। इसके लिए बैंक से कर्ज भी लिया है करीब 18 लाख रुपए का बैंक कर्ज भी है।

इसे भी पढ़ें: साक्षात्कारः सुनील शास्त्री ने कहा- शास्त्रीजी की मृत्यु की अनसुलझी कहानी से पर्दा हटाया जाये

प्रश्न- पारिवारिक स्थिति के संबंध में कुछ बताएं?


उत्तर- मैं एक बहुत साधारण परिवार से ताल्लुक रखता हूं, पिताजी किसानी करते हैं। चार भाइयों में सबसे छोटा हूं और बचपन से ही अपने माता-पिता को संघर्ष करते देखा है। मुझे पढ़ाने तक के लिए उनके पास पैसे नहीं हुआ करते थे। ट्यूशन पढ़ाकर मैंने अपनी शिक्षा पूरी की है। इंटरमीडिएट के बाद ऊंची शिक्षा लेने के लिए मुझे 5 साल छोटी-मोटी नौकरियां करनी पड़ी। पैसा इकट्ठा करके मैं दिल्ली पहुंचा। सन् 2009 में दिल्ली से लॉ किया। संर्घष आज भी जारी है।


प्रश्न- आपकी इस मुहिम में किसी ने कोई सहयोग किया?


उत्तर- आर्थिक रूप से किसी ने कोई सहयोग नहीं किया, लेकिन प्रशंसा झोली भरकर करते हैं लोग। परिवहन मंत्री नितिन गडकरी भी तारीफ कर चुके हैं, कई बड़े मंचों पर सम्मानित हो चुका हूं। पर, सरकार या किसी सामाजिक संगठन ने कोई सहयोग नहीं किया। मेरे साथ जो प्रशानिक अधिकारी जुड़ते हैं, वह भी हेल्प करने की जगह उल्टा मुझसे हेलमेट मांगते हैं। अभिनेता सोनू सूद ने अभी हाल ही में एक न्यूज चैनल पर मेरी कहानी को लोगों से शेयर किया था। मेरा मिशन एक चुनौती है, उस चुनौती का मैं दिन-रात डटकर सामना करता हूं।


प्रश्न- आपको नहीं लगता सड़क सुरक्षा के प्रति हमारी जागरूकता कमजोर है?


उत्तर- बिल्कुल। देखिए, दोपहिया चालकों के हेलमेट ना लगाने के पीछे बहुत बड़ा कारण है कि हमारी प्राथमिक शिक्षा में सड़क सुरक्षा का ज्ञान नहीं दिया जाता। जबकि बच्चों को जागरूक किया जाना चाहिए। आज कॉलेज-स्कूल प्रशासन भी इन विषयों पर कभी चर्चा नहीं करते। मैंने अपने प्रयास से सुप्रीम कोर्ट से 4 साल के बच्चे के ऊपर कानून पास करवाया, ताकि हमारे देश में प्राइवेट स्कूल, जो झोला बैग और जूते दिया करते हैं वह एक हेलमेट भी देने का नियम बनाएं। ये बच्चे जब बड़े होंगे तो भारत की सड़कों पर बड़े स्तर पर बदलाव देखेंगे, यही बच्चे ट्रैफिक नियमों का ठीक से पालन भी करेंगे। भारत के किसी भी टोल टैक्स पर भी बिना हेलमेट के गुजरने की इजाजत नहीं होनी चाहिए। इस नियम को भी कई जगह हमने लागू करवाने में सफलता पाई है। 


-बातचीत में जैसा हेलमेट मैन राघवेंद्र ने पत्रकार डॉ. रमेश ठाकुर से कहा।

All the updates here:

प्रमुख खबरें

Top 10 Breaking News | 2 February 2026 | Balochistan On Edge | आज की मुख्य सुर्खियाँ यहां विस्तार से पढ़ें

Delhi के Majnu Ka Tila में पाकिस्तानी हिंदुओं पर नहीं चलेगा बुलडोजर, Supreme Court ने लगाई रोक।

Telangana Phone Tapping Case: BJP का बड़ा आरोप, सबूत मिटाने के लिए जांच में हो रही देरी?

बेगानी शादी में अब्दुल्ला दीवाना, Pakistan के Match Boycott पर Harbhajan Singh ने जमकर लताड़ा