क्या वाकई महाराष्ट्र कर रहा कोरोना के खिलाफ अच्छा काम ?

By अभिनय आकाश | Apr 19, 2020

सबसे खतरनाक होता है अफवाहों का वायरस और यह वायरस कोरोना से कम खतरनाक नहीं है। हजारों लोगों का कारवां लॉकडाउन को तोड़कर बढ़ता चला जा रहा था, मुंबई के बांद्रा स्टेशन की ओर। यह गुनाह था या कहें गुनाह-ए-अज़ीम। चुनांचे एक बला से लड़ रहे मुल्क के सामने गुस्ताखियां का कारवां, मालूम नहीं कौन था वह गुस्ताख जिसने किए थे वह फरेब। लेकिन दरवाजों पर खींची गई लक्ष्मण रेखा को लांघ कर प्रदेश से अपने वतन लौटने को बेचैन लोगों की आमदें सवाल बन गई है। इन तस्वीरों को पढ़ने की कोशिश कीजिए और साथ ही इसके इर्द-गिर्द केंद्रित किरदारों को भी और फिर तलाशने की कोशिश कीजिए कि आखिर लॉकडाउन तोड़ने का मुजरिम कौन है?

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वह गरीब जो चल पड़े घर के लिए, वह बेबस हुक्मरान जिनके वायदों पर इन्हें ऐतबार ना रहा, एक एनजीओ का संचालक और एक पत्रकार जिन पर गुमराह करने के आरोप लगे?

14 अप्रैल की दोपहर से मुंबई के बांद्रा स्टेशन पर हजारों की संख्या में प्रवासी मजदूर जमा होने लगे। उन्हें लग रहा था कि लॉकडाउन खुल जाएगा वे ट्रेन में बैठ कर अपने घर लौट जाएंगे। उत्तर प्रदेश, बिहार और बंगाल के मजदूर आसपास की झुग्गियों से यहां इकट्ठा हुए। कई मीडिया रिपोर्ट में दावा किया गया कि कुछ मजदूरों के पास मैसेज और कॉल आए थे, स्टेशन के पास मीटिंग है उनके घर जाने का इंतजाम किया जाएगा। जमा हुए लोगों को पुलिस ने स्थानीय नेताओं को साथ लेकर समझाया लेकिन जब भीड़ नहीं मानी तो लाठी चलाया।

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इन लोगों के हाथ में गट्ठर या बैग नहीं थे तो यह थ्योरी दी जाने लगी कि बिना सामान कोई घर क्यों जाएगा या फिर इन स्थानों के लिए ट्रेन तो इस स्टेशन से चलती ही नहीं, फिर भीड़ कैसे जुटी? लेकिन मुंबई के अलावा कई राज्यों में भी जुटी भीड़ की संख्या भले ही कम हो लेकिन सबकी मांग एक ही थी -हमें घर जाना है।

विनय दुबे

यह व्यक्ति अपने फेसबुक पोस्ट पर लगातार मजदूरों से अपील कर रहा था कि वह उन्हें घर ले जाएगा और चलो घर की ओर कैंपेन भी चला रहा था। पुलिस ने विनय को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस को शक है कि भीड़ के एकट्ठा होने में इस शख्स का हाथ है। पुलिस ने विनय दुबे को कोर्ट में पेश किया और कोर्ट ने 21 अप्रैल तक पुलिस के हवाले कर दिया है। एक और शख्स जो चर्चा में है, मराठी समाचार चैनल के पत्रकार ने खबर दिखाया कि मजदूरों के लिए स्पेशल ट्रेनें चलाई जाएंगी। राहुल कुलकर्णी नामक पत्रकार ने सूत्रों  के हवाले से रेलवे विभाग से मिले 1 लेटर के आधार पर कहा था कि हर डिवीजन में जितने प्रवासी मजदूर हैं उनका डाटा दिया गया है इन मजदूरों को अपने गांव भेजने के लिए जनसाधारण ट्रेन चलाई जाएगी। पुलिस ने राहुल कुलकर्णी को गिरफ्तार कर लिया।

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जैसे ही भीड़ का वीडियो टीवी पर चला महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे के बेटे और राज्य सरकार के मंत्री आदित्य ठाकरे ने सिलसिलेवार ट्वीट करते हुए कह दिया कि इसके लिए केंद्र जिम्मेदार है। फिर बीजेपी ने महाराष्ट्र सरकार को इसके लिए जिम्मेदार ठहराया। राजनीति शुरू हुई जो तय थी। मजदूरों को कसूर दिए जाने लगे इंतजामों पर बात होने लगी। राज्य सरकार और केंद्र सरकार में टकराव भी देखने को मिला। बहरहाल,  हर पल दुरुस्त होते कोरोना के आंकड़ों के बीच  इंसान और इंतजाम की पलटी जा रहे हैं किताबों में अब कुछ आंकड़ों के हवाले से यह समझने की कोशिश करते हैं कि महाराष्ट्र कोरोना कि खतरनाक मार झेल रहा है। हालात संभाले नहीं संभल रहे। कुछ आंकड़े तो बहुत ज्यादा परेशान करने वाले हैं।

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महाराष्ट्र में कैसे बिगड़े हालात

  • 16 दिन में 10 गुना मरीज, संख्या 3000 के पार
  • लगभग 70% मरीजों की उम्र 50 साल से कम
  • राज्य में संक्रमण का पहला मामला 9 मार्च को पुणे में आया था 31 मार्च तक प्रदेश में संख्या मात्र 302 थी।

पुणे में संक्रमित पाए गए पति-पत्‍नी दुबई से लौटे थे। इसके अगले ही दिन इन दोनों के संपर्क में आए 3 अन्‍य लोग भी कोरोना पॉजिटिव पाए गए। इसके करीब एक महीने के भीतर महाराष्ट्र में संक्रमितों की संख्‍या 1,000 को पार कर गई। वहीं, इसी बीच 64 संक्रमित लोगों की मौत हो चुकी थी।  इसी के साथ महाराष्ट्र पूरे देश में सबसे ज्‍यादा संक्रमित मरीजों वाला राज्य भी बन चुका था।

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लोकल ट्रेन के पहिए थामने में देरी करने से संक्रमण तेजी से फेला

झुग्गी-झोपड़ी के हॉटस्पॉट में बदलने से सरकार की चुनौती बढ़ गई। मुंबई शहर की स्थिति में सुधार नहीं हो रहा और नए मामले बेतहाशा बढ़ते जा रहे हैं। एशिया की सबसे बड़ी झुग्गी बस्ती धारावी भी मुंबई में ही है। अब संक्रमण इस बस्‍ती में भी फैल चुका है। यहां से संक्रमण बांद्रा टर्मिनस से सटे बेहरामपाड़ा और कुर्ला की जरीमरी झुग्गियों तक फैल गया है। यहां तक कि महाराष्‍ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे के घर मातोश्री के आसपास भी संक्रमण पाया गया। मुंबई में लोकल ट्रेन से सफर करने वालों की भारी संख्या के कारण भी संक्रमण तेजी से फैला। इसके अलावा देश के अलग-अलग राज्‍यों से मुंबई में काम करने वाले भारतीयों की तादाद भी लाखों में है। लॉकडाउन और राज्‍य में कर्फ्यू की घोषणा के बाद हजारों की तादाद में मुंबई में बसे लोग वापस अपने घरों की ओर लौटे। ये लोग अनजाने में वायरस को देश के अलग-अलग हिस्‍सों में मौजूद अपने गांवों तक ले आए।

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एयरपोर्ट पर चूक, हर विदेश से लौटे व्‍यक्ति को नहीं किया क्‍वारंटीन

महाराष्ट्र के पुणे में पहला पॉजिटिव मामला सामने आने से काफी पहले ही एयरपोर्ट पर थर्मल स्क्रीनिंग शुरू हो चुकी थी। शुरुआत में चीन समेत सिर्फ देशों से आने वालों की ही गंभीरता से जांच की गई। हालांकि, विदेश से आने वाले हर यात्री से सेल्फ डिक्लरेशन फॉर्म भरवाकर उसकी ट्रैवल हिस्ट्री की जानकारी हासिल कर ली जाती थी। इसके बाद उसकी थर्मल स्क्रीनिंग की जाती थी।

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अगर किसी में संक्रमण के लक्षण नजर आने पर ही अलग करके निगरानी में रखा जा रहा था। मामले बढ़ने पर विदेश से आने वाले सभी लोगों को 14 दिन के लिए क्वारंटीन में रहने की सलाह दी गई।  हालांकि, तब तक शायद देर हो चुकी थी। कई ऐसे केस सामने आ चुके थे, जिन्हें क्वारंटीन में रखे जाने की जरूरत थी लेकिन नहीं रखा गया था। ये आराम से बाहर घूमते रहे और दूसरे स्‍वस्‍थ्‍य लोगों को संक्रमित करते रहे। 

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