By अभिनय आकाश | Aug 19, 2025
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अपने टैरिफ कार्ड के जरिए दुनियाभर के देशों को झुकाने का प्रयास कर रहे हैं। इसी क्रम में रूस से तेल खरीद को लेकर वो भारत को निशाना बना रहे हैं। पहले 25 प्रतिशत और उसके बाद 50 प्रतिशत तक का टैरिफ भारत पर थोपने का वो ऐलान कर चुके हैं। ट्रंप भारत को डराना और झुकाना चाहते हैं जिससे वो अमेरिका की शर्तों पर ट्रेड डील करने को राजी हो जाए। लेकिन भारत ने अमेरिका के आगे झुकने की बजाए टैरिफ वॉर का सामना करने का रास्ता चुना है। इसके अलावा अब एक नया ग्रप भी आकार लेता दिख रहा है। अमेरिका के दो कट्टर प्रतिद्वंदी रूस और चीन की मंशा बहुत दिनों से भारत को साथ लेकर एक ग्रुप आरआईसी बनाने की रही है। अब भारत ने भी इस दिशा में कदम बढ़ाने शुरू कर दिए हैं। एक तरफ तो चीनी विदेश मंत्री भारत के दौरे पर हैं। वहीं ट्रंप से अलास्का में मीटिंग से पहले और बाद दोनों दफा रूसी राष्ट्रपति पुतिन ने पीएम मोदी को फोन मिलाया और सारी बातचीत की जानकारी भी दी है। इधर चीनी विदेश मंत्री वांग यी से भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर ने मुलाकात की और अब वो रूस के दौरे पर रवाना हो गए हैं। जयशंकर की यह यात्रा राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल की रूस यात्रा और द्विपक्षीय ऊर्जा एवं रक्षा संबंधों पर बातचीत के कुछ दिनों बाद हो रही है।
यह यात्रा ऐसे समय में हो रही है जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के भारतीय वस्तुओं पर शुल्क को दोगुना कर 50 प्रतिशत करने के फैसले से भारत-अमेरिका संबंधों में तनाव है। इस शुल्क में रूस से कच्चे तेल की खरीद को लेकर लगाया गया 25 प्रतिशत का जुर्माना भी शामिल है। विदेश मंत्रालय ने जयशंकर की यात्रा की घोषणा करते हुए कहा कि वह व्यापार, आर्थिक, वैज्ञानिक, प्रौद्योगिकी और सांस्कृतिक सहयोग पर भारत-रूस अंतर-सरकारी आयोग के बुधवार को होने वाले 26वें सत्र की सह-अध्यक्षता करेंगे। माना जा रहा है कि जयशंकर और उनके रूसी समकक्ष सेर्गेई लावरोव यूक्रेन में शांति लाने संबंधी ट्रंप प्रशासन की नवीनतम पहलों पर भी चर्चा करेंगे।