By रेनू तिवारी | Jan 31, 2026
पश्चिम अफ्रीकी देश नाइजर की राजधानी नियामी में एक रणनीतिक वायुसेना अड्डे पर हुए भीषण हमले ने क्षेत्र में सुरक्षा और कूटनीतिक तनाव को चरम पर पहुँचा दिया है। चरमपंथी संगठन इस्लामिक स्टेट (IS) ने शुक्रवार को इस हमले की जिम्मेदारी ली है। इस हमले के बाद नाइजर के सैन्य शासक ने सीधे तौर पर फ्रांस और अन्य अफ्रीकी देशों पर आतंकियों को समर्थन देने का आरोप लगाया है।
संगठन की प्रचार शाखा ‘अमाक न्यूज एजेंसी’ ने एक बयान जारी कर इस हमले की जिम्मेदारी लेने का दावा किया। बयान में कहा गया कि नियामी में किया गया यह ‘‘एक अचानक और समन्वित हमला’’ था जिसने भारी नुकसान पहुंचाया। सरकारी टेलीविजन चैनल के अनुसार, नाइजर की सेना ने बृहस्पतिवार तड़के हमले का त्वरित जवाब देते हुए 20 हमलावरों को मार गिराया और 11 को गिरफ्तार कर लिया।
नाइजर के जुंटा नेता जनरल अब्दुरहमान चियानी ने फ्रांस, बेनिन और आइवरी कोस्ट के राष्ट्रपतियों पर राजधानी नियामी में वायुसेना के एक अड्डे पर हमला करने वाले सशस्त्र समूहों का समर्थन करने का आरोप लगाया। जनरल चियानी ने बृहस्पतिवार देर रात सरकारी टेलीविजन से कहा, ‘‘हम उन भाड़े के सैनिकों के प्रायोजकों- इमैनुएल मैक्रों (फ्रांस के राष्ट्रपति), पैट्रिस टैलन (बेनिन के राष्ट्रपति) और अलासाने औटारा (आइवरी कोस्ट के राष्ट्रपति) को याद दिलाना चाहते हैं कि हमने उनकी धमकियां बहुत सुन ली हैं और अब उन्हें हमारी दहाड़ सुनने के लिए तैयार रहना चाहिए।’’
नियामी का हवाई अड्डा रणनीतिक रूप से अहम है और वहां सैन्य अड्डे, नाइजर-बुर्किना फासो-माली संयुक्त बल का मुख्यालय और यूरेनियम का एक बड़ा भंडार स्थित है। यूरेनियम का यह भंडार फ्रांस की परमाणु कंपनी ओरानो के साथ विवाद का केंद्र भी है।
जुलाई 2023 में तख्तापलट के बाद से ही नाइजर और फ्रांस के संबंधों में भारी गिरावट आई है। इस्लामिक स्टेट का यह हमला और जुंटा सरकार द्वारा पड़ोसी देशों पर लगाए गए आरोप पश्चिम अफ्रीका (सहेल क्षेत्र) में एक बड़े क्षेत्रीय संघर्ष की आशंका को जन्म दे रहे हैं।