By अभिनय आकाश | Jul 01, 2026
77 साल तक इजराइल तुर्की के इतिहास के सबसे विवादित मुद्दे पर चुप रहा। लेकिन अब उसने अचानक एक ऐसा कदम उठाया है जिसने तुर्की की टेंशन तो बढ़ा दी है। सबसे दिलचस्प बात यह है कि इस फैसले से भारत को भी रणनीतिक फायदा मिलेगा। दरअसल इजराइल की कैबिनेट ने एक प्रस्ताव को मंजूरी दी है। जिसमें 1915 में ऑटोमन साम्राज्य यानी कि आज के तुर्की द्वारा अर्मेनियाई लोगों की हुई हत्याओं को आधिकारिक तौर पर नरसंहार माना गया। हालांकि यह प्रस्ताव अभी अंतिम नहीं है क्योंकि इसे कानून बनाने के लिए इजराइली संसद की मंजूरी मिलना अभी बाकी है। अगर संसद भी इस इसे मंजूरी दे देती है तो इजराइल भी उन देशों में शामिल हो जाएगा जिन्होंने इस घटना को नरसंहार के रूप में स्वीकार किया है। दूसरी तरफ तुर्की आज भी इस शब्द को पूरी तरह खारिज करता है। लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह है कि इजराइल ने 77 साल तक चुप रहने के बाद अचानक ऐसा फैसला इस तुर्की के खिलाफ क्यों लिया? इसकी सबसे बड़ी वजह है दोनों देशों के लगातार बिगड़ते हुए रिश्ते।
भारत ने जो रणनीतिक साझेदारी अर्मेनिया के साथ बनाई है, उससे प्रत्यक्ष कूटनीतिक मजबूती मिल सकती है। इसका मतलब यह बिल्कुल भी नहीं है कि भारत और इजराइल मिलकर तुर्की के खिलाफ कोई संयुक्त अभियान चला रहे हैं या फिर उसे निशाना कर रहे हैं। लेकिन इतना जरूर है कि तुर्की को लेकर दोनों देशों के रणनीतिक हित कई जगह पर एक दूसरे से करीब और मेल खाते हुए दिखाई दे रहे हैं। यही वजह है कि इस फैसले को सिर्फ इतिहास नहीं बल्कि बदलते वैश्विक समीकरण का एक बड़ा संकेत माना जा रहा है। अब सबकी नजर इजराइली संसद पर होगी।