जबलपुर हाई कोर्ट ने मांगी 28 अप्रैल को केंद्र व प्रदेश सरकार से 19 बिंदुओं की प्रगति रिपोर्ट

By दिनेश शुक्ल | Apr 27, 2021

जबलपुर। देश भर में इस समय कोरोना (कोविड-19) वायरस से हाहाकार मचा हुआ है।मध्‍य प्रदेश भी इससे बुरी तरह प्रभावित है, जिसके चलते उच्च न्यायालय द्वारा कोरोना इलाज मामले में स्वत: संज्ञान लेकर जनहित याचिका की सुनवाई की जा रही है। रेमडेसिविर इंजेक्शन की काला बाजारी करने वालों पर सख्त कार्रवाई के आदेश हुए 28 अप्रैल को अगली सुनवाई में न्यायालय ने केंद्र व प्रदेश सरकार से 19 बिंदुओं में अब तक हुए पालन की प्रगति रिपोर्ट मांगी है। 

 

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इस मामले में कोर्ट मित्र वरिष्ठ अधिवक्ता नमन नागरथ की ओर से आवेदन दायर कर कहा गया है कि ऑक्सीजन की कमी से जबलपुर सहित शहडोल, ग्वालियर, इंदौर और प्रदेश के कई क्षेत्रों में अस्पताल में भर्ती मरीजों की मौत हो चुकी है, कोरोना की दूसरी लहर का पीक मई के पहले सप्ताह में आने की आशंका है, इसके लिए अभी से पर्याप्त इंतजाम किए जाएं। वहीं, इंदौर के वरिष्ठ अधिवक्ता आनंद मोहन माथुर की ओर से दायर जनहित याचिका में कहा गया है कि हाईकोर्ट ने 19 अप्रैल को आदेश जारी कर ऑक्सीजन की आपूर्ति सुनिश्चित करने को कहा था, लेकिन ऑक्सीजन की आपूर्ति नहीं की जा रही है, आवेदन में अनुरोध किया गया है कि ऑक्सीजन और रेमडेसिविर की आपूर्ति की मॉनीटरिंग हाईकोर्ट द्वारा की जाए, इसके साथ ही कोरोना महामारी को राष्ट्रीय आपदा घोषित करने की मांग की गई थी, जिसके परिणाम में उच्‍चन्‍यायालय का यह आदेश सोमवार को आया है। 

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उल्‍लेखनीय है कि हाईकोर्ट एडवोकेट बार एसोसिएशन जबलपुर की ओर से दायर की गई तीसरी याचिका में कहा गया था कि बोकारो के स्टील प्लांट से एक ऑक्सीजन टैंकर सागर भेजा गया था, लेकिन बीच रास्ते से उस टैंकर को झांसी भेज दिया गया, सागर में ऑक्सीजन की कमी से एक मरीज की मौत हो गई है, इस मामले में हाईकोर्ट से हस्तक्षेप करने का अनुरोध किया था। जिसमें मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय ने ऑक्सीजन की कमी को लेकर चीफ जस्टिस मोहम्मद रफीक और जस्टिस अतुल श्रीधरन की डबल बेंच ने  सरकार से पूछा कि पूर्व में जारी 19 बिंदुओं के दिशा-निर्देशों का पालन हो रहा है या नहीं ।  

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उधर, पूर्व महाधिवक्ता आनंद मोहन माथुर ने हाईकोर्ट को जानकारी दी कि बीते दिनों मध्य प्रदेश आ रही ऑक्सीजन को उत्तर प्रदेश पुलिस के द्वारा रोकने के कारण सागर में एक मरीज की मौत हो गई। इस मामले में हाईकोर्ट ने केंद्र को कड़ी फटकार लगाई,और कोर्ट ने कहा कि यह केंद्र सरकार की जवाबदारी है कि हर राज्य को ऑक्सीजन बिना रुके मिल सके। यहां अपनी सुनवाई में कोर्ट ने हिदायत दी है कि आगे से ऐसी घटनाएं न हों। इसके साथ ही  रेमडेसिविर इंजेक्शन की कालाबाजारी करने वालों पर सख्त कार्रवाई के आदेश भी दिए गए। हाईकोर्ट ने पूर्व में जारी 19 बिन्दुओं पर दिए निर्देशों के पालन में अब तक उठाए गए कदमों  के बावत प्रगति रिपोर्ट 28 अप्रैल को अगली सुनवाई में पेश करने का आदेश राज्य व केंद्र सरकार को दिया है। 

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