By नीरज कुमार दुबे | Jan 22, 2025
केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी ने मंगलवार को केंद्रीय मंत्रिमंडल छोड़ने की धमकी देते हुए आरोप लगाया कि उनकी पार्टी हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा को राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) में उचित सम्मान नहीं मिल रहा है। मांझी के बयान पर राजनीति गर्माई तो वह अपने बयान से पलट भी गये और आरोप लगाया कि उनके बयान को तोड़-मरोड़ कर पेश किया जा रहा है। हम आपको बता दें कि बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी ने मुंगेर जिले में एक जनसभा के दौरान विभिन्न राज्य चुनावों में सीट बंटवारे में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेतृत्व वाले गठबंधन द्वारा उनकी पार्टी को ध्यान में नहीं रखे जाने पर दुख जताया। मांझी ने कहा, "झारखंड और दिल्ली में हमें कुछ नहीं मिला। यह कहा जा सकता है कि मैंने कोई मांग नहीं की। लेकिन, क्या यह न्याय है? मुझे नजरअंदाज किया गया क्योंकि इन राज्यों में मेरा कोई वजूद नहीं था। इसलिए हमें बिहार में अपनी योग्यता साबित करनी होगी।" रामायण के एक श्लोक का हवाला देते हुए, जिसका अर्थ है कि अक्सर डर सम्मान को जन्म देता है, 80 वर्षीय नेता ने टिप्पणी की, "लगता है कि मंत्रिमंडल हमको छोड़ना पड़ेगा"।
अपनी टिप्पणी पर विवाद के बाद उन्होंने पलटी मारते हुए ट्वीट किया कि कुछ वेब पोर्टल और समाचार चैनलों के द्वारा भ्रमक ख़बर प्रचारित/प्रसारित किया गया है कि “जीतन राम मांझी कैबिनेट से इस्तीफ़ा देंगे।” उन्होंने कहा कि जबकि मैंने मुंगेर की सभा में हो रही देरी को लेकर कहा था कि “आप लोग लेट कर रहें हैं जिसके कारण मेरी फ्लाइट छूट जाएगी और मुझे कैबिनेट छोड़ना पड़ेगा”। उन्होंने कहा कि वैसे लोगों को मैं स्पष्ट कर देना चाहता हूँ कि मैं मरते दम तक माननीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी का साथ नहीं छोडूंगा। उन्होंने कहा कि हम सब अभी देश और बिहार के हित का कार्य कर रहें हैं तो कुछ मीडिया घराना विपक्ष के इशारे पर हमें बाटने की कोशिश कर रहा है। उन्होंने कहा कि मैं वैसे लोगों को चेतावनी देना चाहता हूँ कि वह सचेत हो जाएँ अन्यथा मैं उनके ख़िलाफ़ न्यायालय की शरण लूँगा और प्रेस काउंसिल में उनकी शिकायत दर्ज कराऊँगा।
इस बीच, राजद प्रवक्ता मृत्युंजय तिवारी ने मांझी से कहा कि अगर उन्हें गंभीरता से लगता है कि दलितों को भाजपा की तुलना में बेहतर डील मिलनी चाहिए तो उन्हें "सत्ता की मलाई छोड़ देनी चाहिए।" तिवारी ने कहा, "मांझी को सामाजिक न्याय की लड़ाई में शामिल होना चाहिए जिसका नेतृत्व हमारे नेता लालू प्रसाद और तेजस्वी यादव कर रहे हैं। लेकिन, इस मंथन के बिना, जिससे भाजपा हमेशा सावधान रहती है, मांझी को कभी भी केंद्रीय मंत्रिमंडल में जगह नहीं दी जाती।"