By अंकित सिंह | Sep 02, 2026
राज्यसभा सांसद कपिल सिब्बल ने बुधवार को आरोप लगाया कि चुनाव आयोग की ओर से वोटर लिस्ट में सुधार के लिए चलाई जा रही 'स्पेशल इंटेंसिव रिविजन' (SIR) का मकसद वोटर लिस्ट में हेर-फेर करना और चुनाव जीतने में BJP की मदद करना है। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट से 'बड़ी संख्या में नाम हटाने' (bulk deletions) के मामले में दखल देने की अपील की। सिब्बल का यह बयान एक मीडिया रिपोर्ट के जवाब में आया है, जिसमें आरोप लगाया गया था कि झारखंड के गोड्डा ज़िले में BJP के एजेंट वोटर लिस्ट से नाम हटवाने की कोशिश कर रहे हैं, और इनमें ज़्यादातर नाम अल्पसंख्यक समुदाय के लोगों के हैं। बूथ लेवल ऑफिसर (BLO), जो राज्य सरकार के कर्मचारी हैं, ने भी इस मुद्दे पर चिंता जताई है।
खड़गे और गांधी ने आरोप लगाया कि बीजेपी वोट चोरी के ज़रिए भारत के लोकतंत्र को कमज़ोर करने की साज़िश रच रही है और कहा कि जनता इसके लिए ज़िम्मेदार लोगों को सज़ा देगी। गांधी ने यह भी आरोप लगाया कि SIR प्रक्रिया के बाद महाराष्ट्र की ड्राफ़्ट वोटर लिस्ट से 2.06 करोड़ से ज़्यादा वोटरों के नाम हटा दिए गए। उन्होंने दावा किया कि बीजेपी और "वोट चोरी आयोग" हर हाल में सत्ताधारी पार्टी की जीत पक्की करने के लिए अपनी रणनीति बदल रहे हैं। गांधी ने कहा कि "वोट चोरी" से बनी सरकार के लिए जनता अहम नहीं है और इसीलिए बीजेपी न तो उनकी बात सुनती है और न ही उनके आदेश का पालन करती है।
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