CJP प्रोटेस्ट क्यों हुआ कैंसिल, CJI ने ऐसा क्या कह दिया, PM मोदी से इसका क्या है कनेक्शन?

सीजेपी का प्रोग्राम था, तारीख भी तय हो चुकी थी। 5 सितंबर की। पर फिर कहानी में यू टर्न आ गया। केंद्र सरकार पीछे हटी तो कॉकरोच जनता पार्टी वाले भी। सीजेपी वालों ने ऐलान किया 5 सितंबर को अब कोई विरोध प्रदर्शन नहीं होगा।
NEET-UG पेपर लीक के विरोध प्रदर्शनों में शामिल लोगों के खिलाफ दर्ज मामलों को जब सुप्रीम कोर्ट ने अपने विशेष अधिकारों का इस्तेमाल करते हुए रद्द किया, तब अदालत कक्ष में भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत और 'कॉकरोच जनता पार्टी' (CJP) के बीच एक-दूसरे की सराहना देखने को मिली। यह पार्टी मुख्य न्यायाधीश की एक टिप्पणी के व्यंग्यात्मक जवाब के रूप में अस्तित्व में आई थी। मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली तीन जजों की पीठ ने यह फैसला दिल्ली पुलिस और चार राज्य सरकारों द्वारा शीर्ष अदालत से संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत मिली विशेष शक्तियों का उपयोग करने की अपील के बाद सुनाया। केंद्र सरकार पर केस वापस लेने के वादे से मुकरने का आरोप लगाते हुए CJP ने 5 सितंबर को एक मार्च निकालने का ऐलान किया था। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला आने के बाद इस विरोध प्रदर्शन को वापस ले लिया गया। क्यों सीजेपी ऐन मौके पर पीछे हट गई और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पिक्चर में आ गए। बीजेपी के पीछे हटने का मतलब यह कि उन्होंने 5 सितंबर का अपना विरोध प्रदर्शन वापस ले लिया है। पर जो वजह बताई जा रही है असली बात वही है या फिर कहानी में कुछ ट्विस्ट भी है। सीजेपी का प्रोग्राम था, तारीख भी तय हो चुकी थी। 5 सितंबर की। पर फिर कहानी में यू टर्न आ गया। केंद्र सरकार पीछे हटी तो कॉकरोच जनता पार्टी वाले भी। सीजेपी वालों ने ऐलान किया 5 सितंबर को अब कोई विरोध प्रदर्शन नहीं होगा। बस इसके कुछ ही देर बाद सीन में एंट्री हुई प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की। उन्होंने वर्टिकल में कोई इंस्टा पर रील नहीं डाला है। बच्चों से कोई अपील भी नहीं की है। बीजेपी के अंदर से जो खबर आई है वो यह है कि प्रधानमंत्री जेन जी से संवाद करेंगे।
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PM मोदी की Gen Z के साथ प्रस्तावित बातचीत
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 5 सितंबर यानी शिक्षक दिवस पर दिल्ली के श्री राम कॉलेज ऑफ़ कॉमर्स (SRCC) जाने की संभावना है। यह दौरा इसलिए भी अहम है क्योंकि SRCC अपने 100 साल पूरे कर रहा है। न्यूज़ एजेंसी ANI की रिपोर्ट के मुताबिक, मोदी के कॉलेज के शताब्दी समारोह में शामिल होने और छात्रों से बातचीत करने की उम्मीद है। इस प्रस्तावित दौरे का एक अहम हिस्सा मोदी और Gen Z छात्रों के बीच सीधी बातचीत हो सकती है। इस सेशन से छात्रों को प्रधानमंत्री के साथ अपने विचार, उम्मीदें और चिंताएं साझा करने का मौका मिलने की संभावना है। यह बातचीत ऐसे समय में हो रही है जब BJP 'जेन-Z' (Gen Z) तक पहुँचने की कोशिश कर रही है। पार्टी युवाओं से जुड़ने और वोटरों की अगली पीढ़ी के साथ बातचीत को मज़बूत करने के लिए एक खास रणनीति पर काम कर रही है। बीजेपी ने हाल ही में 'जेन ज़ेड' (Gen Z) तक पहुँचने के अपने कार्यक्रम के लिए एक टीम बनाई है। इसका मकसद सीनियर नेताओं और युवा प्रतिनिधियों को एक साथ लाना है। इस पहल का उद्देश्य युवा भारतीयों की उम्मीदों को समझना और बातचीत व भागीदारी के लिए और मौके बनाना है। उम्मीद है कि पार्टी युवाओं के साथ बातचीत को केवल पारंपरिक राजनीतिक कार्यक्रमों तक सीमित रखने के बजाय, सीधे जुड़ने और बातचीत करने पर ध्यान देगी।
बीजेपी का युवाओं तक पहुँचने का प्लान
HT की पिछली रिपोर्ट के अनुसार, बीजेपी ने 'जेन ज़ी' (Gen Z) तक पहुँचने के लिए एक खास टीम बनाई है। पार्टी नेताओं ने छोटी सभाओं, कैंपस प्रोग्राम और सीधे बातचीत के ज़रिए युवाओं को जोड़ने के तरीकों पर चर्चा की। अगस्त में, बीजेपी अध्यक्ष नितिन नवीन ने लोगों तक पहुँचने की योजना पर एक बैठक की। इसमें नेताओं ने कहा कि युवाओं को जोड़ने का काम लगातार चलना चाहिए, न कि यह सिर्फ़ बड़े राजनीतिक कार्यक्रमों तक ही सीमित रहे। पार्टी की युवा रणनीति पर चर्चा के लिए अहम राज्यों जैसे चुनाव वाले उत्तर प्रदेश, पंजाब और गुजरात के करीब 45 नेताओं को भी शामिल किया गया। पार्टी युवाओं के लिए एक अभियान की भी योजना बना रही है, जिसमें बाइक यात्रा, हैकाथॉन, मैराथन, साइकिलिंग इवेंट और इनोवेशन चैलेंज जैसी गतिविधियाँ शामिल होंगी। बीजेपी की युवा शाखा 17 सितंबर को वडनगर-वाराणसी मोटरसाइकिल यात्रा शुरू करने वाली है। पार्टी के 'सेवा पखवाड़ा' में स्कूली छात्रों, कॉलेज जाने वाले युवाओं, पोस्ट-ग्रेजुएट स्कॉलर्स और युवा इनोवेटर्स के लिए कार्यक्रम शामिल होंगे।
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BJP के लिए Gen Z क्यों अहम है?
पिछले महीने, NEET विवाद को लेकर युवाओं के विरोध-प्रदर्शनों ने सरकार को हिलाकर रख दिया था और आखिरकार धर्मेंद्र प्रधान को शिक्षा मंत्री के पद से इस्तीफ़ा देना पड़ा। बाद में प्रधान ने कहा कि विरोध-प्रदर्शनों के दौरान Gen Z को "गुमराह" करने की कोशिशें की गई थीं। इन विरोध-प्रदर्शनों में हज़ारों युवा सड़कों पर उतर आए। छात्रों और युवा संगठनों ने पेपर लीक, छात्रों की आत्महत्या और परीक्षा प्रणाली में गड़बड़ियों को लेकर जवाबदेही की मांग की। विरोध-प्रदर्शनों के दौरान 'कॉकरोच जनता पार्टी' (CJP) की आवाज़ भी प्रमुखता से सुनाई दी। कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने कहा कि इन विरोध-प्रदर्शनों से "बीजेपी की छवि को नुकसान पहुंचा है" और विपक्षी पार्टियों को यह समझना चाहिए कि युवा CJP जैसे समूहों की ओर क्यों आकर्षित हुए। शिक्षा मंत्रालय छोड़ने के बाद, प्रधान ने अगस्त में कहा था कि NEET विरोध-प्रदर्शनों के दौरान कुछ लोगों ने 'जेन ज़ी' (Gen Z) को "गुमराह" करने की कोशिश की थी। उन्होंने इस विवाद के चलते अपना इस्तीफ़ा देने के फ़ैसले का भी बचाव किया।
सीजेपी ने क्यों वापस लिया प्रोटेस्ट
5 सितंबर से फिर आंदोलन शुरू करने वाली कॉकरोच जनता पार्टी ने अब अपने हाथ पीछे खींच लिए। तो सुप्रीम कोर्ट में एक सुनवाई थी। इस बात पर कि स्टूडेंट प्रदर्शन को लेकर देश भर में दर्ज एफआईआर का क्या होगा? सीजीपी की शुरुआत से यह मांग थी कि एक छात्र के खिलाफ भी कारवाई नहीं होनी चाहिए। मोदी सरकार और बीजेपी के लोगों के बीच जिन कुछ बिंदुओं पर सहमति बनी थी और जंतरमंतर वाला प्रोटेस्ट वापस हुआ था उनमें से एक तो यही था। तो देश की सबसे बड़ी अदालत में जब यह मामला गूंजा तो वहां सुप्रीम कोर्ट ने साफ कर दिया कि 20 जुलाई से 25 जुलाई के बीच हुए छात्र प्रदर्शनों के संबंध में किसी भी राज्य या केंद्र शासित प्रदेश में दर्ज एफआईआर पर आगे कारवाई या जांच नहीं होगी। इन सभी एफआईआर को हर मकसद के लिए बंद माना जाएगा। इसके बाद 5 सितंबर को होने वाले विरोध मार्च को वापस लेने की बात सीजेपी के प्रवक्ता सौरभ दास ने कह दी कि सितंबर 5 को जो हमारा पीसफुल प्रोटेस्ट मार्च था इंडिया गेट से न्यू पुलिस हेड क्वार्टर्स तक वो हम लोग कॉल ऑफ कर रहे हैं क्योंकि हमारे सारे डिमांड्स सरकार ने मान लिया
तीन जजों की बेंच कर रही सुनवाई
सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई तीन जजों की बेंच कर रही है। चीफ जस्टिस सूर्यकांत के अलावा बेंच में जस्टिस जॉय मौल्या बागची और जस्टिस बी मोहना भी शामिल है। भारत सरकार का पक्ष रख रहे हैं सॉललीिसिटर जनरल तुषार मेहता। मेहता ने अदालत में कहा कि सिर्फ दिल्ली पुलिस के मामले में केंद्र सरकार ही ने नहीं बल्कि बिहार, असम, पश्चिम बंगाल और महाराष्ट्र की राज्य सरकारों ने स्टूडेंट प्रोटेस्ट को लेकर दर्ज सभी एफआईआर रद्द करने की बात मान ली है। बच्चों के लिए हम कितना सोचते हैं। उनका दुख मेरा दुख है। यह अदालत में भी सरकार बता चुकी थी।
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