By प्रभासाक्षी न्यूज़ डेस्क | Oct 27, 2026
कर्नाटक विधानपरिषद के द्विवार्षिक चुनाव में मंगलवार को जनता दल सेक्युलर (जदएस) ने सत्ताधारी पार्टी कांग्रेस से ‘बेंगलुरु शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र’ छीन लिया जबकि उसकी सहयोगी पार्टी भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) अन्य तीन सीट पर आगे चल रही है। आधिकारिक सूत्रों ने यह जानकारी दी। इसे कांग्रेस के लिए एक झटका माना जा रहा है।
पुट्टन्ना फिर से चुनाव लड़ रहे थे। रंगनाथ को 10,810 वोट मिले, जबकि पुट्टन्ना को 9,902 वोट प्राप्त हुए। अधिकारियों ने बताया कि दक्षिण-पूर्व स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में, भाजपा उम्मीदवार के. एम. सुरेश, कांग्रेस प्रत्याशी शशि हुलिकुंटे मुट्ट से आगे चल रहे हैं।
उन्होंने कहा कि उत्तर-पूर्व शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में, कांग्रेस उम्मीदवार शरणप्पा मत्तूर, भाजपा के मौजूदा एमएलसी शशिल जी. नमोशी से पीछे चल रहे हैं। नमोशी फिर से चुनाव लड़ रहे थे। उन्होंने बताया कि पश्चिम स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में, मौजूदा भाजपा विधानपरिषद सदस्य एस.वी. संकानूर, कांग्रेस उम्मीदवार मोहन लिम्बिकाई से आगे चल रहे हैं।
इस चुनावी मुकाबले को भाजपा और जदएस के बीच तालमेल की परीक्षा के रूप में देखा जा रहा था। इसे शिक्षकों और स्नातकों के बीच कांग्रेस के जनाधार की भी परीक्षा के रूप में देखा जा रहा है। भाजपा एवं जदएस राजग में सहयोगी हैं।
चार में से तीन सीट पर भाजपा का कब्ज़ा था और अगर रुझान ऐसे ही बने रहते, तो वह इन सीट को अपने पास बनाए रखेगी। जदएस कांग्रेस से बेंगलुरु शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र छीनने में सफल रही। बेंगलुरु का यह मुकाबला इसलिए अहम था क्योंकि पिछले विधानसभा चुनाव से पहले पुट्टन्ना ने जदएस छोड़कर कांग्रेस का दामन थाम लिया था।
पुट्टन्ना और रंगनाथ ही वोक्कालिगा समुदाय से हैं। इस चुनाव को इस बात की परीक्षा के तौर पर भी देखा जा रहा था कि क्या विपक्षी गठबंधन के दोनों सहयोगी दल एक-दूसरे के उम्मीदवारों को अपना समर्थन दिला पाते हैं या नहीं। हालांकि इन नतीजों से राज्य सरकार की स्थिरता पर कोई असर पड़ने की उम्मीद नहीं है, लेकिन विपक्षी गठबंधन का मजबूत प्रदर्शन उसे 2023 में सत्ता में आई कांग्रेस सरकार के खिलाफ एक राजनीतिक हथियार दे देगा।