सोना, जेवर और बर्तन...ईरान नहीं जाएगा कश्मीरियों का करोड़ों का चंदा, हिल गई दुनिया !

By अभिनय आकाश | Apr 06, 2026

आपको याद होगा कि कश्मीर के लोगों ने ईरान के लिए खूब पैसा जमा किया था। इसमें कैश, चांदी, पीतल के बर्तन और सोने के जेवर शामिल थे। कश्मीरियों और बाकी शिया मुस्लिमों से पैसा लेने के लिए भारत में ईरान के दूतावास ने क्यूआर कोड तक जारी कर दिया था। लेकिन आप यह जानकर हैरान हो जाएंगे कि ईरान अब इस पैसे से सिर्फ एक ही चीज खरीद सकता है और वह भी सिर्फ भारत से। यह खबर कई लोगों के होश उड़ा देगी। आप इसे भारत का मास्टर स्ट्रोक बोल सकते हैं। दरअसल सोशल मीडिया पर खूब बवाल मचा था कि कश्मीरी ईरान के लिए इतना पैसा कहां से और क्यों ला रहे हैं। कई लोगों ने तो यहां तक कहा कि दान की जा रही चीजों में से कुछ चीजें तो ऐसी लग रही हैं जैसी कश्मीरी हिंदुओं के पास हुआ करती थी। शायद यह वही बर्तन और आर्टिफेक्ट्स हैं जिन्हें कश्मीरी हिंदू पीछे छोड़ गए थे। लेकिन अब मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक एक खबर आई है कि ईरान को जो चंदा मिला है उस चंदे को ईरान अपने देश में नहीं ले जा पाएगा। 

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रिपोर्ट्स के मुताबिक ईरान को जितना भी कैश और ऑनलाइन पैसा मिला है, उससे ईरान सिर्फ और सिर्फ दवाइयां खरीद सकता है। यह दवाइयां भी ईरान को भारत से ही खरीदनी होंगी। यानी भारत का पैसा भारत में ही खर्च किया जाएगा। सूत्रों के मुताबिक ऐसा कोई डिप्लोमेटिक प्रोसेस नहीं है जिसके तहत ईरान का दूतावास, कैश और सोना ईरान ट्रांसफर कर सके। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक कश्मीर समेत भारत के विभिन्न हिस्सों से ईरान के लिए जो सोना और आभूषण जमा किए गए थे, वह भी ईरानी दूतावास को भारत के स्थानीय बैंक में ही जमा कराने होंगे। इन्हें जमा कराने के बाद ही ईरान को इस पर पैसा दिया जाएगा। ऐसी वस्तुएं भी ईरान का दूतावास ईरान नहीं भेज सकता। आपको बता दें कि इस चंदे की वजह से ईरान को कड़ी आलोचना का सामना भी करना पड़ा था। 

पाकिस्तान के दबाव में इस चंदे के लिए किए गए थैंक्यू इंडिया वाले सारे ट्वीट ईरान ने डिलीट कर दिए थे। इसके बाद ईरान ने थैंक्यू कश्मीर लिखकर ट्वीट जारी किए। यानी ईरान ने भारतीयों द्वारा दिए गए समर्थन को सांप्रदायिक रंग देने की कोशिश की थी। उसी के बाद से ईरान को दिए जा रहे इस चंदे पर शक की नजरें बढ़ गई। आपको बता दें कि राजनयिक संबंधों और प्रोटोकॉल्स को निर्धारित करने वाला वियना कन्वेंशन विदेशी दूतावासों द्वारा धन जुटाने के विषय को स्पष्ट रूप से परिभाषित नहीं करता है। लेकिन इन दूतावासों को बैंकिंग अधिकार प्रदान जरूर करता है। हालांकि एक नियम जरूर है जो दूतावासों को अपने प्राथमिक बैंक खातों का उपयोग किसी अन्य गतिविधि के लिए करने से रोकता है। इसमें चंदा प्राप्त करना भी शामिल है। अगर किसी दूतावास को किसी देश में चंदा इकट्ठा करना होता है तो उसे उस देश के विदेश मंत्रालय की अनुमति की जरूरत है।

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