By प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क | Oct 26, 2026
केरलम सरकार ने सोमवार को स्पाइनल मस्कुलर एट्रोफी (एसएमए) के मरीजों के लिए सस्ती जेनेरिक दवा उपलब्ध कराने के फैसले का बचाव करते हुए कहा कि इसे नियामकीय मंजूरी मिली है और इससे मरीजों के परिवारों पर आर्थिक बोझ कम होगा।
उन्होंने कहा कि उच्चतम न्यायालय ने जेनेरिक दवा के उत्पादन को चुनौती देने वाली रोश कंपनी की याचिका खारिज कर दी थी और केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन ने इसके इस्तेमाल को मंजूरी दी है। विपक्ष ने दवा की प्रभावशीलता और तिरुवनंतपुरम के एसएटी अस्पताल में शिशुओं को इसे दिए जाने के तरीके पर सवाल उठाए। विधानसभा अध्यक्ष टी राधाकृष्णन ने मुख्यमंत्री और स्वास्थ्य मंत्री के जवाब के बाद कार्य स्थगन प्रस्ताव के नोटिस को स्वीकार नहीं किया।
इसके बाद विपक्ष ने सदन से वॉकआउट कर दिया। इससे पहले, विपक्ष के नेता पिनराई विजयन ने कहा कि विवाद जेनेरिक दवाओं के इस्तेमाल को लेकर नहीं, बल्कि अस्पताल में दवा दिए जाने को कथित तौर पर नैदानिक परीक्षण के रूप में दर्ज करने को लेकर है। स्वास्थ्य मंत्री के मुरलीधरन ने आरोप लगाया कि पिछली सरकार एसएमए की दवा आपूर्ति करने वाली कंपनी का 50 करोड़ रुपये बकाया छोड़ गई थी।
विधानसभा में ‘केरल समग्र स्वास्थ्य, कल्याण और दीर्घायु मॉडल’ के लिए गठित कार्यबल की नियुक्तियों पर भी दोनों पक्षों में आरोप-प्रत्यारोप देखने को मिला। विपक्ष ने निजी अस्पतालों, प्रयोगशालाओं और दवा कंपनियों से जुड़े लोगों को शामिल करने पर हितों के टकराव की आशंका जताई।
सतीशन ने कहा कि सदस्यों का चयन उनकी विशेषज्ञता के आधार पर किया गया है। विजयन ने नैटको फार्मा से कांग्रेस को चुनावी बॉण्ड के जरिए 12.25 करोड़ रुपये मिलने का दावा भी किया।