नयी दिल्ली। संसद में बृहस्पतिवार को पेश वर्ष 2018- 19 की आर्थिक समीक्षा की मुख्य बातें इस प्रकार हैं।
- केन्द्र और राज्यों का सामान्य सरकारी राजकोषीय घाटा 2018- 19 में 5.8 प्रतिशत रहने का अनुमान जो कि इससे पिछले साल 6.4 प्रतिशत पर रहा था।
- पिछले वित्त वर्ष 2018- 19 में आयात वृद्धि 15.4 प्रतिशत और निर्यात वृद्धि 12.5 प्रतिशत रहने का अनुमान।
- वर्ष 2018- 19 में खाद्यान्न उत्पादन 28.34 करोड़ टन रहने का अनुमान।
- विदेशी मुद्रा का आरक्षित भंडार जून 2019 में 422.2 अरब डालर रहा।
- सूक्ष्म, लघु एवं मझौले उद्यमों की वृद्धि, रोजगार सृजन और उत्पादकता बढ़ाने के लिये नीतियों में बदलाव की जरूरत।
- छोटी एमएसएमई फर्मों जो छोटी ही बनी रहतीं हैं के बजाय बड़ी कंपनी बनने की क्षमता रखने वाली नई कंपनियों के लिये नीतियों को दिशा देने की जरूरत।
- उम्रदराज होती आबादी के लिये तैयारी करने की जरूरत।इसके लिये स्वास्थ्य सेवाओं में निवेश बढ़ाने और चरणबद्ध तरीके से सेवानिवृति आयु बढ़ाने की जरूरत।
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- सामाजिक रूचि से जुड़े आंकड़ों की बेहतर संभावना को बताया गया। समीक्षा में कहा गया है कि ये डेटा जनता का, जनता द्वारा जनता के लिये होने चाहिये।
- कानूनी सुधार, नीतियों में निरंतरता, सक्षम श्रम बाजार और प्रौद्योगिकी के इस्तेमाल पर जोर।
- अनुबंध का प्रवर्तन कारोबार सुगमता रैंकिंग में सुधार के रास्ते में सबसे बड़ी बाधा। सबसे ज्यादा वाणिज्यिक विवाद निचली अदालतों में लंबित हैं।
- समावेशी वृद्धि का लक्ष्य हासिल करने के मामले में निम्न वेतन और मजदूरी में असमानता सबसे बड़ी गंभीर बाधा।
- जीवन पर्यंत मालिकाना लागत को कम रखने और इलेक्ट्रिक वाहनों को परंपरागत वाहनों के मुकाबले बेहतर विकल्प बनाने के लिये नीतियों में बदलाव की जरूरत।
- आर्थिक समीक्षा में संसाधनों का कुशलता से उपयोग करने के मामले में महत्वपवूर्ण राष्ट्रीय नीति की सिफारिश की गई है।