'कैमरों की लोकेशन पता थी, चोरी के बाद वॉशरूम में छिपाते थे कैश', आरोपी अविनाश शुक्ला का पुलिस के सामने बड़ा खुलासा | Ram Mandir Donation Scam

By रेनू तिवारी | Jul 01, 2026

श्री राम जन्मभूमि मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाए गए करोड़ों रुपये के दान (Donation) की चोरी के मामले में गिरफ्तार मुख्य आरोपियों में से एक अविनाश शुक्ला ने पुलिस पूछताछ में कई चौंकाने वाले खुलासे किए हैं। कोर्ट से अनुमति मिलने के बाद पुलिस ने मंगलवार को अविनाश से करीब दो घंटे तक गहन पूछताछ की।पूछताछ के दौरान आरोपी ने न सिर्फ करोड़ों रुपये की चोरी की बात कबूल की, बल्कि यह भी बताया कि कैसे मंदिर परिसर के भीतर सुरक्षा और डोनेशन काउंटिंग की कमियों का फायदा उठाकर इस महाघोटाले को अंजाम दिया जा रहा था।

पुलिस सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, अविनाश शुक्ला ने पकड़े जाने से बचने के लिए अपनाए गए तरीकों का सिलसिलेवार ब्यौरा दिया:

ब्लाइंड स्पॉट का फायदा: सभी आरोपियों को मंदिर परिसर के अंदर लगे सीसीटीवी (CCTV) कैमरों की सटीक लोकेशन पता थी। वे कैमरे की नजर से बचकर कैश निकालते थे।

घेरा बनाकर चोरी: डोनेशन गिनने के दौरान कई लोगों की मिलीभगत होती थी। एक व्यक्ति कैश उठाता था और बाकी आरोपी उसके चारों तरफ घेरा बनाकर खड़े हो जाते थे ताकि कैमरे या किसी अन्य की नजर उस पर न पड़े।

बाथरूम में छिपाया पैसा: चोरी की गई रकम को तुरंत परिसर से बाहर ले जाना जोखिम भरा था, इसलिए आरोपी मौका मिलने पर सबसे पहले पैसे को मंदिर के वॉशरूम/बाथरूम में छिपा देते थे और बाद में उसे सुरक्षित बाहर निकालते थे।

भरोसे का कत्ल: शुक्ला ने दावा किया कि ट्रस्ट के बड़े पदाधिकारियों से करीबी होने के कारण उन पर कोई शक नहीं करता था और न ही उनकी कड़ी निगरानी की जाती थी।

मंदिर में डोनेशन के मैनेजमेंट और निगरानी के तरीकों पर सवाल उठने के बाद, पिछले हफ्ते मिश्रा और श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के जनरल सेक्रेटरी चंपत राय ने इस्तीफ़ा दे दिया था। शुक्ला के अलावा, इस मामले में गिरफ्तार अन्य सात लोगों में रामाशंकर उर्फ ​​टिन्नू यादव (जिन्हें चंपत राय का करीबी सहयोगी बताया जाता है), काउंटिंग इंचार्ज सुभाष श्रीवास्तव और काउंटिंग स्टाफ सदस्य अनुकल्प मिश्रा, लव कुश मिश्रा, मनीष कुमार यादव, राम शंकर मिश्रा और करुणेश पांडे शामिल हैं।


काउंटिंग रूम तक पहुंच, CCTV में कमियां

सूत्रों के मुताबिक, अविनाश शुक्ला ने पुलिस को बताया कि डोनेशन काउंटिंग रूम की चाबियों में से एक टिन्नू यादव के पास रहती थी, जबकि दूसरी चाबी बैंक कर्मचारियों के पास होती थी। उसने दावा किया कि कई लोगों की मिलीभगत से पैसे की चोरी की गई थी; एक व्यक्ति कैश लेता था जबकि बाकी लोग उसके चारों ओर घेरा बनाकर उसे छिपाते थे।

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जांच करने वालों को बताया गया कि सभी आरोपियों को परिसर के अंदर लगे कैमरों की लोकेशन पता थी। उन्होंने कथित तौर पर इस जानकारी का इस्तेमाल पकड़े जाने से बचने के लिए किया और मौका मिलने पर पैसा बाहर निकालने से पहले उसे बाथरूम जैसी जगहों पर छिपा दिया। शुक्ला ने यह भी दावा किया कि ट्रस्ट से जुड़े लोगों के साथ उनकी करीबी होने की वजह से उन पर कम शक किया जाता था और उन पर कड़ी नज़र नहीं रखी जाती थी।

निगरानी सिस्टम, पैसे का पता लगाना

आरोपियों ने पुलिस को यह भी बताया कि मंदिर परिसर के अंदर लगे कैमरों की निगरानी एक कंट्रोल रूम से की जाती थी, लेकिन निगरानी करने वाले कर्मचारी उनकी गतिविधियों पर बारीकी से नज़र नहीं रखते थे।

शुक्ला ने आगे बताया कि चोरी के पैसे का इस्तेमाल कथित तौर पर ज़मीन और घर खरीदने में किया गया था। पुलिस अब जांच के हिस्से के तौर पर आरोपियों से जुड़ी वित्तीय जानकारी और संपत्ति की जांच कर रही है। जांच इस बात पर भी केंद्रित है कि चोरी का सिलसिला बिना पकड़े गए कितने समय तक चलता रहा और क्या इसमें और भी लोग शामिल थे।

SIT की जांच से पहले ही 58 लाख रुपये बरामद कर लिए गए थे

चोरी के आरोपों के बाद, उत्तर प्रदेश सरकार ने मामले की जांच के लिए 13 जून को एक स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) बनाई थी। हालांकि, इस हफ़्ते की शुरुआत में पता चला कि ट्रस्ट ने 5 जून को ही अविनाश शुक्ला के घर से 58 लाख रुपये बरामद कर लिए थे, जो इस मामले में FIR दर्ज होने से पहले की बात है। इस बीच, बाकी पैसे 5 से 8 जून के बीच बैंक ट्रांसफ़र के ज़रिए लौटा दिए गए। इससे पता चलता है कि गबन किए गए पैसे को वापस पाने की कोशिशें मामले के औपचारिक रूप से कानूनी प्रक्रिया में आने से पहले ही शुरू हो गई थीं।

 

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