जानिए कब लगी थी पहली ग्लोबल हेल्थ इमरजेंसी, कोरोना वायरस भी इसमें शामिल

By निधि अविनाश | Feb 05, 2020

नई दिल्ली। कोरोना वायरस के तेजी से फैलने की वजह से विश्व स्वास्थय संगठन (WHO) ने चीन के वुहान शहर में ग्लोबल हेल्थ इमरजेंसी घोषित कर दी है। कोरोना वायरस का 31 दिंसबर को पहला मामला सामने आया था अब इतने कम समय में 20,000 से अधिक मामलों की पुष्टि की जा चुकी है। बता दें कि यह बीमारी न सिर्फ चीन के वुहान शहर में फैल चुकी है बल्कि इसका प्रकोप अमेरिका समेत कई देशों में भी देखने को मिल रहा है। आइये जानते है कि ग्लोबल हेल्थ इमरजेंसी क्या होता है और कोरोना वायरस को 2019-nCov क्यों कहा जा रहा है?

क्या है ग्लोबल हेल्थ इमरजेंसी?

ग्लोबल हेल्थ इमरजेंसी को पब्लिक हेल्थ इमरजेंसी भी कहा जाता है। ऐसी इमरजेंसी तभी लगती है जब किसी भी बीमारी का ग्लोबल स्तर पर फैलने का खतरा होता है। चीन के वुहान शहर में तेजी से फैले कोरोना वायरस बीमारी को ग्लोबल हेल्थ इमरजेंसी घोषित की गई है। यह ऐसी बीमारी है जो विश्व भर में बहुत तेजी से फैल रही है और इसलिए WHO ने आपात बैठक बुलाई जिसके बाद इस बीमारी को ग्लोबल हेल्थ इमरजेंसी घोषित किया गया है। बता दें कि 6 बार इस तरह की आपात स्थिति घोषित की गई है। ग्लोबल हेल्थ इमरजेंसी लगाते वक्त काफी सावधानियां बरती जाती है क्योंकि इससे देश की इकॉनोमी पर भी असर पड़ता है। खासकर टूरिस्ट प्लेसों पर से एमरेजेंसी लगना देश की आर्थित स्थिति पर काफी बुरा असर पड़ता है। 

कब लगी थी पहली बार ग्लोबल हेल्थ इमरजेंसी?

साल 2005 में तेजी से फैले सार्स और एच5एन1 जैसी बीमारी को देखते हुए ग्लोबल हेल्थ इमरजेंसी लागू किया गया था। तब से अब तक ऐसी एमरजेंसी 6 बार लग चुकी है। दूसरी बार साल 2009 में 

स्वाइन फ्लू पर हेल्थ इमरजेंसी घोषित की गई थी। इसके बाद 2014 से 2016 के बीच इबोला, 2014 में पोलियो, 2016 में जीका और 2019 में इबोला पर WHO ने हेल्थ इमरजेंसी लगाई थी। 

जैसे कि चीन के वुहान शहर में कोरोना वायरस का दहशत है इसके लिए WHO कई देशों के साथ मिलकर इस वायरस को जड़ से खत्म करने के लिए आपात बैठक बुलाती है। बता दें कि कोरोना वायरस के लिए अब तक 1.8 मिलियन डॉलर का फंड इक्टठा किया जा चुका है।

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क्या है नोवेल कोरोना वायरस? (Novel Coronavirus - nCoV)

असल में कोरोना वायरस का पूरा नाम 2019 नोवेल कोरोनावायरस है (2019-nCoV)। यह वायरस चीन के वुहान शहर में पाया गया है। इससे पहले ऐसी वायरस की कभी भी पहचान नहीं हुई थी इसलिए इसका नाम नोवेल कोरोना वायरस रखा गया है। मिला जानकारी के मुताबिक सबसे पहले कोरोना वायरस से दिसंबर में ही लोग सक्रंंमित हो चुके थे लेकिन जनवरी में यह मामला प्रकाश में आया। 

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