म्यांमार में सैन्य तख्तापलट ने बढ़ाई कोलकाता ATC की मुश्किलें, करना पड़ा इस चुनौती का सामना

By निधि अविनाश | Feb 19, 2021

म्यांमार में सैन्य तख्तापलट ने कोलकाता हवाई यातायात नियंत्रकों के लिए काफी मुश्किलें बढ़ा दी है। बता दें की पिछले 10 दिनों में कोलकाता हवाई यातायात नियंत्रकों ने  1,000 से अधिक उड़ानों का मार्गदर्शन किया है। यह मार्गदर्शन चीन, थाईलैंड, मलेशिया, सिंगापुर और म्यांमार के आसमान से होकर गुजरने वाली फ्लाइट्स है। एक नियंत्रक ने टीओआई को बताया कि, “8 फरवरी की शाम से, शहर में आंतरिक गड़बड़ी के कारण यांगून एटीसी में कोई मौजुद नहीं था। दो नियंत्रकों ने एटीसी को चालू रखने की कोशिश की, लेकिन एयरमैन (NOTAM) ने पायलटों को नोटिस जारी किया जिसमें यह कहा गया कि शाम 7.20 बजे के बाद हवाई यातायात सेवा (एटीएस) उपलब्ध नहीं होगी जिसके बाद  एटीसी को अतत: बंद ही करना पड़ा"। कोलकाता उड़ान सूचना क्षेत्र (एफआईआर) के माध्यम से 29,000 फीट से 41,000 फीट तक हर दिन उड़ान भरने के बाद लगभग 140 विमान म्यांमार के हवाई क्षेत्र में प्रवेश किए जिससे तनाव काफी ज्यादा बढ़ गया क्योंकि यांगून एटीसी से मार्गदर्शन नहीं मिल रहा था। 

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बता दें कि म्यांमार में सैन्य तख्तापलट के कारण कोलकाता हवाई नियंत्रक को काफी समस्या का सामना करना पड़ा। एक-दूसरे के बाध्य न बने इसके लिए कोलकाता में एटीसी अधिकारियों ने कई व्यस्त मार्गों को बंद कर दिया और कई उड़ानों को अन्य मार्गों के लिए मोड़ दिया। खबर के मुताबिक, व्यस्त मार्गों को बंद करना और एक ही राजमार्ग के लिए उड़ानों को मोड़ना एटीसी कोलकाता के लिए काफी आसान रहा।कोलकाता एटीसी के एक अधिकारी ने कहा कि अगले सात दिनों और रातों में, कोलकाता में नियंत्रकों ने म्यांमार हवाई क्षेत्र से 1,000 से अधिक उड़ानों को बिना किसी संघर्ष रिपोर्ट या करीबी कॉल के सुरक्षित रूप से निर्देशित किया।

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खबर के मुताबिक 16 फरवरी को म्यांमार में अब हवाई यातायात नियंत्रकों ने हवाई स्टेशनों में वापसी कर ली है जिससे कोलकाता में एटीसी सेवाओं और नियंत्रकों को राहत की सांस मिल पाई है। बता दें कि यह पहली बार है कि जब कोलकाता के नियंत्रकों ने इस तरह की चुनौती का सामना किया है। गौरतलब है कि मुंबई के नियंत्रकों को भी बालाकोट हवाई हमले के बाद 26 फरवरी, 2019 से पाकिस्तान के हवाई क्षेत्र को लंबे समय तक बंद करना पड़ा था। बता दें कि भारत ने पाकिस्तान हवाई क्षेत्र को 16 जुलाई तक बंद रखा था। 

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