देखते हैं तुम हमें ईरान भेजोगे या हम तुम्हें इजरायल, पाकिस्तान में शुरू हुआ अलग ही खेल, मुनीर के खिलाफ इकट्ठा हुए शिया

By अभिनय आकाश | Mar 23, 2026

पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) के गिलगित इलाके में इस वक्त माहौल बेहद तनावपूर्ण है। वहां की सड़कों पर उमड़ा जनसैलाब किसी दुश्मन देश के खिलाफ नहीं, बल्कि खुद अपने ही देश के आर्मी चीफ जनरल आसिम मुनीर के खिलाफ आग उगल रहा है। प्रदर्शनकारियों का नेतृत्व कर रहे धर्मगुरुओं के तेवर इतने तल्ख हैं कि उन्होंने सीधे तौर पर सेना को चुनौती दे डाली है। दरअसल, एक बयान ने पूरे देश में शिया और सुन्नी गुट के बीच विवाद खड़ा कर दिया है। वजह है पाकिस्तान के आर्मी चीफ आसिम मुनीर का स्टेटमेंट। जिनको ईरान से बहुत प्यार है वो वहीं चले जाए। ऐसा आसिम मुनीर ने रावलपिंडी में एक इफ्तार पार्टी के दौरान शिया धर्म गुरुओं से कहा है और यही स्टेटमेंट अब पाकिस्तान के लिए सिरदर्द बन गया है। शिया समुदाय से जुड़े लोग मुनीर को खरी-खोटी सुना रहे हैं और यह भी आरोप लगा रहे हैं कि पाकिस्तानी आर्मी अमेरिका के कहने पर देश की सरकार बदल देती है। माने पाकिस्तान जो बात खुद कभी नहीं मानता गुस्से में आए वहां के शिया धर्म गुरु ही जग जाहिर कर रहे हैं।

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आपको बता दें कि ईरान के सुप्रीम लीडर अयतुल्ला अली खामिनई की मौत के बाद पाकिस्तान में शिया समुदाय के लोगों ने अमेरिका और इजराइल के विरोध में प्रदर्शन किया था। कराची में यूएस एंबेसी के बाहर बड़ी संख्या में शिया समुदाय के लोग जुटे थे। इस विरोध प्रदर्शन में कई जगहों से हिंसा की खबरें आई थी। 20 लोगों की मौत की भी खबर थी अलजजीरा की रिपोर्ट के मुताबिक जिसके बाद पाकिस्तानी आर्मी चीफ ने यह चेतावनी दी थी कि दूसरे देश की घटनाओं के आधार पर पाकिस्तान में हिंसा बर्दाश्त नहीं की जाएगी। शिया धर्म गुरुओं ने मुनीर की इस चेतावनी को दिल पर लगा लिया। उनका आरोप था कि ऐसा कहकर मुनीर शिया समुदाय पर हिंसा का सारा ब्लेम डाल रहे हैं। जिसके बाद मुनीर ने कहा कि अगर ईरान से इतना ही प्यार है तो वहीं चले जाए। इस स्टेटमेंट पर शिया धर्म गुरु भी भड़क गए हैं।  शियाओं का कहना है कि जो पहले तीन खलीफा बने वो गलत तरीके से बने। अली को सुन्नियों ने चौथा खलीफा माना। जबकि शिया ने अपना पहला इमाम माना। खिलाफत की जगह शियाओं में इमामत मिली। और फिर इस तरह शियाओं के 12 इमाम हुए। पहले अली, दूसरे अली के बेटे हसन, तीसरे हुसैन। हुसैन अली के दूसरे बेटे थे। इन सबको सुन्नी भी मानते हैं। लेकिन खिलाफत और इमामत के विवाद में सुन्नी और शिया में मतभेद हो गए। मुस्लिम आबादी में बहुसंख्य सुन्नी मुसलमान हैं। शिया की तादाद कम है। दोनों समुदाय सदियों से एक साथ रहते आए हैं। 

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गिलगित में हुआ यह प्रदर्शन केवल एक जलसा नहीं, बल्कि पाकिस्तानी सेना की पकड़ ढीली होने का संकेत है। लोग अब खुलकर जनरल आसिम मुनीर के खिलाफ खड़े हो रहे हैं और उनकी नीतियों को इस्लाम विरोधी करार दे रहे हैं। यह पूरा घटनाक्रम यह दर्शाता है कि गिलगित-बाल्टिस्तान में पाकिस्तान के प्रति असंतोष अब उस मुकाम पर पहुंच गया है, जहां जनता सीधे सेना की आंखों में आंखें डालकर बात कर रही है।

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