By रेनू तिवारी | May 09, 2026
भारत सरकार ने लेफ्टिनेंट जनरल NS राजा सुब्रमणि को अगला चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) नियुक्त किया है। वह जनरल अनिल चौहान की जगह लेंगे, जिनका कार्यकाल 30 मई को पूरा होने वाला है। लेफ्टिनेंट जनरल सुब्रमणि अभी राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद सचिवालय में मिलिट्री एडवाइजर के तौर पर काम कर रहे हैं, यह ज़िम्मेदारी उन्होंने 1 सितंबर, 2025 को संभाली थी। इससे पहले, उन्होंने 1 जुलाई, 2024 से 31 जुलाई, 2025 तक आर्मी स्टाफ के वाइस चीफ के तौर पर काम किया था। उन्होंने मार्च 2023 से जून 2024 तक सेंट्रल कमांड के जनरल ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ के तौर पर भी कमान संभाली थी।
कमीशन: उन्होंने दिसंबर 1985 में प्रतिष्ठित 'द गढ़वाल राइफल्स' में कमीशन प्राप्त किया था।
सैन्य सलाहकार: नियुक्ति से पूर्व, वह 1 सितंबर 2025 से राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद सचिवालय (NSCS) में सैन्य सलाहकार के रूप में कार्यरत थे।
वाइस चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ: उन्होंने 1 जुलाई 2024 से 31 जुलाई 2025 तक थल सेना के उप-प्रमुख की जिम्मेदारी निभाई।
कमांडिंग ऑफिसर: उन्होंने मार्च 2023 से जून 2024 तक भारतीय सेना की सेंट्रल कमांड के जनरल ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ के रूप में नेतृत्व किया।
लेफ्टिनेंट जनरल सुब्रमणि को भारतीय सीमाओं की गहरी समझ है। उन्हें विशेष रूप से निम्नलिखित क्षेत्रों में विशेषज्ञ माना जाता है:
पश्चिमी सीमा: पाकिस्तान से सटे इलाकों में सुरक्षा ग्रिड का अनुभव।
उत्तरी सीमा: चीन के साथ वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर जटिल ऑपरेशनल मामलों की विशेषज्ञता।
उनकी सैन्य शिक्षा अंतरराष्ट्रीय स्तर की रही है, जो उन्हें एक आधुनिक और कूटनीतिक सैन्य नेता बनाती है:
संस्थान: राष्ट्रीय रक्षा अकादमी (NDA) और भारतीय सैन्य अकादमी (IMA) के पूर्व छात्र।
विदेशी प्रशिक्षण: यूनाइटेड किंगडम के ब्रैक्नेल में जॉइंट सर्विसेज कमांड एंड स्टाफ कॉलेज से प्रशिक्षण।
डिग्रियां: किंग्स कॉलेज लंदन से मास्टर ऑफ आर्ट्स और मद्रास यूनिवर्सिटी से डिफेंस स्टडीज में MPhil।
देश के प्रति उनकी उत्कृष्ट सेवा के लिए उन्हें भारतीय सेना के सर्वोच्च सम्मानों से नवाजा गया है:
परम विशिष्ट सेवा मेडल (PVSM)
अति विशिष्ट सेवा मेडल (AVSM)
सेना मेडल (SM)
विशिष्ट सेवा मेडल (VSM)
लेफ्टिनेंट जनरल सुब्रमणि की नियुक्ति ऐसे समय में हुई है जब भारत 'थिएटर कमांड' बनाने और सेना के तीनों अंगों के आधुनिकीकरण की प्रक्रिया में है। एक अनुभवी रणनीतिकार के रूप में, उन पर भारतीय सेनाओं के एकीकरण (Integration) और भविष्य की चुनौतियों के लिए सैन्य ढांचे को तैयार करने की बड़ी जिम्मेदारी होगी।
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