By प्रभासाक्षी न्यूज़ डेस्क | Oct 26, 2026
(फाइल फोटो के साथ) रियो डी जिनेरियो, 26 अक्टूबर (एपी) अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के मुखर आलोचक ब्राजील के राष्ट्रपति लुइज इनासियो लूला दा सिल्वा रविवार को चौथी बार राष्ट्रपति निर्वाचित हुए। इस चुनाव परिणाम से लातिन अमेरिका में अमेरिका के बढ़ते प्रभाव की आलोचना करने वालों को राहत मिली है। मतगणना में 100 प्रतिशत वोटों की गिनती पूरी होने के बाद ब्राजील के निर्वाचन न्यायालय ने घोषणा की कि जल्द ही 81 वर्ष के होने जा रहे लूला ने अपने प्रतिद्वंद्वी फ्लावियो बोल्सोनारो पर करीब 44 लाख वोटों की निर्णायक बढ़त हासिल कर ली है।
यह स्थिति मतदान का समय दो घंटे बढ़ाने के अंतिम समय में लिए गए फैसले के बाद पैदा हुई थी। बोल्सोनारो, पूर्व राष्ट्रपति जायर बोल्सोनारो के बेटे हैं। लूला ने 2022 में जायर बोल्सोनारो को हराकर राष्ट्रपति पद हासिल किया था।
बोल्सोनारो के पिता को लूला से हारने के बाद तख्तापलट की कोशिश करने के मामले में 27 साल की जेल की सजा सुनाई गई। लूला की जीत लातिन अमेरिका में ट्रंप के सहयोगी दक्षिणपंथी राष्ट्रपति उम्मीदवारों के चुनाव जीतने के हालिया रुझान के उलट है। इससे लातिन अमेरिका की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था के रूप में ब्राजील ट्रंप की ओर से लगाए गए बढ़े हुए शुल्कों के दबाव के बावजूद अमेरिका से स्वतंत्र बने रहने की स्थिति में होगा।
लूला के चुनाव प्रचार अभियान की ओर से जारी एक वीडियो में ब्राजील के निर्वाचन न्यायालय द्वारा दूसरे दौर के चुनाव में उनकी जीत की पुष्टि किए जाने के बाद उन्हें अपनी पत्नी एवं प्रथम महिला रोसांगेला दा सिल्वा और सहयोगियों के साथ जश्न मनाते हुए दिखाया गया। साओ पाउलो की मुख्य सड़क और रियो डी जेनेरियो के सिनेलैंडिया चौक पर हजारों समर्थकों की भीड़ को संबोधित करते हुए लूला ने ब्राजील की जनता के प्रति आभार जताया। उन्होंने लैंगिक या धार्मिक भेदभाव के बिना सभी ब्राजीलियाई लोगों का सम्मान करने का संकल्प लिया और बोल्सोनारो पर भी निशाना साधा।
लूला ने कहा, ‘‘यह झूठ और सच्चाई को नकारने की प्रवृत्ति की हार है।’’ उन्होंने ब्राजील की संप्रभुता की रक्षा के अपने संकल्प को भी दोहराया। उन्होंने कहा, ‘‘या तो मातृभूमि स्वतंत्र रहेगी या हम ब्राजील के लिए मर मिटेंगे। ब्राजील किसी भी देश के अधीन होकर या उसके इशारे पर चलने वाला देश नहीं बनेगा।’’ लूला पांच जनवरी, 2027 को राष्ट्रपति के रूप में अपना चौथा कार्यकाल शुरू करेंगे।
निर्वाचन न्यायालय की घोषणा के साथ ही मतदान केंद्रों पर शाम से बना असमंजस खत्म हो गया। इससे पहले, ब्राजील के उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश क्रिस्टियानो जानिन ने मतदान समाप्त होने के निर्धारित समय से तीन मिनट पहले फैसला सुनाया कि मतदान केंद्र दो घंटे और खुले रहेंगे। यह फैसला दोनों उम्मीदवारों की मांग के बाद लिया गया।
लूला ने साओ पाउलो और साल्वाडोर में मतदान केंद्रों तक मतदाताओं को ले जाने वाली बसों से जुड़ी समस्याओं के कारण मतदान का समय बढ़ाने की मांग की थी। इन दोनों शहरों में आम तौर पर मौजूदा राष्ट्रपति के पक्ष में रुझान रहता है। वहीं, बोल्सोनारो ने ब्राजील के दक्षिणी हिस्से में भारी बारिश के कारण मतदान का समय बढ़ाने का अनुरोध किया था।
इस क्षेत्र में उन्हें अधिक समर्थन मिलने की संभावना थी। इस फैसले के कारण मतों की गिनती शुरू होने में दो घंटे की देरी हुई। यह स्पष्ट नहीं था कि निर्धारित समय के बाद कितने मतदान केंद्र खुले रहे।
बोल्सोनारो ने दावा किया कि जानिन लूला के पूर्व वकील रह चुके हैं। उन्होंने मतदान का समय बढ़ाने के फैसले की आलोचना करते हुए आरोप लगाया कि इससे ‘‘खेल के बीच में ही उसके नियम बदल दिए गए।’’ उन्होंने कहा, ‘‘इन घटनाओं के संदर्भ में चुनाव के नतीजों को स्वीकार करना असंभव है।’’ यह स्पष्ट नहीं है कि बोल्सोनारो की शिकायत चुनाव परिणाम रद्द करने के लिए जरूरी कानूनी मानदंडों पर खरी उतर सकती है या नहीं। यदि उनके पास धोखाधड़ी के सबूत हैं, तो उन्हें मतों की दोबारा गिनती कराने का अनुरोध करने का अधिकार भी है।
हालांकि, इससे चुनाव परिणाम बदलने की संभावना नहीं है। पूर्व राष्ट्रपति बोल्सोनारो द्वारा नियुक्त उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश और निर्वाचन न्यायालय के अध्यक्ष कासियो नूनेस मार्केस ने कहा कि मतदान का समय बढ़ाए जाने से चुनाव परिणाम प्रभावित नहीं हुए। ब्राजील में 1985 में सैन्य तानाशाही समाप्त होने के बाद यह पहली बार है कि पहले दौर के चुनाव में दूसरे स्थान पर रहने वाले उम्मीदवार ने राष्ट्रपति पद हासिल किया है।
पहले दौर में बोल्सोनारो को 47 प्रतिशत और लूला को 45 प्रतिशत वोट मिले थे। दोनों के बीच 22 लाख वोटों का अंतर था। महंगाई और सुरक्षा को लेकर लोगों की चिंताओं के कारण लूला के लिए दोबारा चुनाव जीतना कठिन था।
बोल्सोनारो ने अपराध के खिलाफ सख्त रुख को अपने चुनाव प्रचार का प्रमुख मुद्दा बनाया और खाद्य पदार्थों की कीमतें घटाने का वादा किया। वहीं, अनिर्णय की स्थिति में मौजूद मतदाताओं को अपने पक्ष में करने के लिए लूला ने महंगी प्रोत्साहन योजनाओं पर जोर दिया। दोनों नेताओं को परिवार के सदस्यों और सहयोगियों से जुड़े भ्रष्टाचार के आरोपों का सामना करना पड़ा है।
लूला ने 1970 के दशक में ट्रेड यूनियन नेता के रूप में अपना राजनीतिक सफर शुरू किया था। इसके बाद उन्होंने वर्कर्स पार्टी की स्थापना में मदद की। इस पार्टी की ओर से उन्होंने तीन बार राष्ट्रपति पद का चुनाव लड़ा और आखिरकार 2002 में जीत हासिल की।
चार साल बाद वह फिर निर्वाचित हुए। 2010 में उनके मंत्रिमंडल की सदस्य दिल्मा रूसेफ ने उनकी जगह ली। रूसेफ 2014 में दोबारा निर्वाचित हुईं।
रूसेफ को 2016 में सरकारी लेखा-जोखा संबंधी हेरफेर के आरोपों के बीच महाभियोग के जरिए पद से हटा दिया गया था। इस दौरान भ्रष्टाचार की व्यापक जांच में लूला का नाम भी सामने आया। लूला ने 2018 में फिर राष्ट्रपति चुनाव लड़ने की कोशिश की, लेकिन दोषी ठहराए जाने के बाद मार्च में उन्हें जेल भेज दिया गया।
580 दिन जेल में रहने के बाद लूला रिहा हुए। इसके बाद ब्राजील के उच्चतम न्यायालय ने उनकी सजा रद्द कर दी। इसके बाद लूला पूर्व राष्ट्रपति जायर बोल्सोनारो के सबसे मुखर आलोचकों में शामिल हो गए और 2022 में उन्हें मामूली अंतर से हराया।
इस बार के राष्ट्रपति चुनाव में पहले दौर में पिछड़ने के बाद लूला ने अपने चुनाव प्रचार की रणनीति बदली, युवा मतदाताओं को अपने पक्ष में करने की कोशिश की और लोकतांत्रिक मूल्यों तथा अपनी राजनीतिक विरासत के समर्थन में लाखों ब्राजीलियाई लोगों को सड़कों पर उतरने के लिए प्रेरित किया। लूला अब ट्रंप और निकारागुआ के राष्ट्रपति डेनियल ओर्टेगा के साथ अमेरिका महाद्वीप के सबसे उम्रदराज राष्ट्रपतियों में शामिल हो गए हैं। तीनों की उम्र 80 वर्ष है।