By प्रभासाक्षी न्यूज़ डेस्क | Jul 29, 2026
भोपाल, 29 जुलाई मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने बुधवार को कहा कि राज्य में वन्यजीव संरक्षण के तहत कई उपायों से बाघों की संख्या में वृद्धि हुई है और अगले साल नयी गणना में इनकी तादाद 1000 से अधिक होने का अनुमान है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में बाघ के अलावा चीता, घड़ियाल, हाथी और जंगली भैंसे समेत विभिन्न वन्यजीवों के संरक्षण की दिशा में अनेक महत्वपूर्ण कार्य हुए हैं। उन्होंने कहा, ‘‘इसी का परिणाम है कि प्रदेश में बाघों का कुनबा तेजी से बढ़ रहा है और मध्यप्रदेश को ‘टाइगर स्टेट’ का दर्जा हासिल है।’’ मुख्यमंत्री ने यहां अंतरराष्ट्रीय बाघ दिवस पर आयोजित एक राज्य स्तरीय कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा, ‘‘प्रदेश में 53 साल पहले बाघों की संख्या दहाई के आंकड़े में सिमटी हुई थी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि मध्यप्रदेश बाघ संरक्षण के क्षेत्र में अपने सफल प्रयासों और अटूट प्रतिबद्धता के कारण देशभर में विशिष्ट पहचान रखता है। उन्होंने कहा, ‘‘बाघ हमारे समृद्ध वनों, जैव विविधता और पर्यावरणीय संतुलन के प्रतीक हैं। राज्य सरकार जनभागीदारी से प्रकृति और वन्यजीव संरक्षण के लिए संकल्पित हैं।’’ उन्होंने कहा कि चंबल एशिया में सबसे स्वच्छ जल की नदी है और यहां घड़ियाल संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण प्रयास किए गए हैं।
उन्होंने कहा कि कूनो क्षेत्र की नदियों में भी घड़ियाल छोड़े गए हैं और मध्यप्रदेश में 100 वर्ष पहले विलुप्त हो चुके जंगली भैंसे का पुनर्बसावट का काम सफलतापूर्वक किया गया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि दो वर्ष पहले तक हाथियों के कारण डरावने संदेश आते थे लेकिन वन विभाग ने आधुनिक तकनीक और नवाचारी प्रयासों से हाथियों के संकट से मुक्ति दिलवाई है। उन्होंने कहा, ‘‘प्रदेश में बहुत जल्द गैंडे भी लाए जाएंगे।’’ उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश को समृद्ध जैव विविधता विरासत में मिली है और वन विभाग ने वन प्रबंधन में अपने अधिकारियों-कर्मचारियों के साथ वन समितियों, स्थानीय ग्रामीणों को साथ जोड़कर प्रदेश को वन्य जीव संरक्षण में नयी ऊंचाईयां प्रदान की हैं।
प्रधान मुख्य वन संरक्षक वन्यजीव समिता राजौरा ने इस अवसर पर कहा कि रुस में लिए गए संकल्प के बाद वर्ष 2011 से लगातार 29 जुलाई को अंतर्राष्ट्रीय बाघ दिवस मनाया जा रहा है। उन्होंने कहा, ‘‘बाघों के संरक्षण में मध्यप्रदेश का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। राज्य सरकार सभी वन्यजीवों के संरक्षण का प्रण लेकर आगे बढ़ रही है।’’ उन्होंने कहा कि प्रदेश में प्रतिवर्ष 28 लाख वन्य जीव पर्यटक आते हैं, जिनमें 1 लाख विदेशी भी शामिल होते हैं।
उन्होंने कहा, ‘‘प्रदेश के सभी 9 बाघ अभ्यारण्यों में वर्तमान में बाघ संरक्षण से जुड़ी कई गतिविधियां संचालित की जा रही हैं। बाघ संरक्षण अभियान में वन समितियां और स्थानीय लोगों का भी विशेष योगदान है।