By प्रभासाक्षी न्यूज़ डेस्क | Nov 05, 2026
रायपुर, पांच नवंबर केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने अदालत में कहा है कि छह हजार करोड़ रुपये के कथित महादेव ऑनलाइन सट्टेबाजी ऐप घोटाले में गिरफ्तार मुख्य आरोपियों में शामिल सौरभ चंद्राकर से हिरासत में पूछताछ जरूरी है, ताकि सट्टा सिंडिकेट को संरक्षण देने के बदले कथित तौर पर अवैध धन हासिल करने वाले छत्तीसगढ़ के सरकारी अधिकारियों की पहचान की जा सके। सीबीआई ने रायपुर की विशेष अदालत में दाखिल रिमांड अर्जी में चंद्राकर की 10 दिन की हिरासत मांगी थी। एजेंसी ने आरोप लगाया कि चंद्राकर ने ‘महादेव बुक’ के अन्य प्रमोटरों और सहयोगियों के साथ मिलकर पुलिस एवं प्रशासनिक अधिकारियों तथा प्रभावशाली राजनीतिक लोगों को नियमित रूप से बड़ी रकम देकर उनका संरक्षण हासिल किया था।
इस काम में पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों को भी लगाया गया था, ताकि कथित प्रोटेक्शन मनी पुलिस एवं प्रशासनिक अधिकारियों तक पहुंचाई जा सके। एजेंसी ने अपनी रिमांड अर्जी में कहा कि आरोपी से हिरासत में पूछताछ इसलिए जरूरी है, ताकि घोटाले के अन्य मुख्य साजिशकर्ताओं और लाभार्थियों की पहचान की जा सके। धोखाधड़ी से जुटाई गई रकम के संग्रह, उसे विभिन्न स्तरों पर बांटने, विदेश भेजने और उससे बनाई गई संपत्तियों का पता लगाने के लिए भी पूछताछ आवश्यक है।
सीबीआई ने कहा कि चंद्राकर से पूछताछ के जरिए उन सरकारी अधिकारियों की पहचान भी की जा सकेगी, जिन्होंने महादेव सट्टेबाजी सिंडिकेट को संचालित करने देने के बदले कथित तौर पर अवैध रूप से पैसे लिए थे। जांच के मुताबिक, चंद्राकर और रवि उप्पल ने अपने अन्य सहयोगियों के साथ मिलकर महादेव बुक ऐप का प्रचार किया और पैनल तथा शाखा संचालकों के नेटवर्क के जरिए ऑनलाइन सट्टेबाजी का कारोबार चलाया। एजेंसी का आरोप है कि ऐप के प्रमोटर अवैध कमाई का 70 से 80 प्रतिशत हिस्सा अपने पास रखते थे, जबकि शेष रकम पैनल संचालकों के बीच बांट दी जाती थी।
सीबीआई ने दावा किया कि वर्ष 2020 में कोविड-19 महामारी के दौरान लगाए गए लॉकडाउन के बाद से चंद्राकर और उसके सहयोगी ऑनलाइन सट्टेबाजी के जरिए हर महीने करीब 450 करोड़ रुपये कमा रहे थे। आरोप है कि अवैध कमाई के लेन-देन को आसान बनाने के लिए फर्जी दस्तावेजों के आधार पर सैकड़ों बैंक खाते खुलवाए गए थे। एजेंसी के मुताबिक, ये खाते कमीशन पर चलते थे।
सीबीआई ने यह भी दावा किया कि अवैध कमाई का बड़ा हिस्सा सट्टेबाजी वेबसाइटों के विज्ञापन और बड़े सितारों की मौजूदगी वाले भव्य वार्षिक कार्यक्रमों के आयोजन पर खर्च किया गया। इन कार्यक्रमों में शामिल होने वाली मशहूर हस्तियों को भी कथित तौर पर सट्टेबाजी से अर्जित रकम से भुगतान किया गया था। एजेंसी का आरोप है कि पुलिस एवं प्रशासनिक अधिकारियों और प्रभावशाली राजनीतिक लोगों ने अपने पदों का दुरुपयोग कर प्रोटेक्शन मनी के रूप में अवैध वित्तीय लाभ हासिल किए और इस रकम से संपत्तियां भी बनाई थीं।
सीबीआई के अनुसार, चंद्राकर और अन्य प्रमोटर दुबई से ‘महादेव बुक’ सिंडिकेट चलाते थे और उसे अपना मुख्यालय बताते थे। इस अवैध कारोबार को चलाने के लिए छत्तीसगढ़ के बड़ी संख्या में युवाओं को प्रबंधक, पर्यवेक्षक और अन्य कर्मचारियों के रूप में नियुक्त किया गया था। एजेंसी ने बताया कि कानूनी कार्रवाई से बचने के लिए चंद्राकर वर्ष 2022 में भारत छोड़कर विदेश चला गया था और उसने जानबूझकर जांच में शामिल नहीं हुआ।
चंद्राकर को हाल ही में ओमान से प्रत्यर्पित कर भारत लाया गया। तीन नवंबर की शाम उसे सीबीआई की हिरासत में विमान से रायपुर लाया गया था, ताकि इस मामले में उसे अदालत के समक्ष पेश किया जा सके। अदालत से आठ दिन की हिरासत मिलने के बाद एजेंसी उसे पूछताछ के लिए दिल्ली ले गई।
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) भी महादेव ऐप से जुड़े कथित धनशोधन मामले की जांच कर रहा है। यह मामला छत्तीसगढ़ में भूपेश बघेल के नेतृत्व वाली पिछली कांग्रेस सरकार के कार्यकाल के दौरान सामने आया था। राज्य में भाजपा सरकार के सत्ता में आने के बाद ईडी की रिपोर्ट के आधार पर मार्च 2024 में राज्य की आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा (ईओडब्ल्यू) ने प्राथमिकी दर्ज की थी।
इसमें पूर्व मुख्यमंत्री एवं कांग्रेस के वरिष्ठ नेता भूपेश बघेल, ऐप प्रमोटर रवि उप्पल, सौरभ चंद्राकर, शुभम सोनी और अनिल कुमार अग्रवाल सहित 14 अन्य लोगों को आरोपी बनाया गया था। अगस्त 2024 में राज्य सरकार ने कथित सट्टेबाजी ऐप घोटाले से जुड़े विभिन्न पुलिस थानों में दर्ज मामलों के साथ ईओडब्ल्यू का एक मामला भी जांच के लिए सीबीआई को सौंप दिया था।