By अभिनय आकाश | Oct 27, 2026
दिल्ली हाई कोर्ट ने मंगलवार को बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे द्वारा दायर मानहानि के एक दीवानी मुकदमे में, तृणमूल कांग्रेस (ममता गुट) की सांसद महुआ मोइत्रा और पूर्व केंद्रीय वित्त सचिव सुभाष चंद्र गर्ग को समन जारी किया। जस्टिस तुषार राव गेडेला ने बचाव पक्ष के वकील द्वारा दिए गए आश्वासनों को आधिकारिक तौर पर दर्ज किया और मानहानि के इस मुकदमे में महुआ मोइत्रा तथा सुभाष चंद्र गर्ग को औपचारिक समन जारी किए। जैसे-जैसे मानहानि की कार्यवाही आगे बढ़ेगी, हाई कोर्ट संबंधित पक्षों के तर्कों और उनके लिखित जवाबों पर आगे विचार करेगा। मोइत्रा ने अपने उस ट्वीट को हटाने पर सहमति जताई, जिसमें उन्होंने दुबे को "फर्जी डिग्री वाले किस्म का आदमी" बताया था। वहीं, गर्ग ने पॉडकास्टर से संपर्क करके यह अनुरोध करने पर सहमति जताई कि वीडियो के उस हिस्से को हटा दिया जाए या ब्लॉक कर दिया जाए, जिसमें उन्होंने दुबे को "ब्लैकमेल करने वाले किस्म का आदमी" कहा था।
कोर्ट की कड़ी टिप्पणियों के बाद, गर्ग और मोइत्रा दोनों का प्रतिनिधित्व कर रहे वकील समुद्र सारंगी ने निर्देश लेने पर सहमति जताई और बेंच को उनके फैसलों के बारे में बताया। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि मोइत्रा के पास यह कानूनी अधिकार है कि वह स्वतंत्र रूप से दुबे की शैक्षणिक योग्यताओं को चुनौती दे सकें और उन पर सवाल उठा सकें। यह कानूनी लड़ाई पूर्व वित्त सचिव सुभाष चंद्र गर्ग द्वारा एक पॉडकास्ट चर्चा के दौरान की गई टिप्पणियों से शुरू हुई है, जो भारत के सकल घरेलू उत्पाद (GDP) के आंकड़ों पर केंद्रित थी। बेंच के सामने गर्ग की टिप्पणियों के संदर्भ को स्पष्ट करते हुए, वकील समुद्र सारंगी ने कहा, "मैं उनके साथ किसी बहस में नहीं उलझा था। मैं एक पॉडकास्ट में था और मैंने GDP के आंकड़ों पर कुछ टिप्पणियां कीं। फिर एक सवाल आया, और मैंने पृष्ठभूमि बताई कि क्यों यह व्यक्ति मेरे खिलाफ व्यक्तिगत दुश्मनी रखता है, जो 2018 से चली आ रही है।" सारंगी ने तर्क दिया कि गर्ग का बयान दुबे के साथ उनके पुराने संबंधों की पृष्ठभूमि बताता है। उन्होंने यह भी कहा कि अंतरिम राहत के चरण में, दुबे को यह साबित करना होगा कि उनके पक्ष को अधिक महत्व क्यों दिया जाना चाहिए। यह उनके हलफनामे और मेरे हलफनामे के बीच की बात है। उन्हें यह साबित करना होगा कि उनकी विश्वसनीयता कुछ अधिक है।