By अभिनय आकाश | Sep 19, 2025
ऑपरेशन सिंदूर के 132 दिन बाद पाकिस्तान और सऊदी अरब ने 17 सितंबर को एक डिफेंस डील साइन की है। डिफेंस अग्रीमेंट ये भी कहता है कि अगर एक देश पर हमला हुआ तो दूसरा देश उसे खुद पर भी हमला मानेगा। सऊदी अफसर ने दावा किया कि करार में सभी सैन्य विकल्पों का प्रयोग किया जा सकता है। पाक और सऊदी अरब का कहना है कि ये करार किसी भी तीसरे देश को मद्देनजर रखते हुए नहीं किया गया है। भारत से रिश्ते ताक पर रख कर पाकिस्तान को पालने का सऊदी का फैसला किसी को समझ नहीं आ रहा है। जानकार इस पूरे खेल के पीछे अमेरिका का हाथ भी बता रहे हैं।
हाल ही में सोशल मीडिया पर प्रसारित एक भाषण में विश्वविद्यालय के तालिबान द्वारा नियुक्त चांसलर मोहम्मद नसीम हक्कानी ने पाकिस्तान सरकार को कठपुतली बताते हुए दावा किया कि उसके कानून यहूदियों और ईसाइयों के प्रभाव में हैं। अमू टीवी स्वतंत्र रूप से इस टिप्पणी के समय या स्थान की पुष्टि नहीं कर सका। तालिबान प्रशासन और उसके उच्च शिक्षा मंत्रालय ने हक्कानी के बयानों पर सार्वजनिक रूप से कोई टिप्पणी नहीं की है। क्षेत्रीय विश्लेषकों ने कहा कि ये टिप्पणियाँ राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण हैं, क्योंकि पाकिस्तान लंबे समय से एक पड़ोसी देश और पिछले दशकों में तालिबान को समर्थन देने के आरोपों वाले देश के रूप में अपनी भूमिका निभाता रहा है। 2021 में तालिबान के सत्ता में लौटने के बाद से तालिबान और पाकिस्तान के बीच संबंध तनावपूर्ण रहे हैं, इस्लामाबाद का कहना है कि अफगानिस्तान स्थित आतंकवादी सीमा पार हमले करते हैं। तालिबान ने इन आरोपों को खारिज किया है।