By अभिनय आकाश | Apr 21, 2026
ट्रंप प्रशासन ने सोमवार से अरबों डॉलर का टेरिफ लौटाना शुरू कर दिया है। नीतिगत मामलों पर यह ट्रंप की बड़ी हार है। टेरिफ लौटाने की दिशा में यह पहला व्यावहारिक कदम भी है। अमेरिकी आयातकों से जो टेरिफ ट्रंप प्रशासन ने वसूले थे, उन्हें पाने के लिए अमेरिकी आयातक और ब्रोकर ऑनलाइन आवेदन कर रहे हैं। ध्यान रहे कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सत्ता में आते ही अमेरिका फर्स्ट की नीति लागू की थी और अपनी ताकत का बेजा इस्तेमाल करते हुए दुनिया के देशों पर मनमाने ढंग से टेरिफ लगाना शुरू कर दिया था। भारत भी ट्रंप की इस सनक का शिकार हुआ था। भारत पर ट्रंप ने कुल 50% टेरिफ लगाए थे। इस मामले को अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई थी। लंबी सुनवाई के बाद सुप्रीम कोर्ट ने 20 फरवरी 2026 को 63 के बहुमत से अपना फैसला दिया था। फैसले में साफ कहा गया था कि जिस आईईपीए यानी इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर एक्ट 1997 के तहत मिले अधिकार का हवाला देकर ट्रंप अपने लगाए टेरिफ को जस्टिफाई कर रहे हैं। वह राष्ट्रपति को शांति काल में टेरिफ लगाने की ताकत देता ही नहीं।
भारतीय मुद्रा में 166 बिलियन डॉलर का मतलब तकरीबन 1545794 करोड़। हालांकि इस रिफंड के लिए अमेरिकी सरकार बारीकी से सभी दावों की जांच कर रही है। लेकिन असल सवाल है कि क्या भारत के व्यापारी इस वापसी के हकदार हैं? मीडिया रिपोर्ट्स बताती है कि भारत के एक्सपोर्टर्स इस टेरिफ रिफंड के सीधे हकदार नहीं है। यह रिफंड केवल उन अमेरिकी कंपनियों या यूनिट्स को दिया जाएगा जो सीबीपी यानी यूएस कस्टम एंड बॉर्डर प्रोटेक्शन के पास एंट्री फाइल करते थे और टेरिफ का सीधा पेमेंट भी करते थे। भारत से सामान निर्यात करने वाले ज्यादातर भारतीय व्यापारी एफओबी यानी फ्री ऑफ बोर्ड या सीआईएफ यानी लागत, बीमा और बाल ढुलाई टर्म पर शिपमेंट करते हैं। जिसमें अमेरिकी खरीदार ही आयातक रिकॉर्ड पर होता है। नतीजतन टेरिफ का बोझ अमेरिकी इंपोर्टर पर पड़ता था।