By अभिनय आकाश | Apr 02, 2026
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने गुरुवार को मालदा घटना पर सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणियों का जवाब देते हुए आरोप लगाया कि यह भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की राज्य में अशांति फैलाने और चुनाव रद्द करने तथा राष्ट्रपति शासन लागू करने जैसे चरम उपायों को लागू करने की रणनीति का हिस्सा है। मालदा जिले में मतदाता सूची से नाम हटाए जाने के विरोध में एसआईआर (SIR) में कार्यरत सात न्यायिक अधिकारियों ने कई घंटों तक घेराव किया। अधिकारियों के अनुसार, प्रदर्शनकारियों ने पहले न्यायिक अधिकारियों से मुलाकात की मांग की। प्रवेश से मना किए जाने पर उन्होंने बुधवार शाम करीब 4 बजे प्रदर्शन शुरू कर दिया और परिसर का घेराव कर लिया। अधिकारियों ने बताया कि विरोध प्रदर्शन के दौरान कार्यालय के अंदर फंसी महिलाओं में तीन महिला न्यायिक अधिकारी भी शामिल थीं।
'भाजपा की रणनीति': मालदा घटना पर ममता बनर्जी का बयान
शांति बनाए रखने की अपील करते हुए बनर्जी ने लोगों से उकसावे में न आने और शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन करने का आग्रह किया। बनर्जी ने दावा किया कि मालदा की घटना भाजपा की उस रणनीति का हिस्सा है जिसके तहत बंगाल में विधानसभा चुनाव रद्द करवाए जा सकें और राष्ट्रपति शासन लागू करवाया जा सके। रैली को संबोधित करते हुए बनर्जी ने कहा, "भाजपा में सांप्रदायिक लोग हैं और कुछ सांप्रदायिक लोग आपके बीच भी घुस आए हैं। सर्वोच्च न्यायालय की टिप्पणी का समर्थन करते हुए उन्होंने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय सही है, साथ ही उन्होंने यह भी बताया कि केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) और राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) जैसी केंद्रीय एजेंसियों ने विरोध प्रदर्शन में शामिल लोगों के खिलाफ पहले ही कार्रवाई कर दी है। मालदा घटना को राज्य की छवि को नुकसान पहुंचाने वाला बताते हुए बनर्जी ने कहा, "इस घटना ने बंगाल को बदनाम किया है। आपकी शिकायतें जायज हो सकती हैं, लेकिन कानून को अपने हाथ में न लें।" उन्होंने अधिकारियों द्वारा स्थिति को संभालने के तरीके पर भी निराशा व्यक्त की और सवाल किया कि उन्हें और कितना "अपमान" सहना पड़ेगा।