Mumbai में Marathi Test से मची खलबली, Auto-Taxi ड्राइवरों की Strike से आम जनता बेहाल

By अभिनय आकाश | Aug 25, 2026

कई दशकों से, मुंबई की मशहूर काली-पीली टैक्सी और ऑटो-रिक्शा शहर की रोज़मर्रा की ज़िंदगी का अहम हिस्सा रहे हैं और शहर की तेज़ रफ़्तार ज़िंदगी को बनाए रखने में मदद करते हैं। सिर्फ़ ऑफ़िस के व्यस्त समय में ही नहीं, बल्कि देर रात भी ये टैक्सी और ऑटो-रिक्शा शहर की परिवहन व्यवस्था का ज़रूरी हिस्सा हैं। लेकिन 21 अगस्त (शुक्रवार) से मुंबई में टैक्सी या ऑटो-रिक्शा मिलना और मीटर चालू होने की आवाज़ सुनना बहुत मुश्किल हो गया है, क्योंकि रीजनल ट्रांसपोर्ट ऑफ़िस (RTO) के अधिकारी यह जाँचने लगे हैं कि ड्राइवर मराठी बोल सकते हैं या नहीं। दक्षिण मुंबई से लेकर उत्तरी उपनगरों तक हर जगह जाँच चौकियाँ (नाके) बनाई गई हैं। जो ड्राइवर मराठी नहीं बोल पाते, उन्हें "मेमो" दिया जा रहा है। अगर एक महीने बाद भी वे ऐसा नहीं कर पाते, तो कैब या ऑटो-रिक्शा ड्राइवर के तौर पर उनका रजिस्ट्रेशन तीन महीने के लिए रद्द किया जा सकता है, जब तक कि वे मराठी के कुछ बुनियादी वाक्य न सीख लें। कम से कम, आधिकारिक नियम तो यही कहते हैं।

इसे भी पढ़ें: Navi Mumbai में FDA की बड़ी कार्रवाई, 4,710 लीटर मिलावटी दूध किया नष्ट

सोमवार को कांदिवली इलाके में ऑटो-रिक्शा और टैक्सी ड्राइवरों ने सड़क जाम कर दिया। उनका आरोप था कि मराठी भाषा के नियम को लागू करने की वजह से उन ड्राइवरों को परेशान किया जा रहा है और धमकियां दी जा रही हैं जिन्हें यह भाषा ठीक से नहीं आती। कैब ड्राइवरों ने कहा कि वे मराठी सीखने को तैयार हैं, लेकिन उनका कहना था कि अधिकारी कुछ ऐसे सवाल पूछ रहे हैं जो सरकार के ट्रेनिंग प्रोग्राम में उन्हें नहीं सिखाए गए थे। यह नियम टैक्सी और ऑटो-रिक्शा ड्राइवरों पर लागू होता है, जिसमें ओला और उबर जैसी ऐप-बेस्ड कैब सर्विस के साथ काम करने वाले ड्राइवर भी शामिल हैं। महाराष्ट्र सरकार ने कमर्शियल पैसेंजर गाड़ियों के ड्राइवरों के लिए मराठी की कामकाजी जानकारी ज़रूरी बनाने के मकसद से 'महाराष्ट्र मोटर व्हीकल रूल्स, 1989' में बदलाव किया था। 15 अगस्त को तीन महीने की मोहलत खत्म होने के बाद, 20 अगस्त से इस नियम को लागू करने का अभियान शुरू हुआ। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने सोमवार को कहा हम अपने हिंदी भाषी भाइयों को मराठी भाषा का विशेषज्ञ बनाने की कोशिश नहीं कर रहे हैं, लेकिन उन्हें भाषा का कामकाजी ज्ञान होना चाहिए... भाषा सीखने की समय-सीमा अब तीन बार बढ़ाई जा चुकी है। हमारी महायुति सरकार भाषा के आधार पर अन्याय नहीं होने देगी। 

प्रमुख खबरें

Team India के Prasidh Krishna ने बताया सफलता का मंत्र, पिच के हिसाब से की बॉलिंग

Abhishek Banerjee की याचिका पर Supreme Court का बड़ा एक्शन, सायोनी घोष-काकोली घोष समेत TMC के बागी सांसदों को नोटिस जारी

TET Exemption: तमिलनाडु विधानसभा का बड़ा प्रस्ताव, 3.2 लाख Teachers को परीक्षा से स्थायी राहत की मांग

सामने बैठे थे जयशंकर, तभी पुतिन ने मोदी के लिए क्या कहा? सब चौंके