जो Houthi देश अमेरिका की भी नहीं सुनता, वहां एक मौलाना ने कैसे रुकवा दी फांसी, इस्लामिक कानून में क्या है ब्लड मनी?

By अभिनय आकाश | Jul 17, 2025

देश की राजधानी दिल्ली से  करीब साढ़े तीन हजार किलोमीटर दूर यमन में भारतीय नर्स निमिषा प्रिया को मौत की सजा दी जानी थी। इसके लिए फांसी के लिए 16 जुलाई का वक्त मुकर्रर किया गया था। उससे ठीक तीन दिन पहले मामला देश की सर्वोच्च अदालत के पास भी पहुंचा। सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि यमन में केरल की नर्स निमिशा प्रिया की फांसी को रोकने के लिए वह कुछ खास नहीं कर सकती। यमन दुनिया के किसी भी अन्य हिस्से जैसा नहीं है। आपको तो पता ही है कि वो  दुनिया के सबसे बड़े मानवीय संकटों में से एक का सामना कर रहा है। यहां हूती का दबदबा चलता है। हूती यमन का एक शिया जैदी मिलिशिया समूह है। 2011 में तत्कालीन राष्ट्रपति अली अब्दुल्ला सालेह को सत्ता से हटाए जाने के बाद हूतियों ने राजनीतिक अस्थिरता का फायदा उठाया। उन्होंने यमन की राजधानी सना पर कब्जा कर लिया और सरकार को दक्षिण की ओर भागने पर मजबूर कर दिया। ये तो हो गया हूती और यमन के बारे में बैकग्राउंड अब वापस मुख्य मुद्दे पर आते हैं। यमन में एक तरफ फांसी की तैयारी चल रही थी तो दूसरी तरफ दिल्ली में सुप्रीम कोर्ट में इसे रुकवाने के प्रयास लगभग छिन्न होते जा रहे थे। लेकिन इन सब से इतर दिल्ली से ढाई हजार किलोमीटर और यमन से 2900 किलोमीटर दूर देश के दक्षिण राज्य केरल में एक और घटनाक्रम चल रहा था, जिसकी वजह से ये पूरी कहानी ही बदलने वाली थी। आज के एमआरआई में आपको बताएंगे कि आखिर केरल की नर्स निमिषा प्रिया कैसे दुनिया के सबसे तंगहाल देश में पहुंची, क्या हुआ ऐसा जो उन्हें सीधे फांसी की सजा सुना दी गई। 16 जुलाई को होने वाली फांसी पर रोक कैसे लगी और अब आगे किस तरह से उनकी रिहाई संभव हो सकती है। 

निमिषा प्रिया ने हत्या क्यों और कैसे की?

निमिषा प्रिया, केरल के पलक्कड़ की रहने वाली एक प्रशिक्षित नर्स हैं, जो 2008 में काम के लिए यमन गई। सना के एक सरकारी अस्पताल में नौकरी मिली और 2011 में शादी के लिए भारत लौटकर टॉमी थॉमस से विवाह किया। बेटी के जन्म के बाद पति भारत लौट आए, जबकि निमिषा ने यमन में निजी क्लीनिक खोलने का फैसला किया। नियमों के तहत उन्हें एक स्थानीय साझेदार की जरूरत थी, जिसके लिए उनकी मुलाकात महदी से हुई। इस दौरान यमन गृहयुद्ध की चपेट में था, लेकिन निमिषा ने भारत वापस न आकर वहीं रहने का निर्णय लिया। परिजनों के मुताबिक, महदी ने निमिषा की तस्वीरों से छेड़छाड़ कर उसे पत्नी बताया और पासपोर्ट जब्त कर उसे प्रताड़ित करने लगा। महदी ने क्लिनिक हथियाने की कोशिश की। इस कारण निमिषा ने उसे बेहोश करने के लिए अत्यधिक मात्रा में नशीला पदार्थ दे दिया, लेकिन उसकी मौत हो गई। आरोप लगा कि निमिषा ने बेहोशी का इंजेक्शन देकर उसकी हत्या कर दी। निमिषा ने उसके टुकड़े करके पानी की टंकी में फेंक दिए। अब वह यमन की जेल में मौत की सजा का सामना कर रही है। निमिषा प्रिया सना की जिस जेल में हैं, वह इलाका हूती विद्रोहियों के नियंत्रण में है। 

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ब्लड मनी क्या है, फांसी कैसे रुकेगी? 

निमिषा के परिवार ने बतौर ब्लड मनी 8.5 करोड़ रुपए (1) मिलियन डॉलर) देने की पेशकश की है। यमन के शरिया कानून के मुताबिक अगर पीड़ित परिवार ब्लड मनी पर राजी हो जाता है तो निमिषा प्रिया को जेल से रिहा कर दिया जाएगा। निमिषा को बचाने में दिक्कत ये हो रही है कि यमन में छूती विद्रोही एक्टिव हैं। इनकी वजह से ही यमन की राजधानी में भारत का कोई दूतावास नहीं है। 14 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान अटॉर्नी जनरल कह भी चुके हैं कि हुती विद्रोहियों ने इसे अपने सम्मान से जोड़ लिया है।

तलाल के भाई ने क्या दावा किया

तलाल के भाई ने बीबीसी को दिए इंटरव्यू में कहा कि निमिषा को माफ नहीं करेंगे और परविरा किसी भी समझौते के लिए तैयार नहीं है। खुदा के कानून के जरिए सजा होनी चाहिए और इससे कम में हम नहीं मानने वाले हैं। निमिषा प्रिया का शारिरिक मानसिक शोषण नहीं किया गया था। न ही निमिषा का पासपोर्ट जब्त किया गया और न ही उन्हें परेशान किया गया। उन दोनों ने एक दूसरे को जाना और फिर उन्होंने एक मेडिकल कॉलेज खोला। फिर उनकी शादी हुई और तीन चार साल तक वो इस रिश्ते में रहे। 

जारी है कोशिश

ग्रैंड मुफ्ती का कहना है कि यमन के सूफी स्कॉलर्स से उनके तालीम के सिलसिले के संबंध रहे हैं। उन्होंने इस मामले को देश हित में हल करने की कोशिश की, जो फिलहाल कामयाब रही है।  हूतियों के इस पसमंजर में केरल के ग्रैंड मुफ्ती शेख अबु बकर अहमद ने यमन में काफी प्रतिष्ठित सूफी इस्लामी स्कॉलर हबीब उमर बिन हफीज से निमिष प्रिया बारे में बात की। उन्होंने उत्तरी यमन के जिम्मेदार अधिकारियों से बात की, जिसके बाद दोनों पक्षों के बीच दैत या 'खून बहा' तथा अन्य विकल्पों पर सुलह कराने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं। दो साल पहले आठ हिंदुस्तानी पूर्व नेवी अफसरों पर जासूसी के आरोप में कतर में फांसी की सजा सुनाई गई थी। उस वक्त उन लोगों की भी रिहाई सुनिश्चित की गई थी।

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