By नीरज कुमार दुबे | May 08, 2026
ओडिशा की राजधानी भुवनेश्वर के बाहरी इलाके बालियंता में गुरुवार को हुई एक दिल दहला देने वाली घटना ने कानून व्यवस्था, भीड़ हिंसा और पुलिस की भूमिका को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। हम आपको बता दें कि कथित दुष्कर्म की कोशिश के आरोप में लोगों ने रेलवे पुलिस के एक कांस्टेबल की दिनदहाड़े पीट पीटकर हत्या कर दी। घटना का वीडियो सामने आने के बाद पूरे प्रदेश में सनसनी फैल गई है। मृतक की पहचान बत्तीस वर्षीय सौम्य रंजन स्वैन के रूप में हुई है, जो रेलवे पुलिस में कार्यरत होने के साथ-साथ अंशकालिक जिम प्रशिक्षक भी था। पुलिस ने मामले में चार लोगों को गिरफ्तार किया है और आगे की जांच जारी है।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार गुस्साई भीड़ ने स्वैन के हाथ पैर बांधकर उसे एक खंभे से बांध दिया और बेरहमी से पीटा। घटना दिनदहाड़े हुई और इसका वीडियो तेजी से सोशल मीडिया पर फैल गया। वीडियो में भीड़ द्वारा लगातार पिटाई किए जाने के दृश्य दिखाई देने के बाद लोगों में आक्रोश और चिंता दोनों देखने को मिल रहे हैं। यह घटना न केवल भीड़ न्याय की भयावह तस्वीर पेश करती है, बल्कि यह भी सवाल उठाती है कि कानून अपने हाथ में लेने की प्रवृत्ति समाज में कितनी तेजी से बढ़ रही है।
भुवनेश्वर के पुलिस उपायुक्त जगमोहन मीणा ने बताया कि सूचना मिलने पर पुलिस दल मौके पर पहुंचा, लेकिन तब तक स्वैन की हालत बेहद गंभीर हो चुकी थी। उन्होंने कहा कि स्वैन असामान्य और अत्यधिक आक्रामक व्यवहार कर रहा था। पुलिस के अनुसार बचाव के दौरान उसने एक पुलिसकर्मी को काट भी लिया था। बाद में उसे तत्काल कैपिटल अस्पताल ले जाया गया, जहां चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया। पुलिस ने यह भी स्पष्ट किया कि स्वैन के साथ मौजूद उसका मित्र ओम प्रकाश राउत भी वहां मौजूद था, लेकिन उस पर किसी ने हमला नहीं किया।
इस घटना के बाद दो अलग-अलग मामले दर्ज किए गए हैं। पहला मामला महिला की शिकायत के आधार पर स्वैन के खिलाफ यौन उत्पीड़न और दुष्कर्म प्रयास से संबंधित है, जबकि दूसरा मामला स्वैन की हत्या को लेकर दर्ज किया गया है। पुलिस वायरल वीडियो और अन्य साक्ष्यों के आधार पर हमलावरों की पहचान कर रही है। अब तक चार लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है और अन्य आरोपियों की तलाश जारी है।
घटना के बाद बालियंता थाना क्षेत्र में तनावपूर्ण स्थिति बनी रही। देर रात मृतक के परिजनों और पुलिस के बीच झड़प भी हुई। स्वैन की मां ने पुलिस पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि यदि पुलिस समय रहते भीड़ को रोकती तो उनके बेटे की जान बचाई जा सकती थी। उनका कहना था कि पुलिस मौके पर मूकदर्शक बनी रही और भीड़ को रोकने के लिए प्रभावी कदम नहीं उठाए गए। हालांकि पुलिस ने इन आरोपों को खारिज किया है। पुलिस उपायुक्त जगमोहन मीणा ने कहा कि पुलिस दल ने हालात को नियंत्रित करने का पूरा प्रयास किया और किसी प्रकार की लापरवाही नहीं बरती गई। पुलिस सूत्रों के अनुसार नियंत्रण कक्ष को सुबह ग्यारह बजकर दो मिनट पर सूचना मिली थी और पुलिस दल आठ मिनट के भीतर घटनास्थल पर पहुंच गया था।
घटना के बाद प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने मामले को गंभीरता से लेते हुए पुलिस महानिदेशक वाईबी खुरानिया को दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि मुख्यमंत्री ने ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए पुलिस को सतर्क रहने को कहा है।
इस पूरे मामले में एक और महत्वपूर्ण तथ्य सामने आया है। बताया जा रहा है कि वर्ष 2021 में भी स्वैन के खिलाफ कटक के महिला थाने में विवाह का झांसा देकर यौन उत्पीड़न करने का मामला दर्ज हुआ था। हालांकि उस मामले की वर्तमान स्थिति स्पष्ट नहीं हो सकी है, लेकिन इस खुलासे ने घटना को लेकर नई बहस छेड़ दी है।
बहरहाल, भुवनेश्वर की यह घटना कई गंभीर प्रश्नों को सामने लाती है। एक ओर महिलाओं की सुरक्षा और अपराध के प्रति समाज का गुस्सा दिखाई देता है, तो दूसरी ओर कानून व्यवस्था पर भरोसे की कमी और भीड़ द्वारा न्याय करने की खतरनाक मानसिकता भी उजागर होती है। विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी आरोपित को सजा देने का अधिकार केवल न्याय व्यवस्था को है। यदि भीड़ खुद फैसला करने लगेगी तो समाज में अराजकता और हिंसा का खतरा और बढ़ जाएगा।