Jammu and Kashmir Local Bodies Laws (Amendment) Bill 2024 Loksabha में पारित, OBC वर्ग को 75 साल बाद मिला न्याय

By नीरज कुमार दुबे | Feb 06, 2024

विपक्ष आजकल ओबीसी का मुद्दा खूब उठाता है लेकिन देखा जाये तो आजादी के 75 साल बाद इस समुदाय को न्याय मिल रहा है। हम आपको बता दें कि केंद्र की मोदी सरकार ने जम्मू-कश्मीर के लोगों को आज तब बड़ा तोहफा दिया जब केंद्र शासित प्रदेश में स्थानीय निकायों में अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के लिए आरक्षण सुनिश्चित करने के प्रावधान वाला विधेयक लोकसभा में ध्वनिमत से पारित हो गया। इस विधेयक के जरिये जम्मू कश्मीर पंचायती राज अधिनियम, 1989; जम्मू कश्मीर निगम अधिनियम, 2000 और जम्मू कश्मीर नगर निगम अधिनियम, 2000 में संशोधन का प्रस्ताव है। केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय द्वारा विधेयक पर चर्चा के जवाब के बाद सदन ने ‘‘जम्मू कश्मीर स्थानीय निकाय कानून (संशोधन) विधेयक, 2024’’ को ध्वनिमत से पारित कर दिया। नित्यानंद राय ने चर्चा पर जवाब के दौरान विपक्ष के उन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया कि जम्मू-कश्मीर की जनता त्राहिमाम कर रही है। उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर में ‘‘जहां जाइएगा, (प्रधानमंत्री नरेन्द्र) मोदी-मोदी के नारे और मोदी द्वारा किया जा रहा विकास’’ नजर आएगा।

इसे भी पढ़ें: Kashmir में हो रही बर्फबारी का मजा लेने के लिए देशभर से पहुँच रहे हैं सैलानी, खूबसूरत नजारा देखना चाहते हैं तो आप भी जल्द चले आइये

इससे पहले गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने ‘जम्मू-कश्मीर स्थानीय निकाय कानून (संशोधन) विधेयक, 2024’ को सदन में चर्चा और पारित कराने के लिए रखते हुए कहा, ‘‘यह पंचायत और नगर निकाय के चुनाव में ओबीसी को अधिकार देने वाला विधेयक है। इसमें ओबीसी को आरक्षण देने का प्रावधान किया गया है।’’ उनका कहना था कि यह ओबीसी की प्रगति और उन्हें न्याय दिलाने के लिए लाया गया विधेयक है। मंत्री ने कहा, ‘‘इस संशोधन के द्वारा अन्य पिछड़े वर्गों के लिए आरक्षण का प्रावधान हो सकेगा...अनुच्छेद 370 के निष्प्रभावी किए जाने के बाद पूरा संविधान लागू कर दिया गया।’’ राय ने कहा, ‘‘यह एक प्रगतिशील विधेयक है जो आजादी के 75 साल के बाद ओबीसी को न्याय देगा। 33 प्रतिशत सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी।’’ 

हम आपको यह भी बता दें कि इससे पहले विभिन्न विपक्षी दलों ने जम्मू-कश्मीर में पंचायत निकाय के चुनाव कराये जाने के साथ-साथ विधानसभा चुनाव कराने की भी पुरजोर मांग की। विधेयक पर चर्चा के दौरान सरकार ने कहा कि जम्मू-कश्मीर स्थानीय निकाय कानून में संशोधन से संबंधित विधेयक के जरिये इस केंद्रशासित प्रदेश में 75 साल बाद अन्य पिछड़े वर्गों (ओबीसी) को न्याय मिलेगा क्योंकि पंचायत एवं नगर निकायों के चुनाव में उनके लिए सीटें आरक्षित हो जाएंगी। दूसरी तरफ, विपक्ष ने सरकार से आग्रह किया कि इस केंद्रशासित प्रदेश का पूर्ण राज्य का दर्जा बहाल किया जाए और विधानसभा चुनाव कराये जाएं। विधेयक पर चर्चा की शुरुआत करते हुए कांग्रेस के जसबीर सिंह गिल ने कहा कि इस विधेयक में कई खामियां हैं। गिल के अनुसार, वित्तीय स्वतंत्रता इस व्यवस्था को चलाने के लिए जरूरी होती है, नौकरशाही का हस्तक्षेप भी इस व्यवस्था को कमजोर करता है। उन्होंने कहा कि पंचायती राज व्यवस्था राजनीतिक हस्तक्षेप से भी मुक्त होनी चाहिए। गिल ने कहा कि अल्पसंख्यकों के लिए भी प्रावधान करना चाहिए क्योंकि जम्मू-कश्मीर में सिख आबादी भी है।

भाजपा सांसद जुगल किशोर शर्मा ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार में ओबीसी लोगों को इंसाफ मिल रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि पहले की सरकारों के समय स्थानीय राजनीतिक दलों और कांग्रेस ने वोटबैंक की राजनीति की, लेकिन ओबीसी समुदाय के कल्याण के लिए कुछ नहीं किया। शर्मा ने कहा कि इस विधेयक में महिलाओं के लिए आरक्षण का भी प्रावधान किया गया है।

वाईएसआर कांग्रेस पार्टी की चिंता अनुराधा ने विधेयक का समर्थन करते हुए कहा कि उनकी पार्टी जम्मू-कश्मीर के देश के साथ पूरी तरह एकीकरण का समर्थन करती है। उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि लोकसभा और विधानसभाओं में भी ओबीसी को आरक्षण की व्यवस्था की जाए। अनुराधा ने कहा कि ओबीसी वर्ग के लिए अलग मंत्रालय का गठन किया जाना चाहिए ताकि इस वर्ग के लिए और बेहतर ढंग से काम हो सके। नेशनल कॉन्फ्रेंस के हसनैन मसूदी ने कहा कि जम्मू-कश्मीर में पंचायतों, नगर निकायों से संबंधित कानून पहले से थे और इस संशोधन विधेयक से यह बात साबित हो गई है। उन्होंने आरोप लगाया कि अनुच्छेद 370 हटाने के नाम पर लोगों को गुमराह किया जा रहा है। मसूदी ने कहा कि यह संशोधन विधेयक जम्मू-कश्मीर विधानसभा में लाया जाना चाहिए था।

तृणमूल कांग्रेस के सौगत रॉय ने कहा कि यह पहली बार है कि एक राज्य को केंद्रशासित प्रदेश में बदल दिया गया। रॉय ने कहा, ‘‘जम्मू-कश्मीर के लोगों को उनकी हालत पर छोड़ दिया जाए। हमारी मांग है कि जम्मू-कश्मीर में विधानसभा चुनाव कराया जाए।’’ उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर की पूर्ण राज्य की बहाली की जाए।

राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी की सुप्रिया सुले ने कहा कि गृह मंत्री ने सदन में वादा किया था कि जम्मू-कश्मीर में चुनाव कराया जाएगा। उन्होंने कहा कि अब सरकार को चुनाव की समय-सीमा बतानी चाहिए। राकांपा सांसद ने सरकार से यह आग्रह भी किया कि जम्मू-कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्जा दिया जाए। उन्होंने कहा कि लद्दाख भी विधायी व्यवस्था की मांग कर रहा है और सरकार को बताना चाहिए कि इस बारे में उसने क्या सोचा है। सुले ने कहा कि महाराष्ट्र में आरक्षण को लेकर आंदोलन हो रहे हैं और ऐसे में आरक्षण पर सरकार को राष्ट्रीय स्तर पर नीति लानी चाहिए।

प्रमुख खबरें

मैं भी हूं Brij Bhushan की Victim, कुश्ती में कमबैक के ऐलान के साथ Vinesh Phogat का बड़ा खुलासा

Delhi AC Blast में 9 की मौत! इन वजहों से एसी बनता है टाइम बम, ये 5 गलतियां कभी न करें

Supreme Court से राहत के बाद Pawan Khera का Delhi में भव्य स्वागत, बोले- संविधान जीता, दमनकारी मशीनरी हारी

Vivek Vihar Fire Tragedy: सुरक्षा ही बनी 9 लोगों का काल, ग्रिल और बंद ताले ने बनाया इमारत को मौत का चैंबर