कोरोना प्रकोप की आर्थिक सहायता से 21 लाख श्रमिक छूटे, नर्मदा बचाओ आंदोलन ने लिखा मुख्यमंत्री को पत्र

By दिनेश शुक्ल | Apr 27, 2020

भोपाल। कोरोना के प्रकोप के कारण राज्य के पंजीकृत निर्माण मजदूरों को राज्य सरकार द्वारा दी गयी आर्थिक सहायता के मामले में नर्मदा बचाओ आन्दोलन ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर चौकाने वाला तथ्य सामने लाया है कि राज्य सरकार इस आर्थिक सहायता में 21 लाख से अधिक पंजीकृत मजदूरों को छोड़ दिया है। आन्दोलन ने मांग की है इन सभी मजदूरों को भी सहायता राशि दी जाये और साथ रु 1000 प्रति परिवार की सहायता को बढाकर रु 5000 प्रति परिवार किया जाये। नर्मदा बचाओ आन्दोलन के आलोक अग्रवाल ने मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को लिखे पत्र में बताया कि लोकसभा में दिनांक 11 फरवरी 2019 को केंद्रीय श्रम एवं रोजगार राज्यमंत्री संतोष कुमार गंगवार द्वारा एक लिखित जवाब में यह बताया गया है कि मध्यप्रदेश में पंजीकृत भवन एवं अन्य संनिर्माण कामगारों की संख्या 29,96,227 है। यह सभी श्रमिक “भवन एवं अन्य संनिर्माण कामगार (नियोजन व् सेवा शर्तों का विनियम) अधिनियम, 1996” की धारा-12 के तहत “राज्य भवन एवं अन्य संनिर्माण कामगार कल्याण बोर्ड” के साथ पंजीकृत हैं।

 

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 परन्तु सरकार द्वारा दी गयी जानकारी के अनुसार 30 मार्च को मात्र 8,85,089 पंजीकृत श्रमिकों को ही आर्थिक सहायता दी गई है. इस प्रकार 21,11,138 पंजीकृत श्रमिक इस आर्थिक सहायता से छूट गए हैं। उन्होंने अनुरोध किया है कि इन श्रमिकों को भी तत्काल आर्थिक सहायता प्रदान की जाए। अग्रवाल ने पत्र में उल्लेखित किया है कि लॉक डाउन के 34 दिन बीत चुके हैं और यह न्यूनतम 6 दिन और रहेगा. इसके और आगे बढ़ने की भी संभावनाएं हैं. इस महंगाई के दौर में ₹1000 से कोई भी परिवार इतने दिन गुजर बसर नहीं कर सकता है. अतः उन्होंने अनुरोधकिया है कि इस राशि को ₹1000 प्रति परिवार से बढ़ाकर ₹5000 प्रति परिवार की जाए। अग्रवाल ने अपने पत्र में लिखा कि “भवन एवं अन्य संनिर्माण कामगार (नियोजन व् सेवा शर्तों का विनियम) अधिनियम, 1996” कानून के तहत मजदूरों के कल्याण के लिए उपकर एकत्र किया जाता है. इसकी बड़ी राशि सभी राज्य सरकारों के पास उपलब्ध है।

 

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केंद्रीय श्रम एवं रोजगार राज्यमंत्री संतोष कुमार गंगवार ने 25 मार्च को सभी राज्य सरकारों को कहा है कि इस कानून के तहत मजदूरों के कल्याण के लिए एकत्र किये गये उपकर से तत्काल मजदूरों को सहायता दी जाये। गंगवार ने बताया है कि देश भर में पंजीकृत 3.5 करोड़ मजदूरों के लिए उपकर के 52,000 करोड़ रूपये सरकारों के पास उपलब्ध है, अर्थात प्रति मजदूर लगभग 15,000 रु की राशि सरकारों के पास उपलब्ध है। अतः इस उपकर की राशि में से लगभग 30 लाख पंजीकृत श्रमिक परिवारों को 5000 रु/परिवार की दर से 1500 करोड़ों रुपया की सहायता आसानी से दी जा सकती है। बाद में जरुरत पड़ने पर अतिरिक्त राशि भी दी जा सकती है। पत्र में आग्रह किया है कि सरकार समस्त लगभग 30 लाख श्रमिकों को 5000 रु प्रति परिवार की राशि तत्काल प्रदान की जाये।


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