Prabhasakshi Newsroom: 'राष्ट्र निर्माण ही संघ का ध्येय', PM मोदी ने RSS के 100 साल के सफर को सराहा

By अंकित सिंह | Oct 01, 2025

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के शताब्दी समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि झूठे मुकदमे दर्ज करने या प्रतिबंध लगाने के प्रयासों के बावजूद, संगठन ने कभी भी कटुता नहीं रखी। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि आरएसएस के खिलाफ झूठे मुकदमे दर्ज करने, उन पर प्रतिबंध लगाने के प्रयासों और अन्य चुनौतियों के बावजूद, संगठन कभी भी कटुता नहीं रखता, क्योंकि हम उस समाज का हिस्सा हैं जहाँ हम अच्छे और बुरे दोनों को स्वीकार करते हैं।

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उन्होंने कहा कि ऐसे महान पर्व पर 100 वर्ष पूर्व राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना ये कोई संयोग नहीं था। ये हजारों वर्षों से चली आ रही उस परंपरा का पुनरुत्थान था। जिसमें राष्ट्र चेतना, समय समय पर उस युग की चुनौतियों का सामना करने के लिए नए-नए अवतारों में प्रकट होती है। इस युग में संघ उसी अनादि राष्ट्र चेतना का पुण्य अवतार है। उन्होंने कहा कि ये हमारी पीढ़ी के स्वयंसेवकों का सौभाग्य है कि हमें संघ के शताब्दी वर्ष जैसा महान अवसर देखने को मिल रहा है। मैं आज इस अवसर पर राष्ट्र सेवा को समर्पित कोटि-कोटि स्वयंसेवकों को शुभकामनाएं देता हूं, अभिनंदन करता हूं। संघ के संस्थापक, हम सभी के आदर्श परम पूज्य डॉ. हेडगेवार जी के चरणों में श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं। 

प्रधानमंत्री ने कहा कि संघ की 100 वर्ष की इस गौरवमयी यात्रा की स्मृति में आज भारत सरकार ने विशेष डाक टिकट और स्मृति सिक्के जारी किए हैं। 100 रुपए के सिक्के पर एक ओर राष्ट्रीय चिन्ह है और दूसरी ओर सिंह के साथ वरद-मुद्रा में भारत माता की भव्य छवि है। उन्होंने कहा कि भारतीय मुद्रा पर भारत माता की तस्वीर संभवत: स्वतंत्र भारत के इतिहास में पहली बार ऐसा हुआ है। इस सिक्के के ऊपर संघ का बोध वाक्य भी अंकित है- राष्ट्राय स्वाहा, इदं राष्ट्राय इदं न मम। उन्होंने कहा कि संघ के स्वयंसेवक... जो अनवरत रूप से देश की सेवा में जुटे हैं, समाज को सशक्त कर रहे हैं। इसकी भी झलक इस डाक टिकट में है। मैं इन स्मृति सिक्कों और डाक टिकट के लिए देशवासियों को बहुत बहुत बधाई देता हूं।

मोदी ने कहा  कि 1963 में RSS के स्वयंसेवक भी 26 जनवरी की परेड में शामिल हुए थे। उन्होंने बहुत आन-बान-शान से राष्ट्रभक्ति की धुन पर कदमताल किया था। जिस तरह विशाल नदियों के किनारे मानव सभ्यताएं पनपती हैं, उसी तरह संघ के किनारे भी और संघ की धारा में भी सैकड़ों जीवन पुष्पित, पल्लवित हुए हैं। अपने गठन के बाद से ही राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ विराट उद्देश्य लेकर चला। ये उद्देश्य रहा- राष्ट्र निर्माण। उन्होंने दावा किया कि संघ के बारे में कहा जाता है कि इसमें सामान्य लोग मिलकर असामान्य और अभूतपूर्व कार्य करते हैं। व्यक्ति निर्माण की ये सुंदर प्रक्रिया हम आज भी संघ की शाखाओं में देखते हैं। संघ शाखा का मैदान एक ऐसी प्रेरणा भूमि है, जहां स्वयंसेवक की अहं से वयं तक की यात्रा शुरु होती है। संघ की शाखाएं व्यक्ति निर्माण की यज्ञ वेदी है।

नरेंद्र मोदी ने कहा कि राष्ट्र निर्माण का महान उद्देश्य... व्यक्ति निर्माण का स्पष्ट पथ... शाखा जैसी सरल, जीवंत कार्यपद्धति... यही संघ की सौ वर्षों की यात्रा का आधार बने। संघ ने कितने ही बलिदान दिये। लेकिन भाव एक ही रहा -राष्ट्र प्रथम... लक्ष्य एक ही रहा -'एक भारत, श्रेष्ठ भारत'।

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