By अनुराग गुप्ता | Feb 14, 2022
जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री और पीडीपी प्रमुख महबूबा मुफ्ती ने केंद्र की मोदी सरकार पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने गुपकर आवास पर एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए कहा कि जम्मू-कश्मीर एक राजनीतिक मुद्दा है और अनुच्छेद 370 को वापस लेने से यह मुद्दा और जटिल हो गया है।
आपको बता दें कि 5 अगस्त, 2019 को केंद्र की मोदी सरकार ने जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 के कुछ प्रावधानों को समाप्त कर जम्मू-कश्मीर को दो केंद्रशासित प्रदेशों- जम्मू-कश्मीर और लद्दाख का स्वरूप दे दिया था। जिसको लेकर लगातार घाटी की सियासत गर्माती रही है। इतना ही नहीं घाटी के नेता लगातार मांग करते रहे हैं कि जम्मू-कश्मीर का पूर्ण राज्य का दर्जा फिर से बहाल किया जाए। हालांकि केंद्र सरकार ने भी कई दफा स्पष्ट किया है कि स्थिति सामान्य होने पर जम्मू-कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्जा वापस दे दिया जाएगा।
पीडीपी प्रमुख ने कहा कि केंद्र-शासित प्रदेश में स्थिति दिन-ब-दिन बदतर होती जा रही है या बदतर बनाई जा रही है और लोगों को 5 अगस्त, 2019 के बाद से कई कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है, जब केंद्र सरकार ने अनुच्छेद-370 को निष्प्रभावी बना दिया था। उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर के लोगों के अधिकारों, भारतीय संविधान द्वारा प्रदत्त गारंटी, को रौंदने का प्रयास किया जा रहा है। परिसीमन आयोग की रिपोर्ट उसी का हिस्सा है और इसमें कोई नई बात नहीं है। यह लोगों को कमजोर करने की कोशिश भी है।
इसी बीच महबूबा मुफ्ती ने कहा कि भाजपा के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार के पास कश्मीर सहित तमाम मुद्दों के समाधान के लिए पाकिस्तान से बात करने के अलावा कोई दूसरा विकल्प नहीं है।
क्या कश्मीर के हालात हैं खराब ?
पीडीपी प्रमुख ने कहा कि कश्मीर के हालात पहले से भी ज्यादा खराब हैं। कोई भी सुरक्षित महसूस नहीं कर रहा है। चाहे वो आम आदमी हो या पत्रकार। पत्रकारिता को एक अपराध के रूप में देखा जाता है और सच्चाई का गला घोंटा जा रहा है। सज्जाद गुल, फहद शाह और अन्य सहित कई पत्रकार सलाखों के पीछे हैं। कई एफआईआर में नाम आने के बाद कश्मीर से भाग गए हैं। ऐसी परिस्थितियों में चीजें कैसे काम कर सकती हैं और सच्चाई की जीत होती है। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय निकायों से कश्मीर में गिरफ्तार पत्रकारों की तत्काल रिहाई के लिए आवाज उठाने का आग्रह किया।
आपको बता दें कि संसद के बजट सत्र के पहले चरण के आखिरी दिन कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने लोकसभा में पत्रकारों की गिरफ्तारी का मुद्दा उठाया था। उस वक्त उन्होंने जानकारी दी थी कि मैंने संसद में प्रेस की आजादी का मुद्दा उठाया है। पत्रकारों को अपना काम करने के आरोप में गिरफ्तार किया जा रहा है। 2 कश्मीरी पत्रकारों को गिरफ्तार किया गया है। यह वाकई खतरनाक स्थिति है। सरकार को पत्रकारों को रिहा करना चाहिए और उन्हें अपना काम करने देना चाहिए। गिरफ्तार किए गए 2 कश्मीरी पत्रकारों में से एक फहद शाह साप्ताहिक ऑनलाइन पत्रिका 'द कश्मीरवाला' के संस्थापक संपादक हैं।