नेताजी सुभाष चंद्र बोस के भीतर बाल्यकाल से ही देश के लिए कुछ कर गुजरने का जज्बा था

By अमृता गोस्वामी | Jan 23, 2021

भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में कई महापुरूषों ने अपना योगदान दिया था जिनमें सुभाष चंद्र बोस का नाम भी अग्रणी है। सुभाष चन्द्र बोस ने भारत के लिए पूर्ण स्वराज का सपना देखा था। भारत को परतंत्रता की बेड़ियों से मुक्त कराने के लिए किए उनके आंदोलन की वजह से सुभाष को कई बार जेल भी जाना पड़ा। द्वितीय विश्वयुद्ध के दौरान उन्होंने अंग्रेजों के खिलाफ लड़ाई को तेज करने के लिए आजाद हिन्द फौज का गठन किया था।

आज सुभाषचन्द्र बोस की जयंती पर आइए जानते हैं उनके जीवन से जुड़े कुछ ऐसे प्रसंगों को जो हम सबके लिए भी प्रेरणादायी हैं।

इसे भी पढ़ें: History Revisited: क्या नेताजी सुभाष चंद्र ही थे गुमनामी बाबा

सुभाष चंद्र बोस के घर के सामने एक भिखारिन रहती थी जिसे दो समय की रोटी भी नसीब नहीं थी। उसकी दयनीय हालत देखकर सुभाष को बहुत दुःख होता था। उस भिखारिन के पास घर भी नहीं था जहां वह खुद को सर्दी, बारिश और धूप से बचा पाती। सुभाष ने प्रण किया कि यदि हमारे समाज में एक भी व्यक्ति ऐसा है जो अपनी आवश्यकताएं पूरी नहीं कर सकता तो मुझे भी सुखी जीवन जीने का क्या अधिकार है, मैं जैसे भी हो ऐसे लोगों की मदद करूंगा। इसके बाद सुभाष ने कॉलेज जाने के लिए मिलने वाले जेब खर्च व किराए को बचाकर उस भिखारिन की मदद शुरू की। सुभाष का कॉलेज उनके घर से 3 कि.मी. दूर था जहां तक पैदल जाकर सुभाष वहां तक का किराया और जेब खर्च बचाकर भिखारिन की मदद करते थे। 

सुभाष चन्द्र बोस पढ़ाई में बहुत होशियार थे, सारे विषयों में उनके अच्छे अंक आते थे किन्तु  बंगाली भाषा में वह कुछ कमजोर थे। बाकी विषयों की अपेक्षा बंगाली मे उनके अंक कम आते थे। सुभाषचंद्र बोस ने मन ही मन निश्चय किया कि वह अपनी भाषा बंगाली सही तरीके से जरूर सीखेंगे। इसके लिए कड़ी मेहनत कर कुछ ही समय में उन्होंने बंगाली भाषा में महारथ हासिल कर ली। इस बार परीक्षा में वे सिर्फ कक्षा में ही प्रथम नहीं आये बल्कि बंगाली भाषा में भी उन्होंने सबसे अधिक अंक प्राप्त किये। जब सुभाष से उनके शिक्षक ने पूछा कि यह कैसे संभव हुआ? तब सुभाष बोले-यदि मन लगाकर एकाग्रता से मेहनत की जाए तो इंसान कुछ भी हासिल कर सकता है।

इसे भी पढ़ें: History Revisited: नेताजी: कटक से मिथक तक...

बात सुभाषचन्द्र के बचपन की है जब वे कटक के प्रोटेस्टेंट यूरोपियन स्कूल में प्रारंभिक शिक्षा ग्रहण कर रहे थे। इस स्कूल में अंगे्रज विद्यार्थी भी थे जिनसे भारतीय बच्चे डरे हुए थे। एक दिन स्कूल के मध्यावकाश  में अंग्रेज विद्यार्थी मैदान में खेल रहे थे, वहीं स्वदेशी विद्यार्थी एक पेड़ के नीचे बैठे थे। सुभाष चन्द्र बोस ने स्वदेशी विद्यार्थियों से पूछा-तुम क्यों नहीं खेल रहे। स्वदेशी विद्यार्थियों ने कहा-अंग्रेज बच्चे हमें मारते हैं, खेलने नहीं देते। सुभाष चन्द्र ने कहा-क्या तुम्हारे पास हाथ नहीं हैं, निकालो गेंद और उछालो मैदान में। सभी बच्चे डरे-सहमे थे किन्तु सुभाष के साथ वे सभी खेलने के लिए मैदान में दौड़ पड़े। तब अंग्रेज विद्यार्थियों और भारतीय विद्यार्थियों में काफी झगड़ा हुआ। स्कूल प्रशासन को जब पता चला यह सब सुभाषचन्द्र बोस के नेतृत्व में हो रहा है तो स्कूल प्राचार्य ने सुभाष के पिता को पत्र लिखा कि आपका पुत्र पढ़ाई में अच्छा है किन्तु गुटबाजी कर स्कूल के बच्चों के साथ झगड़ा करता है] उसे समझाइए। पिताजी ने जब सुभाष से पूछा तो सुभाष ने कहा- पिताजी, ऐसा कीजिए आप भी प्राचार्य को एक पत्र लिख दें कि वह अंग्रेज बच्चों को समझाएं कि यदि बिना वजह अंग्रेज विद्यार्थी हम भारतीय विद्यार्थियों से लड़ाई करेंगे, मारेंगे तो उन्हें इसका करारा जवाब मिलेगा। 

तो ऐसे थे भारत की स्वतंत्रता संग्राम के महानायक सुभाष चन्द्र बोस जिनका नाम इतिहास के पन्नों पर अमर है। 

अमृता गोस्वामी

प्रमुख खबरें

Spying Scandal ने Southampton को डुबोया, Playoff Final से बाहर, Players भी करेंगे केस

Wimbledon से पहले Tennis जगत को बड़ा झटका, Injury के कारण Carlos Alcaraz टूर्नामेंट से बाहर

Rome में PM Modi का Giorgia Meloni ने किया ग्रैंड वेलकम, Melodi की दोस्ती फिर हुई Viral

IPL Playoffs से पहले RCB को मिला बूस्टर डोज, इंग्लैंड के Phil Salt की होगी वापसी