By अभिनय आकाश | Jan 24, 2026
25 से 27 जनवरी तक यूरोपीय संघ के नेताओं की राजकीय यात्रा से पहले, विदेश मामलों और सुरक्षा नीति की उच्च प्रतिनिधि और यूरोपीय आयोग की उपाध्यक्ष काजा कल्लास ने कहा कि भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौता एक रणनीतिक विकल्प है और इससे चीन, रूस और अमेरिका पर निर्भरता कम करने का अवसर मिलता है। द इंडियन एक्सप्रेस को दिए एक विशेष साक्षात्कार में एस्टोनिया की पूर्व प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री के समकक्ष पद पर आसीन कल्लास ने कहा कि यूरोपीय संघ और भारत 27 जनवरी को भारत-यूरोपीय संघ के नेताओं के शिखर सम्मेलन में एक नए सुरक्षा और रक्षा साझेदारी समझौते पर हस्ताक्षर करेंगे। वह स्वयं इस शिखर सम्मेलन में भाग लेंगी। दोनों 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस समारोह में मुख्य अतिथि होंगे और 27 जनवरी को शिखर सम्मेलन में भाग लेंगे।
यूरोपीय आयोग की उपाध्यक्ष काजा कल्लास ने भारत संग बढ़ते संबंधों पर कहा कि हमने संवाद और सहयोग से शुरुआत की और आज हम व्यापार, सुरक्षा और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में मिलकर काम करते हैं। गणतंत्र दिवस समारोह में यूरोपीय संघ के नेतृत्व को दिया गया निमंत्रण हमारे लिए बहुत सम्मान की बात है और सच्चे विश्वास को दर्शाता है। भारत अब केवल एक महत्वपूर्ण साझेदार नहीं है, बल्कि एक प्रमुख रणनीतिक साझेदार है। यह एक गुणात्मक परिवर्तन है।
समाचारों को देखकर ही पता चलता है कि दुनिया अधिक खतरनाक होती जा रही है, इसलिए यूरोपीय संघ और भारत के बीच रक्षा सहयोग को और मजबूत करना स्वाभाविक कदम है। वैश्विक परिस्थितियों को देखते हुए यूरोपीय संघ और भारत दोनों ही रक्षा खर्च बढ़ा रहे हैं। अगले मंगलवार को यूरोपीय संघ और भारत एक नए सुरक्षा एवं रक्षा समझौते पर हस्ताक्षर करेंगे। इससे समुद्री सुरक्षा, आतंकवाद विरोधी अभियान और साइबर रक्षा जैसे क्षेत्रों में हमारा सहयोग बढ़ेगा।
कल्लास का मानना है कि मुक्त व्यापार समझौता 2 अरब लोगों के लिए एक बाजार का निर्माण करेगा, जो वैश्विक जीडीपी का लगभग एक चौथाई हिस्सा है। यह समझौता निवेश और विकास को बढ़ावा देगा, आपूर्ति श्रृंखलाओं को मजबूत करेगा और दोनों पक्षों की कंपनियों के लिए नए अवसर खोलेगा। यह चीन, रूस और संयुक्त राज्य अमेरिका पर निर्भरता कम करने का भी मौका प्रदान करता है। ऐसे समय में जब मुक्त व्यापार दबाव में है और आपूर्ति श्रृंखलाओं का दुरुपयोग किया जा रहा है, हमारी आर्थिक साझेदारी को गहरा करना पूरी तरह से तर्कसंगत है। यह समझौता एक रणनीतिक विकल्प है।