विकास के भारतीय मॉडल को दुनिया अपनाये, इस दिशा में काम कर रहे हैं मोदी

By संतोष पाठक | Jun 28, 2019

राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर हुई चर्चा का जवाब देते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कई ऐसी बातें कहीं जिससे यह आभास हो रहा है कि खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने दूसरे कार्यकाल को एक नए रास्ते पर ले जाना चाहते हैं। मोदी सरकार 2.0 में अब भारत के लिए ऐसे मॉडल को विकसित करने का प्रयास होगा जो पूरी तरह से भारतीय हो और दुनियाभर में भारतीय मॉडल के रूप में जाना जाए। सबसे बड़ी बात यह है कि यह मॉडल किसी पार्टी विशेष का नहीं होगा बल्कि भारत का होगा, सिर्फ भारत का होगा। इस नए मॉडल में विकास का एजेंडा तो सर्वोपरि होगा ही लेकिन इसके लिए किसी अन्य देश के रास्ते का अनुसरण बिल्कुल नहीं किया जाएगा।

चुनाव बीत गया अब काम की बात कीजिए

चुनावी रैलियों के दौरान नरेंद्र मोदी, अमित शाह समेत बीजेपी के तमाम छोटे-बड़े और दिग्गज नेता जवाहर लाल नेहरू, इंदिरा गांधी और राजीव गांधी की जमकर आलोचना करते नजर आते थे। मंगलवार को भी लोकसभा में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर हुई चर्चा का जवाब देने के लिए खड़े हुए पीएम मोदी ने देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू को याद किया लेकिन इस बार याद करने का संदर्भ और तरीका कुछ और ही था। मोदी का यह भाषण कई लोगों के लिए चौंकाने वाला था। जिस समय मोदी लोकसभा में नेहरू के कथन से सीख लेने की सलाह दे रहे थे उस समय सदन में अमित शाह, राजनाथ सिंह समेत बीजेपी के तमाम बड़े नेता और सांसद मौजूद थे। विरोधी दलों के दिग्गज नेताओं की मौजूदगी में दिया गया मोदी का यह भाषण चर्चा का विषय बन गया। यह विरोधी दलों के साथ-साथ बीजेपी के नेताओं के लिए भी एक सबक था कि चुनाव बीत गया अब आलोचना की बजाय काम पर ध्यान दीजिए। इसके कुछ घंटे बाद ही बीजेपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता और राज्यसभा सांसद जीवीएल नरसिम्हा राव कांग्रेस के पूर्व प्रधानमंत्रियों के बारे में दिए गए अपने बयान को राज्यसभा में वापस लेते नजर आए।

संसद में जवाहर लाल नेहरू को पीएम मोदी ने किया याद

पीएम मोदी ने 17वीं लोकसभा में दिए अपने पहले ही भाषण में देश के पहले प्रधानमंत्री नेहरू की कर्तव्यों को प्राथमिकता देने की बात को याद करते हुए नये भारत के निर्माण के सपने को पूरा करने के लिये सभी से कर्तव्य के मार्ग पर चलने का आह्वान किया। चुनावी रैलियों से लेकर पिछले कार्यकाल में संसद में दिए भाषणों तक नेहरूदृगांधी परिवार के प्रति आमतौर पर आलोचनात्मक रुख रखने वाले नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को निचले सदन में 14 जुलाई 1951 के पंडित नेहरू के वक्तव्य का जिक्र करते हुए तमाम लोगों से यह आह्वान किया। देश के प्रथम आम चुनाव से पहले घोषणापत्र जारी करते हुए पंडित जवाहर लाल नेहरू ने उस समय कहा था कि दुनिया को भारत की सीख यह है कि यहां सबसे पहले कर्तव्य आते हैं और कर्तव्य से ही अधिकार निकलते हैं। आज के आधुनिक एवं भौतिकतावादी विश्व में जहां हर जगह टकराव दिखाई देता है, वहां हर कोई अधिकारों एवं सुविधा की बात करता है, शायद ही कोई अपने कर्तव्य की बात करता हो। यही टकराव की वजह है। प्रधानमंत्री ने कहा कि यह वास्तविकता है और बड़ा दर्शन है। उन्होंने कहा कि जिस महापुरूष ने यह बात कही, उनकी बात को भुला दिया गया। यह बात महापुरूष पंडित जवाहर लाल नेहरू ने 14 जुलाई 1951 को कही थी। 

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नेहरू, अंबेडकर, लोहिया और दीनदयाल उपाध्याय के सपनों का भारत

देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू के भाषण से सीख लेने की सलाह देने के साथ-साथ मोदी ने बाबा साहेब अंबेडकर का भी नाम लेते हुए जल समस्या के संदर्भ में उनके कथन को याद किया। आमतौर पर बाबा साहेब अंबेडकर को दलित आरक्षण के संदर्भ में ही याद किया जाता है लेकिन यह बहुत कम लोग जानते हैं श्रम कानूनों से लेकर अन्य कई क्षेत्रों में बाबा साहेब अंबेडकर ने कई उल्लेखनीय काम किए हैं और कानून बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। नेहरू के कट्टर राजनीतिक विरोधी रहे राम मनोहर लोहिया को भी पानी और महिलाओं के उत्थान के संदर्भ में याद करते हुए मोदी ने कहा कि हम इन तमाम महापुरूषों के सपनों का भारत बनाने के लिए काम कर रहे हैं। सदन के पटल पर खड़े होकर यह कहना कि विचारधारा भले ही जो रही हो लेकिन हम देश में अब तक काम कर चुके तमाम महापुरूषों के विजन को एक साथ लेकर काम करेंगे, बड़ी बात है। अगर वाकई मोदी ऐसा कर पाने में कामयाब हो पाते हैं तो यह भारतीय शासन प्रणाली के लिए सबसे अनोखी बात होगी जहां सरकारों के बदलने के साथ ही केवल मंत्रियों या अधिकारियों के चेहरे ही नहीं बदलते बल्कि सरकार की नीतियां और प्राथमिकताएं भी बदल जाती हैं।

   

विकास का भारतीय मॉडल

हालांकि तमाम महापुरूषों को याद करते हुए मोदी ने यह भी साफ कर दिया कि अब भारत विकास के अपने मॉडल पर चलेगा। भारत नेहरू के दौर की तरह रूस के आर्थिक विकास के मॉडल पर नहीं चलेगा। न ही भारत नरसिम्हा राव-मनमोहन सिंह के दौर की तरह अमेरिकी मॉडल का अनुसरण करेगा। चीन के विकास की तारीफ करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने यह भी साफ कर दिया कि मेक इन इंडिया जैसे अभियान के सहारे अब भारत विकास का अपना खुद का मॉडल विकसित करेगा। जाहिर-सी बात है कि अगर भारत अपने मॉडल के साथ तेज गति से विकास की कहानी लिख पाने में कामयाब हो पाता है तो दुनिया के कई देश इसी भारतीय मॉडल का अनुसरण करेंगे क्योंकि हमारा मॉडल लोकतांत्रिक परंपराओं के साथ जुड़ा होगा। हालांकि यह एक ऐसा सपना है जिसे साकार करने के लिए जमीनी धरातल पर काफी कुछ करना होगा।

-संतोष पाठक

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