कांग्रेस की स्थिति 'रस्सी जल गयी, पर ऐंठन नहीं गई' जैसी हो गयी है

By प्रभात झा | Publish Date: Jun 27 2019 10:41AM
कांग्रेस की स्थिति 'रस्सी जल गयी, पर ऐंठन नहीं गई' जैसी हो गयी है
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इन दो दिनों की बहस में जो कुछ देखने को मिला उससे लगता है कि विपक्ष जनादेश से कोई सबक नहीं लेना चाहता है। उलटे वह पूरी तरह से जनता को दोषी मान रहे हैं और अपनी बहस के भाषणों में कांग्रेस सहित अन्य विपक्षी दल भी उसी रास्ते पर चल रहे हैं।

राष्ट्रपति के अभिभाषण पर दोनों सदनों में चर्चा शुरू हुई। यह पहली बार नहीं बल्कि संसद में यह बरसों की परम्परा है। अभिभाषण पर चर्चा में दोनों सदनों में सत्ता पक्ष और विपक्ष के सदस्य भाग लेते हैं। इस बार भाजपा नीत एनडीए भारी मतों से जीतकर आया। सन् 2019 के जनादेश में एक नहीं अनेक सन्देश सभी के लिए थे। जो समझना चाहे, वह समझे, जो नहीं समझना चाहते वह नहीं समझे। हम वर्षों से संसद में राष्ट्रपति अभिभाषण पर चर्चा सुन रहे हैं और भाग भी लेते रहे। इन दो दिनों की बहस में जो कुछ देखने को मिला उससे लगता है कि विपक्ष जनादेश से कोई सबक नहीं लेना चाहता है। उलटे वह पूरी तरह से जनता को दोषी मान रहे हैं और अपनी बहस के भाषणों में कांग्रेस सहित अन्य विपक्षी दल भी उसी रास्ते पर चल रहे हैं।
 
लोकसभा और राज्यसभा में दो दिन से राष्ट्रपति अभिभाषण पर चर्चा चल रही थी। हम सत्ता और विपक्ष के नेताओं को बहुत ध्यान से सुन रहे थे। सदन के माध्यम से दोनों सदनों को देश भी सुन रहा था। देश का 'विवेक' और देश के 'जन का विवेक' सामान्य नहीं होता है। वह बहुत ही असामान्य होता है। हम लाख सोचें कि हमारा विवेक सबसे अच्छा है पर सच्चाई यह है कि जनतंत्र में 'जन विवेक' ही सबसे बड़ा विवेक होता है। परसों 25 जून था। 25 जून सन् 1975 को देश में कांग्रेस ने आपातकाल लागू किया था। इस दौरान देश की जनता अपने घर में भी जोर से नहीं बोल सकती थी। जब आपातकाल के बाद सन् 1977 में लोकसभा चुनाव हुआ तो तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी तक चुनाव हार गयीं। जनतंत्र में जनविवेक का इससे बड़ा उदाहरण कहीं देखने को नहीं मिला।
लोकसभा में पहली बार आये ओडिशा के सांसद, राज्यमंत्री प्रताप चन्द्र सारंगी ने अभिभाषण पर प्रारंभिक चर्चा शुरू की। सादा जीवन और उच्च विचारों पर सदैव चलने वाले सारंगी ने अभिभाषण में कही गयी बातों पर विस्तृत चर्चा की। उन्होंने अपने भाषण में विनम्रता से राष्ट्रपति के अभिभाषण पर अपने विचार रखे। उन्होंने सदन को बताया कि भाजपा को और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को यह जनादेश क्यों और कैसे मिला। भाजपा की जीत के कारणों पर भी बड़ी विनम्रता से विषय रखा। गत पांच वर्षों में देश के विकास की भी चर्चा की। वहीं राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव का समर्थन किया।  
 
एक आदिवासी युवा डॉ. हिना विजय गावित (महाराष्ट्र) जब बोल रही थीं तो लग रहा था कि भारत का जनतंत्र बहुत परिपक्व हो गया है और आज़ादी के बाद अब सुदूर आदिवासी इलाकों में भी मोदी सरकार की योजनाएं सिर्फ पहुंच ही नहीं गयी है बल्कि धरती पर उसका प्रभाव भी दिखाई दे रहा है। डॉ. हिना जब अपने संसदीय क्षेत्र का वर्णन कर रही थीं तो लग रहा था कि भारत का गरीब अब विकास की ओर जाना चाहता है और वह गरीबी पर रोने के बजाय इसे दूर करने की दिशा में सरकार के साथ कदम से कदम मिलाकर चलना चाहता है।


 
दूसरी तरफ जब कांग्रेस और अन्य विपक्षी दल के नेता बोलने के लिए खड़े हुए तो ऐसा लग रहा था कि 'रस्सी जल गयी पर अभी ऐंठन नहीं गयी'। उलटे वे ऐसा जता रहे थे कि भारत की परिपक्व जनता ने बहुत बड़ी गलती कर दी। कांग्रेस के नेताओं के मन में जनादेश को सम्मान करने का साहस उनके राष्ट्रपति के अभिभाषण के चर्चा में दिए गए भाषणों में नहीं देखा गया। आज स्थिति यह है कि लोग देखना चाहते हैं कि जनादेश के बाद विपक्षी दल खासकर कांग्रेस, बसपा और सपा में कुछ समझ आई होगी। पर वह सब देखने को नहीं मिला। हताश और निराश विपक्ष जनादेश को स्वीकारने में भी हिचकिचा रहा है। कमोबेश सभी विपक्षी दलों की स्थिति जस की तस थी।
राज्यसभा की तरफ नजर डालें तो देखेंगे कि वहां पर भाजपा के कार्यकारी अध्यक्ष जगत प्रकाश नड्डा ने अपनी प्रस्तावना में साफ़ तौर पर कहा कि हमने जन-जन के लिए जो काम किया उसी के आधार पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को देश में जन-जन का सहयोग मिला। नड्डा जी ने साफ़ तौर पर कहा कि देश ने नरेंद्र मोदी के साथ चलने का रास्ता तय किया। अपने 50 मिनट के भाषण में उन्होंने जनादेश मिलने के कारणों पर भी प्रभावी प्रकाश डाला। उनके भाषण में सच्चाई थी। उत्साह था, उन्माद नहीं। ख़ुशी थी, पर अभिमान नहीं। नड्डाजी ने प्रस्ताव का समर्थन किया। श्रीमती सम्पतिया उइके जो मध्य प्रदेश के मंडला आदिवासी क्षेत्र से आती हैं, उन्होंने भी अपने भाषण में बताया कि गरीबों के लिए मोदी सरकार ने क्या-क्या किया। उन्होंने अपने भाषण में कहा कि अब मोदीजी की सरकार शब्दों से गरीबों के लिए नहीं बल्कि पूरी तरह अपने आचरण से गरीबों के लिए जी रही है।
 
संपतिया उइके ने कहा कि आज गांवों में गरीबों, आदिवासियों और अनुसूचित जाति के परिवारों में नई आशा जगी है। उन्हें विश्वास होने लगा है कि उन्हें भी आवास मिलेगा। 'अपना घर' का सपना पूरा होगा। 'गैस चूल्हे' के लिए उनका नाम भी जुड़ेगा। पानी का संकट भी दूर होगा। ईलाज और दवाई के अभाव में अब गरीब मौत के मुंह में नहीं जाएगा। गांव-गांव में नरेंद्र मोदी की गरीबों के लिए चल रही योजनाओं ने उनकी जिंदगी में एक नई रोशनी प्रदान की है। हर गांव के गरीबों की जुबान पर नरेंद्र मोदी का नाम पहुंच चुका है। उन्होंने कहा कि गरीबों ने अब मान लिया है कि नरेंद्र मोदी की सरकार गरीबों की सरकार है। 
 
वहीं कांग्रेस के राज्यसभा में विपक्ष के नेता गुलाम नबी आज़ाद ने अभिभाषण पर बोलते हुए जो कुछ कहा, उससे यह बात भी साफ़ हो रही थी कि कांग्रेस जनता पर बहुत गुस्सा है। उन्हें लग रहा था कि जनादेश तो सदैव कांग्रेस को ही मिलना चाहिए। उनके भाषण में दुःख कम बल्कि जनता के खिलाफ अधिक रोष दिख रहा था। वहीं उनके चेहरे पर यह झलक रहा था कि इस जनादेश को वे पचा नहीं पा रहे हैं। विपक्ष का नेता कहते हुए आज भी देश के सामने पूर्व प्रधान मंत्री अटल बिहारी वाजपेयी का नाम सामने आता है। आज जब अटलजी की तुलना में विपक्षी दलों के नेताओं को तराजू पर रखती है 'तराजू' सस्वतः शर्मिन्दा हो जाता है।
  
कांग्रेस सहित सभी विपक्षी दलों के नेताओं ने जो भाषण दिया वह जाहिर कर रहा था कि उन्हें भारत की जनता के जनविवेक पर शंका है। सच्चाई यही है कि आज भी कांग्रेस सहित सपा-बसपा आत्म मंथन करने के बजाय अपना गुस्सा जनता पर दिखा रहे हैं। शायद ये भूल जाते हैं कि जनतंत्र में जनादेश को स्वीकार करना पड़ता है न कि जनता को गाली देना होता है। गुलाम नबी आजाद जैसे अनुभवी नेता भाजपा के बारे में जो कुछ कह रहे थे, उससे लग रहा था कि वे भारत की जनता को 72 वर्ष की आज़ादी के बाद भी अपरिपक्व मानते हैं। यही कारण है कि आज जनता के बीच कांग्रेस सिमटती जा रही है। 
लोकसभा में तो और भी गजब हो गया। कांग्रेस के विपक्ष के नवनियुक्त नेता को अपने भाषण पर पहले ही दिन प्रधानमंत्री से माफ़ी मांगनी पड़ी। इन दो दिनों में यह बात धीरे-धीरे सामने आ रही है कि विपक्ष न तो नकारात्मक और न ही सकारात्मक विरोध कर पा रहा है। वह पूरी तरह देश की जनता को दोषी मान रहा है। जो विपक्षी दल जनादेश का सम्मान न कर सके, उसका भविष्य में देश की जनता कैसे सम्मान करेगी। ऐसे सवाल अभी भी सेंट्रल हॉल में गूंज रहे हैं। सेंट्रल हॉल में सभी कांग्रेस समर्थकों की यही पीड़ा है कि कांग्रेस इस हालत के बाद भी सुधरना नहीं चाहती है।  
 
हर क्षण-हर पल भारत के लिए जीना है
       
राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद देते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विपक्ष को आह्वान किया। उन्होंने कहा कि चुनाव हो गए। जो आपको कहना था, और जो हमें कहना था, हम सभी ने कहा। अब आज हम सभी का दायित्व है कि भारत के विकास में हम सभी एक साथ खड़े हों। विकास भारत का होना है न कि किसी राजनैतिक दल का। उन्होंने कहा कि विपक्ष हमें आगाह करे। हम उनके एक-एक शब्द को देश हित में ग्राह्य करेंगे।
 
उन्होंने आगे कहा कि विपक्ष की भूमिका उन्हें तय करनी है। लेकिन भारत की एक सौ तीस करोड़ जनता यानि उसके लिए सत्ता और विपक्ष दोनों जिम्मेदार है। मोदीजी ने स्पष्ट कहा कि जनादेश के मायने हमारे लिए, फूलमाला, स्वागत या सत्कार कराना नहीं है। हमें हर पल हर क्षण जनता की सेवा करनी है। उन्होंने कहा कि हमारे पिछले पांच वर्षों के जनविकास कार्यों पर मुहर लगाकर भारत की जनता ने पुन: उससे अधिक काम करने की जिम्मेदारी सौंपी है।
 
श्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि हमें ऊंची उड़ान भरनी है पर जमीन से नहीं कटना है। हमारी हर उड़ान जमीन के लोगों के विचार के लिए होगी। उन्होंने कहा कि कांग्रेस के मित्र कह रहे थे कि हम बहुत ऊंचाई पर हैं लेकिन आपके पैर जमीन से उखड़ गए हैं और आप अब जमीन से उठे नहीं बल्कि पूरी तरह कट गए हैं। मैं ईश्वर से प्रार्थना करता हूं कि आप इससे भी ऊंची ऊंचाई पर जाएं। उन्होंने देश को आश्वस्त किया कि नए भारत के निर्माण में वे अब आगे बढ़ेंगे और उन्हें पूरे देश का और सदन में विपक्ष का सह्योग चाहिए।
 
-प्रभात झा 
(सांसद व राष्ट्रीय उपाध्यक्ष- भाजपा)
 

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