नयी शिक्षा नीति पर उद्योग जगत ने कहा, रोजगार की स्थित में होगा सुधार

By प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क | Jul 30, 2020

नयी दिल्ली। उद्योग जगत के शीर्ष कार्यकारियों का कहना है कि केंद्रीय मंत्रिमंडल से मंजूरी प्राप्त नयी राष्ट्रीय शिक्षा नीति से कौशल आधारित शिक्षा को बढ़ावा मिलेगा, शिक्षा को बेहतर बनाने के लिये ठोस डिजिटल संरचना तैयार होगी और जवावदेही व रोजगार प्राप्ति में सुधार होगा। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने बुधवार को नयी राष्ट्रीय शिक्षा नीति को मंजूरी दी। इसके तहत उच्च शिक्षा संस्थानों के लिये एकल नियामक, डिग्री पाठ्यक्रमों में बीच में शामिल होने व छोड़ने का विकल्प, एमफिल को समाप्त करने आदि समेत कई सुधार किये गये हैं। इससे पहले 1986 में बनी शिक्षा नीति में आखिरी बार 1992 में संशोधन किया गया था। एनआईआईटी लिमिटेड के चेयरमैन एवं सह-संस्थापक तथा एनआईआईटी यूनिवर्सिटी के संस्थापक राजेंद्र एस पवार ने कहा, ‘‘भारत की बहुप्रतीक्षित नयी शिक्षा नीति (एनईपी), दिशात्मक परिवर्तन और क्षेत्रीय सुधारों की एक अग्रदूत है। इससे 21वीं सदी में भारत के शिक्षा क्षेत्र में नये आयामों के खुलने की उम्मीद है।’’ उन्होंने कहा कि शिक्षा पर सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) का छह प्रतिशत खर्च करने का इरादा निर्णायक बदलाव लायेगा।

इसे भी पढ़ें: IBM की एक रिपोर्ट में खुलासा, भारत में डेटा चोरी से कंपनियों को हुआ औसतन 14 करोड़ का नुकसान

स्कूलगुरु एडुसर्व के संस्थापक एवं सीईओ शांतनु रूज ने कहा कि एनईपी ने एक ठोस डिजिटल बुनियादी ढांचा तैयार करने पर ध्यान केंद्रित किया है जो शिक्षा को व्यापक बनाने और जवाबदेही में सुधार करने में मदद करेगा। उन्होंने कहा, परीक्षा प्रणाली में परिवर्तन के साथ-साथ सीखने के परिणाम पर भी ध्यान केंद्रित किया गया है।’’ जे सागर एसोसिएट्स के पार्टनर नितिन पोद्दार ने कहा कि नया नियम देश की मानव पूंजी का उपयोग करने में मदद करेगा। साएंट के कार्यकारी अध्यक्ष बी वी आर मोहन रेड्डी ने कहा कि ज्ञान-चालित और नवाचार से प्रेरित विश्व व्यवस्था में सफलता बहुत हद तक लोगों की क्षमताओं पर निर्भर करता है, और शिक्षा (स्कूल और उच्च शिक्षा दोनों) अपेक्षित क्षमताओं के निर्माण की कुंजी है। उन्होंने कहा, नयी नीति शिक्षा के लिये सार्वभौमिक पहुंच और छात्रों के बेहतर समावेश का मार्ग प्रशस्त करने के लिये कई दूरंदेशी पहल प्रस्तुत करती है। ग्लोबल यूनिवर्सिटी सिस्टम्स के एशिया प्रशांत क्षेत्र के मुख्य अधिशासी अधिकारी शरद मेहरा ने शीक्षा नीति को कायाकल्प करने वाली बताते हुए कहा कि इस नीति को पैने वैश्विक दृष्टिकोण से तैयार किया गया है। इसमें शिक्षा पर कोण से ध्यान दिया गया है ताकि कौशल और प्रतिभा का उन्नयन एवं सृजन हो। मेहरा ने मानव संसाधन का नाम बदल कर शिक्षा मंत्रालय किए जाने की तारीफ की और कहा कि शिक्षा मानव विकास का अभिन्न अवयव है।

प्रमुख खबरें

Raksha Bandhan 2026 पर Pastel Suits के साथ पहनें ये Trendy Meenakari Jhumka, मिलेगा Royal Look

Karnataka में RSS के खिलाफ कोई केस दर्ज नहीं, Priyank Kharge का विधान परिषद में जवाब

दुश्मनों पर दनादन बरसेंगी मिसाइलें, भारत में Private Companies भी बनाएंगी Missiles, Rajnath Singh ने DRDO की Technology Transfer को दी मंजूरी

Struggling Pakistan टीम में Babar Azam की वापसी, Lords में England से लेंगे बदला?