Asian Games Wrestling: Nitesh Siwach ने जीता ऐतिहासिक रजत पदक

By प्रभासाक्षी न्यूज़ डेस्क | Oct 01, 2026

(फिलेम दीपक सिंह) नागोया, एक अक्टूबर नितेश सिवाच के पास इतिहास रचने का शानदार मौका था लेकिन वह बृहस्पतिवार को यहां स्वर्ण पदक जीतने से चूक गए, हालांकि उन्होंने 1962 के बाद एशियाई खेलों में ग्रीको-रोमन कुश्ती में भारत को पहला रजत पदक दिलाया जबकि मानसी अहलावत महिलाओं के 62 किलोग्राम वर्ग में कांस्य पदक के प्ले-ऑफ में हार गईं। नितेश के पास 1962 के बाद एशियाई खेलों में भारत के पहले ग्रीको-रोमन स्वर्ण पदक विजेता बनने का अवसर था, लेकिन वह पुरुषों के 97 किलोग्राम वर्ग के फाइनल में जापान के खिलाड़ी यूरी नाकाजातो से 0-4 से हार गए। वहीं मानसी को मंगोलिया की अल्तजिन तोगतोख ने 5-2 से हरा दिया, जिनकी मजबूत रक्षात्मक शैली पदक मुकाबले में निर्णायक साबित हुई।

नितेश ने बाद में कहा, ‘‘मुझे खुशी है कि मैं फाइनल में जगह बनाने में सफल रहा। मैं और बेहतर कर सकता था, लेकिन अभी भी मुझमें कुछ कमियां हैं। अब मैं अगले साल होने वाली विश्व चैंपियनशिप और ओलंपिक क्वालीफायर पर ध्यान केंद्रित करूंगा।’’ नितेश हरियाणा के पानीपत जिले के जगसी गांव के रहने वाले हैं।

उनके पिता दूध बेचते हैं। उन्होंने कहा, ‘‘मैं नहीं जानता कि मुकाबले में क्या हुआ लेकिन मैं बेहतर प्रदर्शन कर सकता था। मैं स्वर्ण पदक जीत सकता था, लेकिन मुझमें अभी भी कुछ कमियां हैं।

मैं निश्चित रूप से सुधार करूंगा।’’ नितेश ने 97 किलोग्राम भार वर्ग के इस मुकाबले में शुरुआत से ही आक्रामक रवैया अपनाने की कोशिश की लेकिन जापान के पहलवान ने उनकी एक नहीं चलने दी। नितेश आखिर में 0-4 से हार गए। जापान के पहलवान ने नितेश को आगे धकेलकर स्कोरिंग की शुरुआत की।

नितेश को निष्क्रियता के कारण ‘ग्राउंड पोजीशन’ में आना पड़ा, लेकिन उन्होंने शानदार बचाव किया और नाकाज़ातो को अंक हासिल करने का मौका नहीं दिया। नाकाज़ातो ने पहले पीरियड के अंत तक 2-0 की बढ़त बना ली थी और अंत तक नितेश को ‘हेड लॉक’ पोजीशन में जकड़े रखा। स्थानीय खिलाड़ी ने इसके बाद नितेश का संतुलन बिगाड़ दिया और इस दांव को सफलतापूर्वक ‘टेक डाउन’ में बदलकर 4-0 की बढ़त हासिल कर ली।

जब एक मिनट का समय बचा था तब भारतीय पहलवान को आक्रामक होने की जरूरत थी लेकिन जापान के पहलवान ने ऐसा नहीं होने दिया। नितेश ने सीधे क्वार्टर फाइनल में प्रवेश किया था। उन्होंने तुर्कमेनिस्तान के अमनबर्डी आगामम्मेदोव को 7-1 से हराने के बाद सेमीफाइनल के पहले तीन मिनट के भीतर तकनीकी श्रेष्ठता के आधार पर मंगोलिया के गंखुयांग गनबातर को 9-0 से करारी शिकस्त दी थी।

वहीं मानसी अल्तजिन के खिलाफ शुरू में पिछड़ने के बाद शानदार वापसी करते हुए कांस्य पदक जीतने के बेहद करीब पहुंच गई थी। मंगोलिया की खिलाड़ी ने मानसी को दो बार पीछे धकेलकर 2-0 की बढ़त हासिल की और फिर भारतीय खिलाड़ी के दोहरे पैर के हमले का बचाव किया। मानसी को पैर से हमला करने का एक और मौका मिला, लेकिन अल्तजिन ने एक बार फिर उनके प्रयास को विफल कर दिया।

इसके बाद निष्क्रियता के कारण अल्तजिन को समय सीमा में डाल दिया गया जिससे मानसी अंक बनाने में सफल रही। इससे उनकी पदक जीतने की संभावना बढ़ गई थी। भारतीय खिलाड़ी ने जोरदार हमला किया, लेकिन अल्तजिन ने अपनी पूरी ताकत लगाकर इस हमले को नाकाम कर दिया।

मानसी ने पुश-आउट करके अंतर को कम करने की कोशिश की, लेकिन अल्तजिन ने टेक-डाउन करके कांस्य पदक जीत लिया। मानसी ने बाद में कहा, ‘‘मैं बिल्कुल भी अच्छा प्रदर्शन नहीं कर पाई। मुकाबले के आखिर में मैं बचाव करने में नाकाम रही।’’ इससे पहले मानसी ने किर्गिस्तान की इरिना कुज़नेत्सोवा को 6-1 से हराया था, लेकिन सेमीफाइनल में जापान की एशियाई चैंपियन नोनोका ओज़ाकी से 0-6 से हार गईं।

सुमित (60 किलोग्राम) और अमन बरोनिया (77 किलोग्राम) अपने-अपने क्वार्टर फाइनल हारने के बाद पदक की दौड़ से पहले ही बाहर हो चुके थे। अमन ने मंगोलिया के बोर्गिल तुवशिनबटार पर 8-6 से जीत के साथ शुरुआत की, लेकिन कतर के शाहीन बडाघिमोफ्राड से हार गए। सुमित को ईरान के सज्जाद अब्बासपोरगानी से 1-1 से हार का सामना करना पड़ा।

सेमीफाइनल में शाहिन की हार ने अमन के लिए रेपेचेज का रास्ता भी बंद कर दिया।

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