By रेनू तिवारी | Sep 04, 2026
महाराष्ट्र सरकार अपने दो सबसे प्रमुख प्रशासनिक और विधायी परिसरों— मंत्रालय (सचिवालय) और राज्य विधानसभा भवन में समय देखने के पारंपरिक और वैज्ञानिक अनुभव में बड़ा बदलाव करने जा रही है। राज्य सरकार ने इन इमारतों में दो विशेष 'कल्याण' खगोलीय समय दिखाने वाली मशीनें (Astronomical Time Display Machines) लगाने की आधिकारिक मंजूरी दे दी है। इस अनूठी पहल का उद्देश्य आधुनिक जीपीएस (GPS) आधारित टाइमकीपिंग के साथ भारत के समृद्ध पारंपरिक खगोलीय ज्ञान और 'पंचांग' परंपरा को प्रदर्शित करना है। मशीनें पारंपरिक पंचांग से मिली जानकारी को खगोलीय गतिविधियों और रोज़ाना के खगोलीय समय से जुड़ी जानकारियों के साथ जोड़ेंगी।
सांस्कृतिक मामलों के विभाग के आदेश के मुताबिक, राज्य सरकार ने इन दो मशीनों को खरीदने के लिए 10.97 लाख रुपये मंज़ूर किए हैं। इन मशीनों को सिर्फ़ स्टैंडर्ड टाइम दिखाने के बजाय, भारतीय खगोल विज्ञान और पारंपरिक कैलेंडर सिस्टम से जुड़ी कई चीज़ों को शामिल करने के लिए डिज़ाइन किया गया है।
इन डिस्प्ले पर स्टैंडर्ड टाइम के साथ-साथ GPS टाइम भी दिखेगा। ये मशीनें सूर्योदय और सूर्यास्त, ग्रहों की स्थिति और चाल, पंचांग, अहम दिनों और खास समय-अवधियों के बारे में भी जानकारी देंगी।
इन मशीनों में भारतीय सांस्कृतिक, धार्मिक, सामाजिक और राष्ट्रीय कार्यक्रमों से जुड़ी जानकारी दिखाने की क्षमता भी होगी। इसका मतलब है कि आने वाले लोग और अधिकारी पारंपरिक टाइमकीपिंग के साथ-साथ भारत की पारंपरिक खगोलीय और कैलेंडर प्रथाओं पर आधारित जानकारी भी देख सकेंगे।
'कल्याण' टाइम डिस्प्ले मशीनें क्या हैं?
'कल्याण' मशीनों को इंटीग्रेटेड खगोलीय जानकारी दिखाने वाली मशीनों के तौर पर डिज़ाइन किया गया है। ये सिर्फ़ घड़ी की तरह काम करने के बजाय, टाइमकीपिंग को पंचांग, ग्रहों की स्थिति और दूसरी खगोलीय जानकारियों के साथ जोड़ती हैं। इसलिए, प्रस्तावित इंस्टॉलेशन राज्य सरकार के दो अहम परिसरों में आधुनिक समय के संदर्भों और पारंपरिक भारतीय खगोलीय जानकारी का मेल पेश करेगा।
सिर्फ़ एक संस्था ने दिलचस्पी दिखाई
सरकारी आदेश में कहा गया है कि 'एक्सप्रेशन ऑफ़ इंटरेस्ट' (EoI) प्रक्रिया के दौरान 'आर्ष विद्या प्राइवेट लिमिटेड' ने उपकरण की सप्लाई में दिलचस्पी दिखाई थी। आदेश के मुताबिक, यह एकमात्र ऐसी संस्था है जो ऐसी मशीनें बनाती है। अब खरीद की प्रक्रिया तय सरकारी नियमों के अनुसार पूरी की जाएगी।
पुरातत्व और संग्रहालय निदेशालय देखरेख करेगा
मशीनों की खरीद प्रक्रिया को लागू करने की ज़िम्मेदारी पुरातत्व और संग्रहालय निदेशालय को सौंपी गई है। यह निदेशालय समय-समय पर तकनीकी जांच भी करेगा ताकि यह पक्का किया जा सके कि उपकरण ज़रूरत के मुताबिक काम कर रहे हैं। सरकारी आदेश के अनुसार, इस प्रोजेक्ट का खर्च पर्यटन और सांस्कृतिक मामलों के विभाग के तहत उपलब्ध फंड से पूरा किया जाएगा।
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