बिना तर्क और तथ्य का मुद्दा है पेगासस, अब संसद में उठाने का कोई मतलब नहीं: मुख्तार अब्बास नकवी

By प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क | Nov 14, 2021

नयी दिल्ली। केंद्रीय मंत्री और राज्यसभा के उपनेता मुख्तार अब्बास नकवी ने रविवार को कहा कि पेगासस मामला ‘बिना तर्क एवं तथ्य’ का मुद्दा है जिसे संसद में उठाने का कोई मतलब नहीं है और संसदीय कार्यवाही को आगामी विधानसभा चुनावों से जोड़ने की कोशिश करना ठीक नहीं है। उन्होंने ‘पीटीआई-भाषा’ को दिए एक साक्षात्कार में यह भी कहा कि संसद के इस शीतकालीन सत्र में दोनों सदनों में आसन के फैसलों के आधार पर सरकार हर विषय पर चर्चा करने के लिए तैयार है। नकवी ने पेगासस मामले को लेकर उस वक्त यह टिप्पणी की है जब पिछले दिनों उच्चतम न्यायालय की ओर से पेगासस मामले की जांच के लिए एक समिति बनाए जाने के फैसले के बाद कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने कहा कि संसद के आगामी सत्र में भी इस मुद्दे को उठाया जाएगा। संसद के मानसून सत्र में पेगासस मामले को लेकर दोनों सदनों में कई दिनों तक हंगामा हुआ था। संसद का शीतकालीन सत्र 29 नवंबर से आरंभ हो रहा है और 23 दिसंबर तक चलेगा। 

उन्होंने कहा, ‘‘प्रधानमंत्री मोदी ने लोकतंत्र के जरिये कामकाज करके दिखाया और वंशवाद से जुड़ी पार्टियों ने संसद में व्यवधान पैदा करके दिखाया। हम चर्चा के लिए तैयार रहते हैं। विपक्ष के जो भी मुद्दे हैं, उस पर राज्यसभा के सभापति और लोकसभा अध्यक्ष फैसला करेंगे। हम सरकार की जिम्मेदारी पूरा करेंगे।’’ यह पूछे जाने पर कि क्या सत्र से पहले विपक्षी दलों के साथ बातचीत हो रही है तो नकवी ने कहा, ‘‘हम लोगों का विपक्ष के साथियों के साथ संपर्क और संवाद बना रहता है। उनसे बातचीत होती रहती है। हमारी कोशिश होती है कि विपक्ष के मुद्दों का निदान करें और सबको साथ लेकर चलें।’’ 

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उनके मुताबिक, ‘‘अब तक यही परंपरा रही है कि विपक्ष मुद्दों को उठाता है तो उस पर सर्वदलीय बैठक और कार्य मंत्रणा समिति की बैठक में फैसला होता है। पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव होने वाले हैं। अगर चुनाव और संसद की कार्यवाही को एकसाथ जोड़ेंगे तो फिर न्याय नहीं कर पाएंगे। शीतकालीन सत्र में ज्यादा उत्पादकता हो, यही हमारा प्रयास होगा।’’ संसद सत्र से पहले विपक्षी एकजुटता होने की स्थिति में सरकार की रणनीति क्या होगी, इस पर केंद्रीय मंत्री ने कहा, ‘‘हमारी पार्टी, सरकार और प्रधानमंत्री जी का भी मानना है कि विपक्ष मजबूर नहीं, मजबूत होना चाहिए। दुर्भाग्यपूर्ण है कि विपक्ष का चौधरी बनने के चक्कर में कुछ लोगों की पार्टी की चौधराहट खतरे में है। कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस और कुछ और पार्टियां कहती हैं हम विपक्ष के चौधरी हैं। इसी होड़ के कारण इनके भीतर असमंजस है।’’

उन्होंने कहा, ‘‘आप (विपक्षी दल) एकजुट हो जाएं, कोई बात नहीं है। लेकिन मुद्दों पर एकजुट हो जाइए। पिछली बार ये लोग सिर्फ व्यवधान पैदा करने के लिए एकजुट हुए थे।’’ पिछले सत्र के आखिरी दिन राज्यसभा में हुए हंगामे पर नकवी ने कहा, ‘‘ये मामला आसन के पास है। विपक्ष के साथियों से यही अपील है कि दुनिया में सबसे ज्यादा मजबूत और अच्छा संसदीय लोकतंत्र हमारा है। हमें ऐसा कोई काम नहीं करना चाहिए जिससे इसे नुकसान पहुंचे।’’ सत्र के दौरान संसद मार्च करने की किसान नेताओं की घोषणा पर केंद्रीय अल्पसंख्यक कार्य मंत्री ने कहा कि किसानों के लिए सरकार ने ‘नो एंट्री और नो टॉक’ का कोई बोर्ड नहीं लगाया है, लेकिन किसान नेताओं को उनका शोषण कर रही पार्टियों से सचेत हो जाना चाहिए। 

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उन्होंने कहा, ‘‘सरकार ने हजार बार एमएसपी की गारंटी की बात की है। संसद के भीतर और बाहर भी इस बारे में कहा है। आज न्यूनतम समर्थन मूल्य नहीं, अधिकतम समर्थन मूल्य मिल रहा है। मंडियां सुरक्षित थीं और सुरक्षित रहेंगी। किसानों की जमीन की गारंटी कानून में दी गई। ये तीन मुद्दे किसानों के थे जिनका समाधान हो गया। लेकिन कुछ लोग भ्रम और भय का माहौल पैदा करने का प्रयास कर रहे हैं।’’ पूर्व केंद्रीय मंत्री सलमान खुर्शीद की पुस्तक में हिंदुत्व को लेकर की गई टिप्पणी पर नकवी ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि कांग्रेस का ‘हिंदू विरोधी मंतर’ उसे ‘छूमंतर’ कर रहा है।

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