By अभिनय आकाश | May 13, 2026
चीन में लाखों छात्र जब 'गाओकाओ' जो कि राष्ट्रीय कॉलेज प्रवेश परीक्षा है देते हैं, तो हवाई उड़ानों का रास्ता बदल दिया जाता है और परीक्षा केंद्रों के पास हॉर्न बजाने व निर्माण कार्यों पर रोक लगा दी जाती है। जून 2025 में, 13 मिलियन से भी ज़्यादा चीनी छात्रों ने गाओकाओ की परीक्षा दी। सिर्फ़ छात्रों की संख्या के लिहाज़ से ही यह परीक्षा, भारत की राष्ट्रीय मेडिकल प्रवेश परीक्षा 'NEET-UG' की 'दादा' (सबसे बड़ी) परीक्षा बन जाती है। जहाँ एक ओर, 'नेशनल टेस्टिंग एजेंसी' (NTA) द्वारा आयोजित NEET-UG परीक्षा, पेपर लीक से जुड़े विवादों में घिरी हुई है, वहीं दूसरी ओर चीन ने गाओकाओ परीक्षा को पूरी तरह से 'त्रुटिरहित' बनाने की दिशा में कदम उठाए हैं। 3 मई को, लगभग 2.2 मिलियन (22 लाख) छात्र NEET-UG (राष्ट्रीय पात्रता और प्रवेश परीक्षा) में शामिल हुए, इस उम्मीद के साथ कि उन्हें मेडिकल की पढ़ाई करने का मौका मिलेगा। यह परीक्षा NTA द्वारा भारत में अंडरग्रेजुएट मेडिकल (MBBS), डेंटल (BDS), और AYUSH कोर्स में एडमिशन के लिए एकमात्र, मानकीकृत राष्ट्रव्यापी प्रवेश परीक्षा के रूप में आयोजित की जाती है। यह योग्यता-आधारित चयन सुनिश्चित करती है, एकरूपता के लिए कई राज्य-स्तरीय परीक्षाओं की जगह लेती है, और भविष्य के स्वास्थ्य सेवा पेशेवरों के लिए उच्च मानक बनाए रखती है।
उन्होंने आगे कहा कि यह (पेपर लीक) बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण बात है। जब भी ऐसी कोई घटना होती है, तो छात्रों का मनोबल टूट जाता है। चीन जैसे मॉडल की बात करके, 'सुपर 30' के कुमार बीजिंग के हाई-टेक निगरानी सिस्टम और परीक्षाओं में धांधली की नापाक कोशिशों के लिए दी जाने वाली सख़्त सज़ाओं की ओर इशारा कर रहे हैं। खासकर दुनिया की सबसे कठिन परीक्षा 'गाओकाओ' के मामले में।