By अंकित सिंह | Sep 28, 2022
सरकार ने आज पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया और उससे संबंधित संगठनों पर प्रतिबंध लगा दिया। इस प्रतिबंध के बाद राजनीति भी शुरू हो गई है। एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने पीएफआई पर बैन का विरोध किया है। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा है कि वह पीएफआई के विचारधारा का लगातार विरोध करते रहे हैं। लेकिन इस तरह से बैन ठीक नहीं है। एक के बाद एक किए गए कई ट्वीट में ओवैसी ने कहा कि मैंने हमेशा पीएफआई के दृष्टिकोण का विरोध किया है और लोकतांत्रिक दृष्टिकोण का समर्थन किया है। लेकिन पीएफआई पर इस प्रतिबंध का समर्थन नहीं किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि अपराध करने वाले कुछ व्यक्तियों के कार्यों का मतलब यह नहीं है कि संगठन को ही प्रतिबंधित किया जाना चाहिए।
औवैसी ने यह भी कहा कि हमें याद रखना चाहिए कि कांग्रेस ने इसे सख्त बनाने के लिए यूएपीए में संशोधन किया और जब बीजेपी ने इसे और भी कठोर बनाने के लिए कानून में संशोधन किया, तो कांग्रेस ने इसका समर्थन किया। उन्होंने कहा कि यह मामला कप्पन की समय-सीमा का अनुसरण करेगा, जहां किसी भी कार्यकर्ता या पत्रकार को बेतरतीब ढंग से गिरफ्तार किया जाता है और जमानत पाने में भी 2 साल लगते हैं। उन्होंने सवाल किया कि पीएफआई पर प्रतिबंध कैसे लगा लेकिन खाजा अजमेरी बम धमाकों के दोषियों से जुड़े संगठन नहीं क्यों नहीं लगा? सरकार ने दक्षिणपंथी बहुसंख्यक संगठनों पर प्रतिबंध क्यों नहीं लगाया?