इमरान खान की कुर्सी जाते ही जनरल बजवा के इंडिया डॉक्ट्रिन पर काम करना शुरू कर देगी पाक सेना

By टीम प्रभासाक्षी | Apr 01, 2022

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान की मुश्किलें बढ़ी हुई हैं। नेशनल असेंबली में इमरान खान की तकदीर का फैसला विश्वास मत पर टिका हुआ है। विपक्षी गठबंधन पाकिस्तान डेमोक्रेटिक मूवमेंट की ओर से इमरान खान को सत्ता से हटाने की पूरी कोशिश की जा रही है। पाकिस्तान की संसद में इसी गठबंधन ओर से इमरान खान के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाया गया है। नेशनल असेंबली में विपक्षी गठबंधन को 172 के आंकड़े को छूने के लिए सिर्फ 10 सदस्यों की जरूरत है। अगर यह 10 सदस्य उसके पाले में आ जाते हैं तो इमरान की कुर्सी चली जाएगी। पाकिस्तान डेमोक्रेटिक मूवमेंट लगातार इमरान खान के सहयोगी दलों मुस्लिम लीग क्यू के 4 सदस्य, और मुत्ताहिदा कौमी मूवमेंट के 7 सदस्य और कुछ निर्दलियों से संपर्क साधे हुए हैं। इसके अलावा इमरान खान की अपनी पार्टी के एक दर्जन से ज्यादा सांसद उनसे नाराज बताए जा रहे हैं और कहा यह भी जा रहा है कि वह सरकार के खिलाफ वोटिंग कर सकते हैं।

इस मुश्किल हालात में इमरान खान को आईएसआई के पूर्व डीजी फैज हामिद की कमी भी महसूस हो रही होगी, जिन्होंने उन्हें विपक्षी विरोधियों से बचाने में उनकी मदद की थी। दरअसल हामिद की आस लगाए बैठे थे कि आर्मी चीफ कमर जावेद बाजवा का कार्यकाल खत्म होते ही इमरान खान उन्हें सेना प्रमुख बना देंगे, लेकिन ऐसा हुआ नहीं और इमरान खान ने उनका तबादला कर उन्हें आईएसआई के चीफ से पेशावर का कोर कमांडर बना दिया। उन्होंने अपने इस कदम से सेना को नाराज कर दिया। हालांकि ये एक इकलौता कारण नहीं है, कई दूसरे कारण भी हैं जिनके चलते सेना उन्हें सत्ता से बेदखल करना चाहती है।

दरअसल पाकिस्तानी सेना को यह डर सता रहा है कि कहीं इमरान खान की नाकामी के चलते जनता की नजरों में उसकी इमेज न बिगड़ जाए। पाकिस्तान के सेना प्रमुख जनरल बाजवा ने लाहौर यूनिवर्सिटी ऑफ़ मैनेजमेंट साइंसेस में एक प्रोग्राम के दौरान कहा था कि आपको पता नहीं है कि इमरान खान कौन हैं। यह इस बात के संकेत भी हैं कि इमरान खान और सेना के बीच सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है।

पाकिस्तान फौज का इमरान खान की प्रति जो बदलाव देखा जा रहा है उसका एक कारण बुशरा बीबी भी हैं। बुशरा बीबी उर्फ पिंकी पीर इमरान खान की पार्टी में गॉड मदर कही जाती  हैं। ऐसी खबरें भी आई हैं कि इमरान खान के अहम फैसलों के पीछे उनकी पत्नी का जादू-टोना आधार बनता है। वहीं पाक फौज को लगता है कि पाकिस्तान को इस वक्त जिन मुद्दों से दो-चार होना पड़ रहा है, उनकी समझ इमरान खान को कम है और वह केवल धर्म के आधार पर ही हल निकाल पाते हैं। इसके अलावा सेना पाक पंजाब के मुख्यमंत्री उस्मान बुजदार को भी हटाना चाहती थी। हाल ही में उन्होंने अविश्वास प्रस्ताव से डरकर इस्तीफा दे दिया।

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देखा जाए तो चीन अमेरिका और सऊदी अरब के साथ भी इमरान खान के कार्यकाल में पाकिस्तान के संबंध हल्के हुए हैं। जबकि यह तीनों देश पाकिस्तान के लिए बहुत अहम है। सीपीईसी परियोजना को लेकर चीन भी पाकिस्तान से नाराज चल रहा है, क्योंकि चीनी कंपनियों ने उस पर पाकिस्तानी नेताओं को घूस दी थी। अब इमरान खान उसकी फाइल खुलवा रहे हैं। चीन से पाकिस्तान के नाराजगी की दूसरी वजह यह भी है कि वह सीपीसी परियोजना की जानकारी अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष को इसलिए दे रहे हैं क्योंकि अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष से उसे लोन मिल जाए।

पाकिस्तान से सऊदी अरब इसलिए नाराज है क्योंकि इमरान खान ने तुर्की और मलेशिया की सहायता से मुस्लिम देशों का एक अलग ग्रुप बनाने की कोशिश  कर रहे हैं। इमरान का प्लान ये की भी है कि इसमें ईरन को शामिल किया जाए जो सऊदी अरब का विरोधी माना जाता है। इमरान खान ऐसा इसलिए भी कर रहे हैं क्योंकि उन्हें लगता है कि सऊदी के प्रभाव वाला ओआईसी कश्मीर मसले को लेकर पाकिस्तान को सपोर्ट नहीं कर रहा है। वहीं अमेरिकी सैनिकों की अफगानिस्तान से निकलने के बाद इमरान खान ने कुछ ऐसे बयान दिए जिससे उन्हें बाइडन प्रशासन की नाराजगी भी झेलनी पड़ रही है।

सेना की बात नहीं सुनी

इमरान खान ने जनरल बाजवा या सेना की उस बात को भी नहीं माना जिसके तहत कश्मीर मसले को ठंडे बस्ते में डालकर पाकिस्तान की इकॉनमी के लिए भारत से संबंधों को सामान्य बनाने के लिए भी कहा गया था। फरवरी 2021 में एलओसी पर पाकिस्तान और भारत के बीच सीजफायर को लेकर सहमति बनी थी। इसके बाद बाजवा ने एक बयान भी दिया था। इसके बाद पाक सरकार ने कॉटन और चीनी का आयात भारत और चीन से करने का प्रयास किया तो, इमरान खान ने इस में रोड़े अटका दिए। कैबिनेट मीटिंग के दौरान  उन्होंने कहा जम्मू कश्मीर में जब तक पुरानी स्थिति बहाल नहीं की जाती तब तक भारत के साथ व्यापार नहीं किया जाएगा।

इमरान खान की सत्ता गई तो शाहबाज होंगे अगले पीएम

अगर इमरान खान अविश्वास प्रस्ताव में अपनी कुर्सी हार जाते हैं तो पाकिस्तान डेमोक्रेटिक मूवमेंट की तरफ से शाहबाज शरीफ अगले प्रधानमंत्री बन सकते हैं। अगर ऐसा होता है तो सेना सरकार में अपना प्रभाव एक बार फिर बढ़ाएगी। ऐसे में भारत पर बाजवा डॉक्ट्रिन पर काम शुरू हो जाएगा।

बाजवा डॉक्ट्रिन क्या है

अभी तक पाकिस्तान में जितने भी आर्मी चीफ हुए हैं उनमें कमर जावेद बाजवा का भारत को लेकर नरम रहता है। उनका मानना है कि क्षेत्र में पड़ोसी देशों से संबंध अच्छे होने चाहिए ,जिससे आर्थिक तरक्की हासिल की जा सके।बाजवा भारत पाक विवाद को सुलझाने के लिए बातचीत की भी वकालत करते रहे हैं। अगर इमरान खान की सत्ता से विदाई होती है तो भारत-पाक के संबंधों में जमी बर्फ के पिघलने की उम्मीद की जा सकती है।

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