India से दुश्मनी पड़ी भारी, Vaccine Crisis से जूझ रहे Pakistan ने अब Saudi Arabia से मिलाया हाथ

By Neha Mehta | Feb 08, 2026

पाकिस्तान इस वक्त एक बड़ी मुसीबत में फंस गया है और यह मुसीबत है—वैक्सीन का अकाल। हुआ यह कि पिछले साल मई में हुए टकराव के बाद पाकिस्तान ने जोश में आकर भारत से सस्ती वैक्सीन लेना बंद कर दिया था, लेकिन अब यह फैसला उनके गले की फांस बन गया है।

खर्च का गणित बिगड़ा

पाकिस्तान हर साल करीब 400 मिलियन डॉलर की वैक्सीन खरीदता है। इसमें से लगभग आधा पैसा (49%) अंतर्राष्ट्रीय संस्था 'GAVI' देती है, और बाकी आधा पाकिस्तान सरकार को खुद उठाना पड़ता है। खतरा यह है कि अगर पाकिस्तान ने खुद वैक्सीन बनाना शुरू नहीं किया, तो 2031 तक यह खर्च बढ़कर 1.2 अरब डॉलर सालाना पहुँच जाएगा। सबसे बड़ी टेंशन यह है कि 2031 के बाद अंतर्राष्ट्रीय मदद (फ्री वैक्सीन) मिलना भी पूरी तरह बंद हो जाएगा।

भारत की वैक्सीन क्यों थी खास?

रिश्तों में कड़वाहट के बावजूद, सालों से भारत GAVI के जरिए पाकिस्तान को सस्ती और अच्छी क्वालिटी की वैक्सीन दे रहा था। यहाँ तक कि कोविड के समय भी भारत ने वैक्सीन सप्लाई की थी। लेकिन पिछले साल के झगड़े के बाद यह रास्ता बंद हो गया।

आबादी बढ़ रही है, पर अपनी एक भी वैक्सीन नहीं

पाकिस्तान दुनिया का पांचवां सबसे बड़ी आबादी वाला देश है (करीब 24 करोड़)। वहां हर साल 62 लाख बच्चे पैदा होते हैं। सरकार कुल 13 तरह के टीके लगाती है, लेकिन हैरानी की बात यह है कि इनमें से एक भी वैक्सीन पाकिस्तान में नहीं बनती।

अब क्या होगा? खुद को इस दलदल से निकालने के लिए पाकिस्तान अब सऊदी अरब के साथ मिलकर वैक्सीन बनाने की प्लानिंग कर रहा है, ताकि उसे भारत या किसी और देश पर निर्भर न रहना पड़े।

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