Lunar eclipse 2023: 5 मई को लगेगा उपच्छाया चंद्र ग्रहण और नहीं लगेगा सूतक

By डा. अनीष व्यास | May 03, 2023

हिंदू धर्म में ग्रहण का विशेष महत्व है। साल 2023 में कुल 4 ग्रहण लगने वाले हैं, जिसमें 2 सूर्य ग्रहण और 2 चंद्र ग्रहण होंगे। साल का पहला सूर्य ग्रहण हो चुका है। वहीं साल का पहला चंद्र ग्रहण 5 मई को लगने वाला है। पहला चंद्र ग्रहण वैशाख मास की पूर्णिमा तिथि के दिन लग रहा है। यह एक खगोलीय घटना मानी जाती है। जब पृथ्वी चंद्रमा और सूर्य के बीच में आ जाती है, तो चंद्रग्रहण होता है। चंद्र ग्रहण से पहले सूतक काल लग जाता है। पाल बालाजी ज्योतिष संस्थान जयपुर-जोधपुर के निदेशक ज्योतिषाचार्य डा. अनीष व्यास ने बताया कि साल 2023 का पहला उपच्छाया चंद्र ग्रहण शुक्रवार 5 मई 2023 को रात 8:44 मिनट से शुरू हो रहा है, जो देर रात 1:01 बजे समाप्त होगा। यह चंद्र ग्रहण उपच्छाया चंद्र ग्रहण होगा। चंद्रग्रहण का परमग्रास समय रात 10:52 मिनट पर है। साल का पहला चंद्र ग्रहण भारत में नहीं दिखाई देगा। इसलिए सूतक काल मान्य नहीं होगा। वैशाख पूर्णिमा से संबंधित पूजन कर्म और अन्य सामान्य पूजा-पाठ के लिए कोई बाधा नहीं रहेगी। हिन्दू पंचांग के अनुसार सूर्य ग्रहण और चंद्र ग्रहण दोनों का ही जीवन में बहुत महत्व है। ऐसी मान्यता है कि ग्रहण के दौरान कोई भी शुभ कार्य नहीं करने चाहिए और ऐसे में भगवान की पूजा भी नहीं की जाती है।

5 मई को पहला चंद्र ग्रहण

भविष्यवक्ता और कुण्डली विश्ल़ेषक डा. अनीष व्यास ने बताया कि 5 मई को उपछाया चंद्र ग्रहण‎ होगा। यानी चंद्रमा पर पड़ने वाली पृथ्वी की छाया की भी एक और छाया होने से ये ग्रहण नहीं दिखेगा। इसलिए इसका भी धार्मिक महत्व नहीं रहेगा। ये चंद्र ग्रहण यूरोप, एशिया, ऑस्ट्रेलिया, अफ्रीका, अंटार्कटिका, प्रशांत, अटलांटिक और हिंद महासागर पर रहेगा। पहला चंद्र ग्रहण शुक्रवार 5 मई 2023 को रात 8:44 मिनट से शुरू हो रहा है, जो देर रात 1:01 बजे समाप्त होगा। यह चंद्र ग्रहण उपच्छाया चंद्र ग्रहण होगा। चंद्रग्रहण का परमग्रास समय रात 10:52 मिनट पर है। साल का पहला चंद्र ग्रहण भारत में नहीं दिखाई देगा। इसलिए सूतक काल मान्य नहीं होगा।

मान्य नहीं होगा सूतक काल 

भविष्यवक्ता डा. अनीष व्यास ने बताया कि सूतक काल चंद्र ग्रहण शुरू होने से 9 घंटे पहले लगता है। धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक, सूतक काल के दौरान कोई भी मांगलिक कार्य नहीं किए जाते हैं। भारत में यह चंद्र ग्रहण दिखाई नहीं देगा इसलिए यहां सूतक काल भी मान्य नहीं होगा।

चंद्र ग्रहण ग्रहण के दौरान मंत्र जाप  

ॐ क्षीरपुत्राय विद्महे अमृत तत्वाय धीमहि तन्नो चन्द्रः प्रचोदयात्

कहां-कहां नजर आएगा चंद्र ग्रहण

कुण्डली विश्ल़ेषक डा. अनीष व्यास ने बताया कि ये उपच्छाया चंद्र ग्रहण है। जब चंद्रमा पर पृथ्वी की छाया सिर्फ एक तरफ से होती है तो उपच्छाया चंद्र ग्रहण कहा जाता है। इसके कारण ये ग्रहण हर जगह नहीं देखा जा सकेगा। ये चंद्र ग्रहण यूरोप, सेंट्रल एशिया, ऑस्ट्रेलिया, अफ्रीका, अंटार्कटिका, प्रशांत अटलांटिक और हिंद महासागर में देखा जा सकेगा।

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उपच्छाया चंद्र ग्रहण 

भविष्यवक्ता और कुण्डली विश्ल़ेषक डा. अनीष व्यास ने बताया कि उपच्छाया चंद्र ग्रहण का मतलब है कि जब चंद्रमा पर पृथ्वी की छाया न पड़कर उपच्छाया मात्र पड़ती है यानी धुंधलवी सी छाया पड़ती हैं, तो इसे उपच्छाया चंद्र ग्रहण कहा जाता है। इस अवस्था में चंद्र ग्रहण अपने पूर्ण आकार में ही नजर आता है बस थोड़ा सा धुंधला नजर आता है।

कब लगता है चंद्रग्रहण

भविष्यवक्ता डा. अनीष व्यास ने बताया कि पौराणिक मान्यता है कि पूर्णिमा की रात जब राहु और केतु चंद्रमा को निगलने की कोशिश करते हैं, तब चंद्र ग्रहण लगता है। वहीं चंद्र ग्रहण से कुछ घंटे पहले सूतक काल लग जाता है, जिसे ज्योतिष के नजरिए से शुभ नहीं माना जाता है। 

राशियों पर दिखेगा प्रतिकूल प्रभाव

साल का पहला चंद्रग्रहण मंगल बुध के राशि परिवर्तन योग के बीच होने जा रहा है। चंद्रग्रहण के दौरान चंद्रमा तुला राशि में होंगे इसलिए चंद्रग्रहण का सबसे अधिक प्रभाव प्रतिकूल रूप में तुला और मेष राशि पर देखा जाएगा। इनके अलावा यह चंद्रग्रहण वृश्चिक, वृष, कर्क और कन्या राशि वालों के लिए अशुभ फलदायी रहेगा। इन राशियों को चंद्रग्रहण के 15 दिनों के बीच काफी तनाव और परेशानियों का सामना करना होगा।

राशियों के लिए रहेगा शुभ फलदायी

मिथुन, सिंह, धनु, मकर, कुंभ और मीन राशि के लिए 5 मई को लगने वाला चंद्रग्रहण कुल मिलाकर शुभ फलदायी रहेगा। मिथुन राशि के जातकों को चंद्र ग्रहण के बाद लाभ का अवसर मिलेगा। मीन राशि के जातकों को धन का लाभ मिलेगा लेकिन पिता की सेहत और बच्चों को लेकर तनाव हो सकता है।

वैशाख पूर्णिमा पर कर सकेंगे पुण्य कर्म

कुण्डली विश्ल़ेषक डा. अनीष व्यास ने बताया कि भारत में ग्रहण नहीं दिखने से यहां ग्रहण से संबंधित कोई नियम मान्य नहीं होगा। इस कारण वैशाख पूर्णिमा से संबंधित सभी पुण्य कर्मों में किसी तरह की कोई बाधा नहीं रहेगी। पूर्णिमा पर पवित्र नदी में स्नान करने का विशेष महत्व है। किसी तीर्थ क्षेत्र के मंदिरों के दर्शन करें। दान-पुण्य करें। पूर्णिमा पर भगवान सत्यनारायण की कथा करने की परंपरा है। इसके साथ ही भगवान विष्णु और देवी लक्ष्मी का अभिषेक करें। ऊँ नमो भगवते वासुदेवाय मंत्र का जाप करें। इस दिन शिवलिंग पर जल, दूध और फिर से जल चढ़ाकर अभिषेक करना चाहिए। धूप-दीप जलाएं। ऊँ नम: शिवाय मंत्र का जाप करते हुए पूजा करें।

प्राकृतिक आपदाओं की संभावना

भविष्यवक्ता और कुण्डली विश्ल़ेषक डा. अनीष व्यास ने बताया कि ग्रहण की वजह से प्राकृतिक आपदाओं का समय से ज्यादा प्रकोप देखने को मिलेगा। इसमें भूकंप, बाढ़, सुनामी, विमान दुर्घटनाएं, किसी बड़े गुनाहगार का देश में वापस आने का संकेत मिल रहे हैं। प्राकृतिक आपदा में जनहानि कम ही होने की संभावना है। फिल्म एवं राजनीति से दुखद समाचार। व्यापार में तेजी आएगी। बीमारियों में कमी आएगी। रोजगार के अवसर बढ़ेंगे। आय में इजाफा होगा। वायुयान दुर्घटना होने की संभावना। पूरे विश्व में राजनीतिक अस्थिरता यानि राजनीतिक माहौल उच्च होगा। राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप ज्यादा होंगे। सत्ता संगठन में बदलाव होंगे। पूरे विश्व में सीमा पर तनाव शुरू हो जायेगा। देश में आंदोलन, हिंसा, धरना प्रदर्शन हड़ताल, बैंक घोटाला, वायुयान दुर्घटना, विमान में खराबी, उपद्रव और आगजनी की स्थितियां बन सकती है।

- डा. अनीष व्यास 

भविष्यवक्ता और कुण्डली विश्ल़ेषक

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