Tributes To Manmohan Singh | आर्थिक सुधारों के जनक मनमोहन सिंह को PM मोदी ने दी श्रद्धांजलि, याद किए उनके ऐतिहासिक फैसले

By रेनू तिवारी | Sep 26, 2025

भारत के पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह का जन्म 26 सितंबर, 1932 को हुआ था। वह 2004 से 2014 के बीच देश के प्रधानमंत्री रहे। सुलझे हुए अर्थशास्त्री डॉ. सिंह को तत्कालीन प्रधानमंत्री पी वी नरसिंह राव के कार्यकाल में वित्त मंत्री के रूप में किये गये आर्थिक सुधारों का श्रेय भी जाता है। 

सिंह ने 2004 से 2014 के बीच कांग्रेस के नेतृत्व वाली संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) सरकार का नेतृत्व किया था और 1991 से 1996 के बीच पी वी नरसिम्हा राव के नेतृत्व वाली सरकार में वित्त मंत्री के रूप में उनका कार्यकाल महत्वपूर्ण माना जाता है, क्योंकि इस दौरान भारत ने आर्थिक सुधारों की शुरुआत की। सिंह का जन्म 26 सितंबर,1932 को पंजाब के गाह गांव में हुआ था जो अब पाकिस्तान का हिस्सा है। उनका 26 दिसंबर, 2024 को निधन हो गया था।

इससे पहले कांग्रेस ने भी उनकी जयंती पर उन्हें श्रद्धांजलि दी। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की जयंती के मौके पर शुक्रवार को देश के विकास में उनके योगदान को याद किया और कहा कि वह आने वाली पीढ़ियों के लिए ईमानदारी, बुद्धिमत्ता और राष्ट्र के प्रति नि:स्वार्थ सेवा के एक चिरस्थायी प्रतीक बने रहेंगे। सिंह का जन्म 26 सितंबर,1932 को पंजाब के गाह गांव में हुआ था जो अब पाकिस्तान का हिस्सा है।

सिंह ने 2004 से 2014 तक प्रधानमंत्री के रूप में सेवाएं दीं। उनका 26 दिसंबर, 2024 को निधन हो गया था। खरगे ने ‘एक्स’ पर पोस्ट किया, हम राष्ट्र निर्माण में पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह के योगदान को याद करते हैं। वह भारत के आर्थिक परिवर्तन के एक सूत्रधार थे। वह विनम्रता और बुद्धिमत्ता के धनी थे तथा सबके साथ गरिमापूर्ण व्यवहार करते थे और अपने कार्यों से अपनी बातों को ज्यादा प्रभावशाली बनाते थे।

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उन्होंने कहा कि मनमोहन सिंह के आर्थिक सुधारों के दृष्टिकोण ने अवसरों के नये द्वार खोले, एक समृद्ध मध्यम वर्ग का निर्माण किया और अनगिनत परिवारों को गरीबी से बाहर निकाला। खरगे ने कहा, वह निष्पक्षता और समावेशिता में गहराई से विश्वास करते थे और यह सुनिश्चित करते थे कि लाखों लोगों के जीवन को प्रभावित करने वाले कल्याणकारी उपायों के माध्यम से विकास और करुणा साथ-साथ चलें।

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उनके नेतृत्व ने हमें दिखाया कि सार्वजनिक जीवन में ईमानदारी न केवल संभव है, बल्कि शक्तिशाली भी है। खरगे ने कहा कि भारत की पीढ़ियों के लिए वह ईमानदारी, बुद्धिमत्ता और राष्ट्र के प्रति नि:स्वार्थ सेवा के एक चिरस्थायी प्रतीक बने रहेंगे तथा एक मजबूत और अधिक समावेशी भारत की आकांक्षाओं वाली उनकी विरासत जीवित रहेगी।

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